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यूपी के डॉक्टरों को अखिलेश ने दी 'गुड न्यूज'

Thu, 18 Sep 2014 02:08 PM IST
Updated Thu, 18 Sep 2014 02:08 PM IST
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CM Akhilesh Yadav showers happiness on state doctors.

यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने यूपी के मेडिकल कॉलेजों में तैनात डॉक्टरों को बड़ी खुशखबरी दी है।

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किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम में गुरुवार सुबह सीएम अखिलेश यादव ने वादा किया कि यूपी के सभी मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों की रिटायरमेंट की उम्र अब 62 की जगह 65 साल होगी।

गौरतलब है कि केजीएमयू के डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र पहले ही 65 साल की जा चुकी थी। अब यूपी के तमाम जिलों में बने मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों को भी इस सुविधा का लाभ मिल सकेगा।

इतना नहीं, अखिलेश ने केजीएमयू डॉक्टरों की सेलरी में भी बड़ा इजाफा करने का वादा किया है। उन्होंने कहा कि अब केजीएमयू के डॉक्टरों की सेलरी भी पीजीआई के मानकों के आधार पर बनाई जाएगी।

बना यूपी का सबसे मॉडर्न टीचिंग ब्लॉक

CM Akhilesh Yadav showers happiness on state doctors.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) को कई अन्य सुविधाओं की भी सौगात दीं।

एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए बने मॉडर्न टीचिंग ब्लॉक सहित सात सुविधाओं का उन्होंने लोकार्पण किया। इसके अलावा केजीएमयू इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल व 1832 क्षमता के तीन छात्रावासों का शिलान्यास भी मुख्यमंत्री के हाथों हुआ।

सभी कार्यक्रम साइंस कन्वेंशन सेंटर में आयोजित हुए। केजीएमयू के एमबीबीएस छात्र-छात्राओं को कक्षाएं अटैंड करने के लिए एक विभाग से दूसरे विभाग की दौड़ नहीं लगानी पड़ी।

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ये होंगी टीजिंग ब्लॉक की खूबियां

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इस ब्लॉक में पांचों प्रोफेशन की पढ़ाई होगी। हर फ्लोर पर अलग-अलग प्रोफेशन के लिए लेक्चर थिएटर और डिमांस्ट्रेशन रूम की व्यवस्था है।

कई विभागों में इन्हीं कमियों के कारण केजीएमयू में 2014-15 सत्र में एमसीआई ने एमबीबीएस की 65 सीटों की कटौती कर दी है।

खदरा के टीजी हॉस्टल में बनने वाले 1582 बेड की क्षमता वाले ब्वॉयज और गर्ल्स हॉस्टल का शिलान्यास भी मुख्यमंत्री ने किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने मेडिकोज को संबोधित भी किया।

इसके बाद उन्होंने मार्डन टीचिंग ब्लॉक में बने 480 सीटों की क्षमता वाले लेक्चर थिएटर का निरीक्षण किया।

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मेडिकोज के लिए वर्चुअल क्लास

CM Akhilesh Yadav showers happiness on state doctors.

सीएम ने मेडिकोज के लिए वर्चुअल क्लास की सुविधा की शुरुआत की। इसमें शिक्षक जो भी छात्रों को पढ़ाएंगे, उसका पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन पहले से तैयार करना होगा।

प्रेजेंटेशन को केजीएमयू की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। इसका फायदा ये होगा कि मेडिकोज इसे जब चाहे रिवीजन के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे। आजमगढ़, कन्नौज, बांदा, सहारनपुर आदि राजकीय मेडिकल कॉलेजों के छात्र-छात्राएं भी इस पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन का लाभ ले सकेंगे।

इसके अलावा, अच्छी खबर यह भी है कि केजीएमयू में पर्चा बनने से लेकर मरीजों को डिस्चार्ज करने, उनकी रिपोर्ट्स को ऑनलाइन करने की सुविधा का फर्स्ट फेज लगभग पूरा हो चुका है। ये नेटवर्क केजीएमयू में 2400 कंप्यूटर तक फैलाया जाएगा।

फर्स्ट फेज में सभी फैकल्टी तक इसकी कनेक्टिविटी पहुंचा दी गई है। जिसमें 7.5 करोड़ रुपये का खर्च आया है और 1200 कंप्यूटर इसकी मदद से इंटरनेट से जुड़ गए हैं।

जल्द ही 100 कंप्यूटर को और नेटवर्क से जोड़ दिया जाएगा। सेकेंड फेज में मरीजों का डाटा ऑनलाइन होगा। जिसे ऑपरेशन थिएटर से लेकर ओपीडी में बैठे डॉक्टर अपने कम्प्यूटर पर जब भी चाहेंगे एक्सेस कर सकेंगे। थर्ड फेज में केजीएमयू को पूरी तरह से पेपरलेस कर दिया जाएगा।

केजीएमयू इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल

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साइंस कन्वेंशन सेंटर के सेकेंड फ्लोर पर इसकी स्थापना की जानी है। इसमें फैकल्टी से लेकर मेडिकोज को सॉफ्ट स्किल, हैंड आई कोऑर्डिनेशन, एडवांस ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट, बेसिक लाइफ सपोर्ट की ट्रेनिंग दी जाएगी।

सॉफ्ट स्किल में सीनियर से बात करने का सलीका, बॉस से नाराजगी हो तो अपनी बात कैसे कहें। मरीज को रोग की गंभीरता बताने, परिवारीजनों को ये बताना कि आपका रोगी अब नहीं बचेगा आदि भी सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग में आएगा।

हैंड आई कोऑर्डिनेशन का प्रशिक्षण मेडिकोज को लैप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी में निपुण बनाने के लिए दिया जाएगा। क्योंकि इसमें हाथ में उपकरण होते हैं और आंखें टीवी स्क्रीन पर।

यदि दोनों का सामंजस्य ठीक नहीं होगा तो मरीज को सर्जरी के दौरान नुकसान पहुंच सकता है। मेडिकोज को सिमुलेटर पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। एडवांस लाइफ सपोर्ट ट्रेनिंग और बेसिक लाइफ सपोर्ट में मरीज आपातकाल में जान बचाने का प्रशिक्षण होगा।

केजीएमयू बनेगा राष्ट्रीय महत्व का संस्थान

CM Akhilesh Yadav showers happiness on state doctors.

केजीएमयू कुलपति प्रो. रविकांत के अनुसार 105 साल पुराने इस संस्थान को ‘राष्ट्रीय महत्व का संस्थान (आईएनआई)’ का दर्जा मिल जाए तो प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।

संस्थान अपने स्तर से पाठ्यक्रमों को रिडिजाइन कर सकेगा। संस्थान को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के नियमों से बंधने से मुक्ति मिल जाएगी।

एमबीबीएस के छात्रों को एमएस की जगह पांच साल का एमसीएच कोर्स कराने, उपयोगिता के अनुसार पीएचडी कराने, किसी भी पाठ्यक्रम को जरूरत के अनुसार रिडिजाइन करने की क्षमता हासिल होगी। केजीएमयू को डिग्री देने का अधिकार मिलेगा। ये सुविधा सभी एम्स को हासिल है।

जबकि दिल्ली को छोड़कर सभी एम्स एक से दो साल ही पुराने हैं। 409 से अधिक शिक्षकों वाले संस्थान को नियमों में बांधकर रखा गया है।

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