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मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद बढ़ाए वैक्सीनेशन सेंटर
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180 के बजाय 200 केंद्रों पर 3000 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं पर हुआ पूर्वाभ्यास
कोरोना से बचाव के टीकाकरण से पहले सोमवार को तीसरे पूर्वाभ्यास में भी कई तरह की खामियां सामने आईं। पंजीकरण संबंधी एप ने धोखा दे दिया तो मैनुअल पंजीकरण किया गया। इसी तरह सिविल अस्पताल में निरीक्षण के दौरान एक ही केंद्र होने पर मुख्यमंत्री ने एतराज जताया तो आनन-फानन यहां दो केंद्र बना दिए गए हैं। राजधानी में तीसरे चरण का ट्रायल करीब 3000 लोगों पर किया गया। हर अस्पताल में दो से तीन केंद्र बनाए गए थे। हर केंद्र पर 15 लोगों का टीकाकरण होना था।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीकाकरण के पूर्वाभ्यास को लेकर हर स्तर पर तैयारी का दावा किया गया था, लेकिन सुबह पहली फजीहत एप को लेकर हुई। एप नहीं चलने पर मैनुअल काम शुरू हुआ। करीब 11:00 बजे कुछ देर के लिए एप चला लेकिन फिर मैनुअल ही काम करना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह डमी एप था। इस वजह से समस्या आई है। राजधानी में पहले 180 केंद्रों पर टीकाकरण होना था, लेकिन एक दिन पहले इसे बढ़ाकर 200 कर दिया गया। 61 अस्पतालों में करीब 3000 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं पर टीकाकरण का अभ्यास किया गया। इसमें केजीएमयू, एसजीपीजीआई, लोहिया संस्थान, एरा मेडिकल कॉलेज के अलावा सिविल अस्पताल, बलरामपुर सहित सभी जिला स्तरीय अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व निजी अस्पताल शामिल थे।
सिविल अस्पताल में 30 के बजाय 23 लोेगों पर अभ्यास
सिविल अस्पताल में निरीक्षण करने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां एक ही केंद्र होने पर एतराज जताया। इस पर तत्काल बर्न यूनिट के नीचे बने वार्ड में एक अन्य केंद्र स्थापित किया गया है। इन दोनों केंद्रों पर करीब 23 लोगों के टीकाकरण का अभ्यास किया गया। जबकि 30 का होना था। अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके नंदा ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद एक केंद्र बढ़ा दिया गया है।
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चिकित्सा संस्थानों में इमरजेंसी सेवा पर रहा जोर
पूर्वाभ्यास के दौरान चिकित्सा संस्थानों में टीकाकरण के बाद किसी तरह की समस्या आने पर निपटने की रणनीति पर ज्यादा जोर दिया गया। इसके पीछे वजह यह थी कि विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर टीकाकरण के दौरान किसी तरह की समस्या होने पर संबंधित को चिकित्सा संस्थानों में रेफर होकर आना है। पीजीआई में एक-एक स्वास्थ्य कर्मी को बुलाकर रजिस्ट्रेशन, वैक्सिनेशन और परीक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई। इस दौरान निदेशक डॉ. आरके धीमन, नोडल अफसर डॉ. अमित गोयल आदि मौजूद रहे। इसी तरह एरा मेडिकल कॉलेज में 16 बूथ बनाए गए। यहां कुल 240 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं पर टीकाकरण का पूर्वाभ्यास किया गया। प्रधानाचार्य डॉ. एमएमए फरीदी ने बताया कि दिन के बाद टीकाकरण में सिर्फ 10 मिनट लग रहा है। 30 मिनट तक टीकाकरण के बाद संबंधित लाभार्थी को रोका जा रहा है।
केजीएमयू में 510 पर टीकाकरण
केजीएमयू के कलाम सेंटर में बने 34 बूथ पर 510 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का टीकाकरण किया गया। यहां डिपो से 68 बॉक्स वैक्सीन भेजी गई। कोविन सॉफ्टवेयर का सर्वर डाउन रहने की वजह से मैनुअल डाटा फीड किया गया। एक इमरजेंसी बूथ भी बनाया गया है। किसी तरह की समस्या आने पर इस बूथ पर वैक्सीनेशन किया जाएगा। लोहिया संस्थान में 135 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का टीकाकरण किया गया। स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. एपी सिंह और संस्थान की डॉ. विनीता शुक्ला मौजूद रहे।
कई जगह करना पड़ा इंतजार
बलरामपुर अस्पताल में पूर्वाभ्यास के लिए पहुंचे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को करीब घंटे इंतजार करना पड़ा। एप में समस्या होने की वजह से वे बाहर खड़े रहे। बाद में सारी प्रक्रिया मैनुअल पूरी कराई गई। डफरिन अस्पताल में पुलिस कर्मियों ने ट्रायल में शामिल स्वास्थ्य कर्मियों के दस्तावेज और सॉफ्टवेयर से मिलान किया। करीब 10:00 बजे यहां टीकाकरण पूर्वाभ्यास की शुरुआत हुई।
