कांठ की आंच में धधका पश्चिमी UP, तनाव बरकरार
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उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में स्थित नगर पंचायत कांठ नौ दिनों से अंदर ही अंदर कांठ धधक रहा था लेकिन अफसर हल्के में लेते रहे। भाजपा ने महापंचायत का ऐलान किया लेकिन आखिरी दिन तक पुलिस और प्रशासन तमाशा देखता रहा।
समझौते का कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया। नेताओं से भी ठीक से बातचीत नहीं की गई। आखिर उनकी नाकामी ने पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बवाल की आंच में धधका दिया है।
कांठ के चैदरी में 26 जून को मंदिर से लाउडस्पीकर उतारने को लेकर बवाल शुरू हुआ था। अफसरों की अनदेखी की वजह से ही अगले दिन बड़ा बवाल हो गया था। तभी से बाजार बंद थे।
लोगों में जबरदस्त गुस्सा था लेकिन प्रशासन अपनी हनक पर अड़ा हुआ था। कमिश्नर और डीआईजी ने कई बार चुनिंदा लोगों और वहां के व्यापारियों के साथ बैठकें की लेकिन मामला सुलटा नहीं।
भारी पड़ी अफसरों की लापरवाही
इसी बीच भाजपा ने महापंचायत का ऐलान किया था लेकिन उसे शुरू में हल्के में लिया जाता रहा। 3 जुलाई को विधायक अनीसुर्रहमान के घर पर समझौता वार्ता शुरू हुई लेकिन इसकी बुनियाद ही बेहद कमजोर रही।
बड़े अफसर इस वार्ता से नदारद रहे। देर शाम तक समझौता कराया गया लेकिन उसे पब्लिक ने नकार दिया और फिर भाजपा ने पंचायत कराने का ऐलान कर दिया।
देर रात में अफसरों ने अपनी तैयारी शुरू की लेकिन कमजोर मन से। शुक्रवार को भी महापंचायत के लिए जाते भाजपाईयों को गिरफ्तार करके अफसर संतुष्ट होते रहे लेकिन लोगों का मूड नहीं भांप सके।
यही गलती भारी पड़ गई और इतने बड़े बवाल को जन्म दे दिया।
नहीं पहुंच सके भाजपा नेता
हिंदू महापंचायत में हिस्सा लेने निकले भाजपा के चार सांसदों और सरधना विधायक संगीत सोम समेत सभी बड़े नेताओं को पुलिस ने कांठ से पहले ही गिरफ्तार कर लिया।
जिस पर कार्यकर्ताओं ने जगह - जगह सड़कें जाम कीं और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कुछेक कार्यकर्ता पुलिस की नजरों से बचकर महापंचायत स्थल तक पहुंचने में कामयाब रहे, जिन्हें पुलिस ने लाठियां फटकारने के बाद गिरफ्तार कर लिया।
भाजपा नेताओं को दबोचने के लिए पुलिस सुबह से ही सक्रिय थी। इसके लिए कांठ पहुंचने वाले हर रास्ते पर आठ से दस बैरियर लगाकर भारी फोर्स लगाया गया था।
वहीं कांठ में महापंचायत नहीं होने देने से भड़की भीड़ ने मुरादाबाद सहारनपुर रेल मार्ग पर कब्जा जमा लिया। वहां से गुजर रही कुंभ एक्सप्रेस (12369) पर पथराव कर रोक लिया।
ट्रेन ड्राइवर को लगा पत्थर
इसके अलावा हरिद्वार से आ रही गुड्स ट्रेन के इंजन पर पथराव कर खड़ा कर दिया। अप और डाउन लाइन पर ट्रेन खड़ी होने से रूट बंद हो गया। दोनों ओर से आ रही गाड़ियों को जहां तहां रोकना पड़ गया।
तीन घंटे बाद मुख्यालय ने ट्रेनों को रूट बदलकर चलाने का आदेश दिया। शाम पांच बजे तक 24 गाड़ियों के रूट बदल दिए गए, जबकि लखनऊ सहारनपुर पैसेंजर को मुरादाबाद में रद्द कर दिया। सहारनपुर रूट पर ट्रैक देर रात तक प्रदर्शनकारियों के कब्जे में था।
कांठ में डेढ़ बजे अचानक की बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी ट्रैक पर पहुंच गए। इस दौरान वहां से हावड़ा हरिद्वार कुंभ एक्सप्रेस (12369) गुजर रही थी। प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन को रुकवा लिया। वहीं पंजाब से मुरादाबाद की ओर आ रही गुड्स ट्रेन को रोकने का प्रयास किया। ट्रेन नहीं रोकने पर पथराव शुरू कर दिया।
ड्राइवर ने पत्थर लगने के बाद ट्रेन रोक दी। कंट्रोल रूम में सूचना मिलने के बाद अधिकारियों के हाथ पैर फूल गए। गाड़ियों को जहां तहां रोक दिया गया। आनन फानन अधिकारी कंट्रोल रूम में आकर जम गए। बड़ौदा हाउस तक हड़कंप मचने के बाद 4:30 पर रूट बदलने का आदेश दिया गया। अप और डाउन की मिलाकर 24 गाड़ियाें के रूट बदल दिए गए।