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Lucknow News: कॉम्पैक्टर के साथ सफाई भी गायब
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शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार लाने के लिए कई साल पहले करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए कॉम्पैक्टरों में से ज्यादातर अब गायब हो चुके हैं। दूसरी ओर नए कॉम्पैक्टर नहीं लगाए जा रहे, जिससे कचरा सड़कों पर सड़ रहा है।
इस स्थिति को लेकर नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने शनिवार को महापौर सुषमा खर्कवाल के कार्यकाल के दो साल पूरे होने पर मंच से सबके सामने पीड़ा जाहिर की थी। इसके बाद अमर उजाला ने रविवार को पड़ताल की तो सामने आया कि नई कंपनी ने अब तक पर्याप्त कॉम्पैक्टर नहीं लगाए हैं। वहीं, पहले से लगे कॉम्पैक्टरों को हटाया जा रहा है। इससे सफाई व्यवस्था की हालात और खराब हो रही है। यह स्थिति तब है जब सफाई में सुधार के नाम पर सालाना करीब 700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं।
नौ साल पहले लगने शुरू हुए थे कॉम्पैक्टर
कचरा प्रबंधन योजना के तहत करीब नौ साल पहले शहर में कॉम्पैक्टर लगने शुरू हुए थे। छह साल पहले तक कई चरणों में खुले कूड़ाघरों में 64 कॉम्पैक्टर लगाए गए। ऐसा होने से जो कूड़ा पहले खुले में पड़ता था, वह बंद मशीन में जाने लगा। शुरू में तो कॉम्पैक्टर सही तरीके से चले, लेकिन फिर अवैध ठेलिया वालों से वसूली का अड्डा बन गए। वहीं, कंपनी इकोग्रीन हर महीने नगर निगम से करीब छह करोड़ रुपये टिपिंग फीस के रूप में लेती रही, पर कॉम्पैक्टरों की मरम्मत में लापरवाही करती रही। इससे ज्यादातर कॉम्पैक्टर खराब हो गए। जो चल रहे थे, वे भी अब गायब हो गए हैं। नई कंपनी रामकी अब तक महज तीन कॉम्पैक्टर लगा सकी है, जबकि जरूरत 20 से अधिक की है।
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ट्रांसफर स्टेशन भेज दिए गए काम्पैक्टर
नगर निगम के जोनल सिनेटरी अधिकारी जितेंद्र गांधी का कहना है कि अलीगंज व रहीमनगर में लगे कॉम्पैक्टर काम नहीं कर रहे थे। हो सकता है कि इन्हें ठीक करने के लिए ट्रांसफर स्टेशन भेज दिया गया हो। कॉम्पैक्टर दोबारा कब तक लगाए जाएंगे, इसकी जानकारी नहीं है।
यहां लगाए जाने हैं नए कॉम्पैक्टर
बासमंडी, मूंगफली मंडी, जियामऊ, केंद्रीय कार्यशाला के सामने, नौबस्ता कला, अतरौली, लवकुशनगर, चंद्राकुंज, मडियांव, अखिलापुर, एसडी पैलेस सीतापुर रोड, मसालची टोला, यादव लोहा भंडार कुर्सी रोड, जानकीपुरम, बुद्धेश्वर, अकबरी गेट, सआदतगंज, दुबग्गा बाईपास, जल निगम रोड।
इस स्थिति को लेकर नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने शनिवार को महापौर सुषमा खर्कवाल के कार्यकाल के दो साल पूरे होने पर मंच से सबके सामने पीड़ा जाहिर की थी। इसके बाद अमर उजाला ने रविवार को पड़ताल की तो सामने आया कि नई कंपनी ने अब तक पर्याप्त कॉम्पैक्टर नहीं लगाए हैं। वहीं, पहले से लगे कॉम्पैक्टरों को हटाया जा रहा है। इससे सफाई व्यवस्था की हालात और खराब हो रही है। यह स्थिति तब है जब सफाई में सुधार के नाम पर सालाना करीब 700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं।
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नौ साल पहले लगने शुरू हुए थे कॉम्पैक्टर
कचरा प्रबंधन योजना के तहत करीब नौ साल पहले शहर में कॉम्पैक्टर लगने शुरू हुए थे। छह साल पहले तक कई चरणों में खुले कूड़ाघरों में 64 कॉम्पैक्टर लगाए गए। ऐसा होने से जो कूड़ा पहले खुले में पड़ता था, वह बंद मशीन में जाने लगा। शुरू में तो कॉम्पैक्टर सही तरीके से चले, लेकिन फिर अवैध ठेलिया वालों से वसूली का अड्डा बन गए। वहीं, कंपनी इकोग्रीन हर महीने नगर निगम से करीब छह करोड़ रुपये टिपिंग फीस के रूप में लेती रही, पर कॉम्पैक्टरों की मरम्मत में लापरवाही करती रही। इससे ज्यादातर कॉम्पैक्टर खराब हो गए। जो चल रहे थे, वे भी अब गायब हो गए हैं। नई कंपनी रामकी अब तक महज तीन कॉम्पैक्टर लगा सकी है, जबकि जरूरत 20 से अधिक की है।
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ट्रांसफर स्टेशन भेज दिए गए काम्पैक्टर
नगर निगम के जोनल सिनेटरी अधिकारी जितेंद्र गांधी का कहना है कि अलीगंज व रहीमनगर में लगे कॉम्पैक्टर काम नहीं कर रहे थे। हो सकता है कि इन्हें ठीक करने के लिए ट्रांसफर स्टेशन भेज दिया गया हो। कॉम्पैक्टर दोबारा कब तक लगाए जाएंगे, इसकी जानकारी नहीं है।
यहां लगाए जाने हैं नए कॉम्पैक्टर
बासमंडी, मूंगफली मंडी, जियामऊ, केंद्रीय कार्यशाला के सामने, नौबस्ता कला, अतरौली, लवकुशनगर, चंद्राकुंज, मडियांव, अखिलापुर, एसडी पैलेस सीतापुर रोड, मसालची टोला, यादव लोहा भंडार कुर्सी रोड, जानकीपुरम, बुद्धेश्वर, अकबरी गेट, सआदतगंज, दुबग्गा बाईपास, जल निगम रोड।