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Dustbin Scam: कूड़ेदान घोटाले का दायरा बढ़ना तय, मैनपुरी मामले की विजिलेंस कर रही खुली जांच

Wed, 31 Aug 2022 04:40 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 31 Aug 2022 04:40 PM IST
सार

कूड़ेदान घोटाले में मैनपुरी मामले की विजिलेंस खुली जांच कर रही है। इस तरह के मामले पीलीभीत, बदायूं और सुल्तानपुर में भी आ चुके हैं। ज्यादातर मामलों सिर्फ ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम प्रधान पर ही कार्रवाई हुई है।

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Clean India campaign: area of dustbin scam is bound to increase.
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्लैगशिप प्रोग्राम स्वच्छ भारत मिशन योजना में हुए कूड़ेदान घोटाले का दायरा बढ़ना तय है। विजिलेंस के आगरा सेक्टर द्वारा मैनपुरी में हुए कूड़ेदान घोटाले की खुली जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद यहां भी एफआईआर की जा सकती है। हरदोई और मैनपुरी के अलावा पीलीभीत, बदायूं और सुल्तानपुर में भी कूड़ेदान घोटाले के मामले सामने आ चुके हैं। इन सभी जिलों में स्थानीय स्तर पर जांच कराई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि यह सभी मामले जल्द ही विजिलेंस को सौंपे जा सकते हैं।

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सूत्रों का कहना है कि अब तक की जांच में कई खामियां सामने आई हैं। मैनपुरी में 552 ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान खरीद में अनियमितता की बात कही जा रही है। विजिलेंस के एसपी ने मैनपुरी के सीडीओ कार्यालय से कूड़ेदान खरीद से संबंधी दस्तावेज तलब किए हैं। माना जा रहा है कि विजिलेंस जल्द जांच पूरी कर एफआईआर दर्ज कराएगी।
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उधर, पीलीभीत में भी कूड़ेदान घोटाला सामने आ चुका है। हालांकि इस मामले की जांच स्थानीय स्तर पर जिलाधिकारी द्वारा कराई गई थी। जिसके बाद 2020 में पीलीभीत के 22 ग्राम विकास अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टि देते हुए वेतन वृद्धि रोक दी गई थी। जांच के दौरान पाया गया था कि अधिकतर स्थानों पर ड्रम काटकर कूड़ेदान बना दिया गया और उसके एवज में सरकार से पूरा भुगतान ले लिया गया। इस मामले में जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान व ग्राम सचिवों से रिकवरी के आदेश भी दिए थे। उसके बाद से मामला शांत पड़ गया। इसी तरह बदायूं और सुल्तानपुर में भी मामले सामने आ चुके हैं।
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बड़ों पर कब होगी कार्रवाई
वहीं सूत्रों का कहना है कि यह पूरा घोटाला चार से पांच साल पुराना है। ऐसे में बड़ों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या केवल ग्राम विकास अधिकारी व ग्राम प्रधान अकेले इतना बड़ा घोटाला कर सकते हैं? इस मामले में संबंधित जिलों के जिला पंचायत राज अधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है।

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