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सीएम योगी का पहला बजट 11 जुलाई को, जानें क्या होगी खासियत
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Mon, 03 Jul 2017 12:21 PM IST
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सीएम आदित्यनाथ योगी
- फोटो : demo pic
यूपी के 2017-18 के बजट का आकार तो फाइनल हो गया है, लेकिन इसमें शामिल योजनाओं में काट-छांट अभी भी जारी है। सरकार लोक कल्याण संकल्प पत्र के ज्यादा से ज्यादा वादे आगामी बजट में लाने का प्रयास कर रही है। योगी सरकार का पहला बजट 11 जुलाई को पेश होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संकेत दिया है कि उनकी सरकार का बजट करीब चार लाख करोड़ के आसपास रहेगा। प्रदेश कैबिनेट बजट के आकार को पहले ही मंजूरी दे चुकी है। पर, बजट में शामिल की जाने वाली योजनाओं पर माथापच्ची अभी जारी है।
सूत्रों ने बताया कि बजट में शामिल कुछ नई योजनाओं के बजटीय आवंटन में कमी की गई है तो कुछ के बजट को बढ़ाया गया है। कुछेक योजनाओं को ड्रॉप कर कुछ नई योजनाएं जोड़ी भी गई हैं।
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यूपी सरकार ने निर्माण परियोजनाओं के लिए विभिन्न विभागों को वित्तीय संस्थाओं से ऋण लेने का फरमान सुनाया था। उनके द्वारा लिए जाने वाले ऋण पर चालू वित्त वर्ष में अदा किए जाने वाली ब्याज की रकम का भी बजट में बंदोबस्त कर दिया गया है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संकेत दिया है कि उनकी सरकार का बजट करीब चार लाख करोड़ के आसपास रहेगा। प्रदेश कैबिनेट बजट के आकार को पहले ही मंजूरी दे चुकी है। पर, बजट में शामिल की जाने वाली योजनाओं पर माथापच्ची अभी जारी है।
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सूत्रों ने बताया कि बजट में शामिल कुछ नई योजनाओं के बजटीय आवंटन में कमी की गई है तो कुछ के बजट को बढ़ाया गया है। कुछेक योजनाओं को ड्रॉप कर कुछ नई योजनाएं जोड़ी भी गई हैं।
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यूपी सरकार ने निर्माण परियोजनाओं के लिए विभिन्न विभागों को वित्तीय संस्थाओं से ऋण लेने का फरमान सुनाया था। उनके द्वारा लिए जाने वाले ऋण पर चालू वित्त वर्ष में अदा किए जाने वाली ब्याज की रकम का भी बजट में बंदोबस्त कर दिया गया है।
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सरकार कर्ज पर निर्भर होने को मजबूर
सीएम योगी आदित्यनाथ
सरकार विभिन्न विभागों के अंतर्गत कार्यरत उपक्रमों को एडीबी सहित कई वित्तीय संस्थाओं से ऋण दिलाने की पहल कर रही है। वित्त विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि कुल राजस्व प्राप्तियों का वेतन, पेंशन व ब्याज पर 50 से 53 फीसदी तक खर्च हो जाता है।
सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों के हिसाब से भुगतान करने से यह भार और बढ़ेगा। इसी बजट से वेतन के एरियर की पहली किस्त भी दी जानी है। किसानों की कर्जमाफी के एलान ने वित्तीय प्रबंधन की चुनौती बढ़ा दी है।
लिहाजा इस बजट में सरकार विकास योजनाओं के लिए लगभग कर्ज पर निर्भर होने को मजबूर हो गई है। न सिर्फ बजट के भीतर पूर्ण ऋण सीमा तक कर्ज लेने की तैयारी है बल्कि अपनी संस्थाओं को बजट के बाहर विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से ऋण दिलाने के प्रयास चल ही रहे हैं। इस पर उसे ब्याज अपने बजट से ही देना होगा। केंद्र व राज्य में एक ही सरकार होने से सरकार काफी हद तक इस स्थिति पर पार पाती नजर आ रही है।
सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों के हिसाब से भुगतान करने से यह भार और बढ़ेगा। इसी बजट से वेतन के एरियर की पहली किस्त भी दी जानी है। किसानों की कर्जमाफी के एलान ने वित्तीय प्रबंधन की चुनौती बढ़ा दी है।
लिहाजा इस बजट में सरकार विकास योजनाओं के लिए लगभग कर्ज पर निर्भर होने को मजबूर हो गई है। न सिर्फ बजट के भीतर पूर्ण ऋण सीमा तक कर्ज लेने की तैयारी है बल्कि अपनी संस्थाओं को बजट के बाहर विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से ऋण दिलाने के प्रयास चल ही रहे हैं। इस पर उसे ब्याज अपने बजट से ही देना होगा। केंद्र व राज्य में एक ही सरकार होने से सरकार काफी हद तक इस स्थिति पर पार पाती नजर आ रही है।