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लखनऊः डेंगू पर काबू के दावे सिर्फ कागजी, बढ़ रहा मर्ज, अब तक 26 लोगों की हो चुकी है मौत

Sat, 23 Nov 2019 05:22 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 23 Nov 2019 05:22 PM IST
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Claims to control dengue is only on paper, disease is growing.
प्रतीकात्मक तस्वीर

डेंगू के मामलों पर हाईकोर्ट सख्त रुख दिखा चुका है। एक नहीं ,कई बार। फिर भी डेंगू नहीं थम रहा। हर साल यह जान लेता है। सैकड़ों लोग इसकी चपेट में आते हैं। इस साल के आंकड़े ही देखें तो 1600 लोग शहर में अब तक इसकी गिरफ्त में हैं। 26 की मौत हो चुकी है। हालांकि, स्वास्थ्य महकमा 6 मौतें ही होना मानता है। आखिर ऐसा क्यों? दरअसल, रोकथाम के सिर्फ दावे होते हैं। मौतों पर आंकड़े छिपाने की बाजीगरी होती है। ऐसे में डेंगू कैसे थमेगा?

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डेंगू की रोकथाम को ज्यादातर अभियान कागजों पर चल रहे हैं। स्वास्थ्य महकमा और नगर निगम का दावा है कि इसके लिए इस बार 42 लाख रुपये का बजट है। इसमें से काफी खर्च भी हो चुका है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक आबादी के अनुपात में बजट कम है।
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पर, क्या इसका भी ईमानदारी से इस्तेमाल हो रहा है। ‘अमर उजाला’ टीम ने पड़ताल की तो सामने आया कि जहां मरीज मिल रहे हैं वहां भी एंटी लार्वा का छिड़काव और फॉगिंग नहीं हो रही है। जबकि हर नए मरीज के मिलने के साथ उसके इलाके में छिड़काव कराने का दावा रोज किया जाता है।

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डेंगू की रोकथाम के दावों की खुली पोल

केस 1 : सिविल अस्पताल में हुई जांच में तेलीबाग बाजार के विनीत यादव को डेंगू की पुष्टि हुई। मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर पहुंच गया, पर अभी तक उसके घर के आस-पास एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं हुआ।

केस 2 : डेंगू के मरीज डालीगंज क्रॉसिंग ब्रांच रोड के मो. साकिब को हालत बिगड़ने पर बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया। कई दिन तक यहां रहने के बाद लौटने पर भी स्वास्थ्य विभाग व नगर निगम ने इनके घर के पास फॉगिंग नहीं कराई।

केस 3 : मोहनलालगंज के दहियर गांव निवासी इंद्रेश श्रीवास्तव डेंगू की चपेट में थे। निजी अस्पताल में सुधार होने पर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। इंद्रेश का भी कहना है कि अभी तक घर के पास एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं हुआ।


डेंगू साल-दर साल ले रहा जान

2017- 291 लोग चपेट में आए, दो की मौत।
2018- 572 बीमार हुए, एक की मौत।
2019- 1518 चपेट में आए, 6 की मौत।
(ये आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के हैं। हालांकि, मौतों का आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा था। कई मामलों में मौतों की वजह कुछ और बताई गई। मसलन शॉक में जाना। हेमरेज। पर, ये सब क्यों हुआ, इस पर जवाब गोल-मोल ही रहा।)

छिड़काव में लगे हैं 100 कर्मचारी, जरूरत 400 की

एंटी लार्वा के छिड़काव में स्वास्थ्य विभाग व नगर निगम के 100 कर्मचारी लगे हैं। हालांकि, आबादी के मुताबिक इनकी संख्या 400 के करीब होनी चाहिए। कम कर्मचारी होने से डेंगू के अति संवेदनशील इलाकों में ही छिड़काव व फॉगिंग कराई जा रही है।

महानिदेशालय से मिला था 42 लाख का बजट
स्वास्थ्य विभाग को डेंगू की रोकथाम को एक माह पहले ही 42 लाख रुपये का बजट स्वास्थ्य महानिदेशालय से मिला था। इसमें कर्मचारियों को दो माह के लिए लगाया गया है। अफसरों का कहना है कि नवंबर के आखिर में सभी कर्मचारियों को हटाया जाएगा।

सीएमओ ने कहा-बजट की कमी नहीं, जांच कराएंगे
सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल का कहना है कि बजट की कमी नहीं है। वह दावा करते हैं कि सभी जगह दवाओं का छिड़काव हो रहा है। अगर मरीजों के घर के आस-पास छिड़काव नहीं हुआ है तो जांच कराई जाएगी।

31 फॉगिंग मशीनें और 110 वार्ड

नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुनील रावत बताते हैं कि इस समय कुल 31 बड़ी फॉगिंग मशीनें हैं। जितना बड़ा शहर है उस हिसाब से हर वार्ड के लिए कम से कम एक मशीन जरूरी है। 31 में से 27 मशीनें तो वार्डों में भेजी जा रही हैं। अन्य तीन वीआईपी इलाके के लिए है। नगर निगम का कहना है कि हर वार्ड के हिसाब से मशीन होनी चाहिए।

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