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10 लाख से ज्यादा किसानों से पूछेगी सीएम हेल्पलाइन, धान का भुगतान हुआ कि नहीं

Mon, 05 Oct 2020 10:43 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अजीत बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ
अजीत बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 05 Oct 2020 10:43 AM IST
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CM helpline will ask more than 10 lakh farmers, whether price of paddy has been paid or not
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन प्रदेश के 10 लाख से ज्यादा किसानों से फोन करके पूछेगी कि उन्हें धान का भुगतान निर्धारित समयसीमा के भीतर हुआ कि नहीं। क्रय केंद्रों के बारे में उनसे फीडबैक भी लिया जाएगा। शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी, वहीं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद भी सुनिश्चित होगी। हेल्पलाइन ने प्रश्नावली तैयार करके इस योजना पर काम शुरू कर दिया है।
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मुख्यमंत्री हेल्पलाइन ने कोरोना संक्रमितों, प्रवासी मजदूरों और निगरानी समितियों के मामले में उल्लेखनीय कार्य किया है। एक ही रोगी को अलग-अलग दिनों में कम से कम चार बार फोन करके उन्हें मिल रही सुविधाओं के बारे में फीडबैक लिया। इससे सीएम की टीम-11 को कार्य करने और योजना बनाने में काफी आसानी हुई।
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अब किसानों को बिना किसी बाधा के धान का उचित मूल्य दिलवाने संबंधी कार्य से भी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन को जोड़ा जा रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन को सीधे क्रय केंद्रों के ऑनलाइन डाटा से जोड़ा गया है। इस डाटा के आधार पर वे किसानों से धान बेचने के तीन दिन बाद फोन करके पूछेंगे कि उनके खातों में रकम पहुंची या नहीं?
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केंद्र पर मूल्य में कोई कटौती तो नहीं की गई? हैंडलिंग या अन्य कोई चार्ज तो नहीं लिया गया? क्रय केंद्र के समय पर खुलने संबंधी समस्या या वहां जाने पर असुविधा के बाबत भी जानकारी ली जाएगी। क्रय केंद्रों पर कर्मचारियों के व्यवहार, पानी और सैनिटाइजर की व्यवस्था के बारे में भी जानकारी ली जाएगी।

पिछले साल के किसानों को करेंगे प्रोत्साहित

पिछले साल जिन किसानों ने सरकारी क्रय केंद्रों पर आकर धान बेचा था, उन्हें इस बार भी इन केंद्रों पर ही बेचने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन इन किसानों से पूछेगी कि क्या आपने पिछले साल सरकारी क्रय केंद्र पर धान बेचा था? इस बार आपकी धान की पैदावार कैसी हुई है? क्या इसे सरकारी केंद्र पर ही बेचना चाहेंगे?

पिछले साल धान बेचने में कोई असुविधा तो नहीं हुई? किसानों को धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य की जानकारी भी देंगे। यह भी बताएंगे कि धान बेचने से पहले उसे सुखा लें, जिससे निर्धारित मानक से ज्यादा नमी न रहे। धान की सफाई करके ही इसे केंद्र पर लाने के लिए भी किसानों को प्रेरित करेंगे।

धान रहने तक जारी रहेगी खरीद

पिछले साल सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचने के लिए 9,36,332 किसानों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 7,08,485 किसानों ने धान क्रय केंद्रों पर आकर बेचा। इस बार इनकी संख्या में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि अपेक्षित है। सरकार का प्रयास है कि क्रय केंद्रों के बाहर भी धान बेचने पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिले। जब तक किसानों के पास बेचने के लिए धान उपलब्ध रहेगा, तब तक क्रय केंद्रों पर खरीद व्यवस्था जारी रखी जाएगी।

पिछले सत्र और इस बार सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचने वाले प्रत्येक किसान से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से बात की जाएगी। इसके लिए सभी जरूरी तैयारियां कर ली गई हैं। - आलोक कुमार, सचिव, मुख्यमंत्री
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