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कोरोना से बचाव के टीकाकरण से पहले सोमवार को तीसरे पूर्वाभ्यास में भी कई तरह की खामियां सामने आईं। पंजीकरण संबंधी एप ने धोखा दे दिया तो मैनुअल पंजीकरण किया गया। इसी तरह सिविल अस्पताल में निरीक्षण के दौरान एक ही केंद्र होने पर मुख्यमंत्री ने एतराज जताया तो आनन-फानन यहां दो केंद्र बना दिए गए हैं। राजधानी में तीसरे चरण का ट्रायल करीब 3000 लोगों पर किया गया। हर अस्पताल में दो से तीन केंद्र बनाए गए थे। हर केंद्र पर 15 लोगों का टीकाकरण होना था।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीकाकरण के पूर्वाभ्यास को लेकर हर स्तर पर तैयारी का दावा किया गया था, लेकिन सुबह पहली फजीहत एप को लेकर हुई। एप नहीं चलने पर मैनुअल काम शुरू हुआ। करीब 11:00 बजे कुछ देर के लिए एप चला लेकिन फिर मैनुअल ही काम करना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह डमी एप था। इस वजह से समस्या आई है। राजधानी में पहले 180 केंद्रों पर टीकाकरण होना था, लेकिन एक दिन पहले इसे बढ़ाकर 200 कर दिया गया। 61 अस्पतालों में करीब 3000 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं पर टीकाकरण का अभ्यास किया गया। इसमें केजीएमयू, एसजीपीजीआई, लोहिया संस्थान, एरा मेडिकल कॉलेज के अलावा सिविल अस्पताल, बलरामपुर सहित सभी जिला स्तरीय अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व निजी अस्पताल शामिल थे।
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सिविल अस्पताल में 30 के बजाय 23 लोेगों पर अभ्यास
सिविल अस्पताल में निरीक्षण करने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां एक ही केंद्र होने पर एतराज जताया। इस पर तत्काल बर्न यूनिट के नीचे बने वार्ड में एक अन्य केंद्र स्थापित किया गया है। इन दोनों केंद्रों पर करीब 23 लोगों के टीकाकरण का अभ्यास किया गया। जबकि 30 का होना था। अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके नंदा ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद एक केंद्र बढ़ा दिया गया है।
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चिकित्सा संस्थानों में इमरजेंसी सेवा पर रहा जोर
पूर्वाभ्यास के दौरान चिकित्सा संस्थानों में टीकाकरण के बाद किसी तरह की समस्या आने पर निपटने की रणनीति पर ज्यादा जोर दिया गया। इसके पीछे वजह यह थी कि विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर टीकाकरण के दौरान किसी तरह की समस्या होने पर संबंधित को चिकित्सा संस्थानों में रेफर होकर आना है। पीजीआई में एक-एक स्वास्थ्य कर्मी को बुलाकर रजिस्ट्रेशन, वैक्सिनेशन और परीक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई। इस दौरान निदेशक डॉ. आरके धीमन, नोडल अफसर डॉ. अमित गोयल आदि मौजूद रहे। इसी तरह एरा मेडिकल कॉलेज में 16 बूथ बनाए गए। यहां कुल 240 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं पर टीकाकरण का पूर्वाभ्यास किया गया। प्रधानाचार्य डॉ. एमएमए फरीदी ने बताया कि दिन के बाद टीकाकरण में सिर्फ 10 मिनट लग रहा है। 30 मिनट तक टीकाकरण के बाद संबंधित लाभार्थी को रोका जा रहा है।
केजीएमयू में 510 पर टीकाकरण
केजीएमयू के कलाम सेंटर में बने 34 बूथ पर 510 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का टीकाकरण किया गया। यहां डिपो से 68 बॉक्स वैक्सीन भेजी गई। कोविन सॉफ्टवेयर का सर्वर डाउन रहने की वजह से मैनुअल डाटा फीड किया गया। एक इमरजेंसी बूथ भी बनाया गया है। किसी तरह की समस्या आने पर इस बूथ पर वैक्सीनेशन किया जाएगा। लोहिया संस्थान में 135 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का टीकाकरण किया गया। स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. एपी सिंह और संस्थान की डॉ. विनीता शुक्ला मौजूद रहे।
कई जगह करना पड़ा इंतजार
बलरामपुर अस्पताल में पूर्वाभ्यास के लिए पहुंचे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को करीब घंटे इंतजार करना पड़ा। एप में समस्या होने की वजह से वे बाहर खड़े रहे। बाद में सारी प्रक्रिया मैनुअल पूरी कराई गई। डफरिन अस्पताल में पुलिस कर्मियों ने ट्रायल में शामिल स्वास्थ्य कर्मियों के दस्तावेज और सॉफ्टवेयर से मिलान किया। करीब 10:00 बजे यहां टीकाकरण पूर्वाभ्यास की शुरुआत हुई।