एलडीए अफसरों के खिलाफ एफआईआर कराने की मुलायम की रिश्तेदार की अपील खारिज
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सीजेएम कोर्ट ने एलडीए अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर कराने की सपा प्रमुख मुलायम की रिश्तेदार व पूर्व उपसचिव अंबी बिष्ट की अपील खारिज कर दी है। उन्होंने कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 156(3) में गोमतीनगर थाने में अफसरों के खिलाफ उनके कार्यालय से 1.32 लाख रुपये के जेवरात गुम होने का मामला दर्ज कराने की मांग की थी। अपील खारिज होने से एलडीए वीसी सहित दूसरे अधिकारियों को राहत मिली है।
अंबी बिष्ट ने प्रार्थना पत्र दिया था कि तीन फरवरी को उन्हें मौखिक रूप से एलडीए से कार्यमुक्त कर दिया गया। बताया गया कि 31 जनवरी को शासन से मेरा तबादला हो चुका है। एलडीए वीसी के आदेश पर मेरे कार्यालय पर ताला भी लगा दिया गया। मेरे पुत्र का तिलकोत्सव 16 फरवरी को था। इस कारण कुछ शादी के कार्ड और मूल्यवान सामान कार्यालय में ही रखे थे।
अंबी बिष्ट ने एलडीए वीसी पर राजनैतिक दुर्भावना व पूर्वाग्रह से ग्रसित होने का आरोप लगाते हुए आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग कर प्रताड़ित करने का आरोप भी लगाया। कहा, मौखिक व लिखित में कई बार याचना के बाद भी मेरा सामान उपलब्ध नहीं कराया गया।
डीएम के आदेश पर एसीएम की मौजूदगी में मेरे प्रतिनिधि सौरभ यादव के सामने कार्यालय खोला गया। लेकिन, मेज की दराज में रखे 1.32 लाख रुपये के जेवरात नहीं मिले। गोमतीनगर थाने में प्रार्थना पत्र देने के बाद भी एफआईआर नहीं दर्ज हुई। एसएसपी और उच्च अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देने का भी फायदा नहीं हुआ।
पुलिस ने कहा, नहीं दिया जेवर रखने का साक्ष्य
क्षेत्राधिकारी गोमतीनगर ने विस्तृत जांच रिपोर्ट में बताया कि अंबी बिष्ट करीब 22 साल से एलडीए में नियुक्त थीं। नवागत वीसी प्रभु एन सिंह को राजनैतिक घराने से ताल्लुक रखने वाली आवेदिका के परिवार के नाम कई भूखंड आवंटित होने की सूचना मिली। तबादला होने के बाद की कार्रवाई और भूखंड के आवंटन के निरस्तीकरण से दोनों में वैचारिक मतभेद दिख रहे हैं।
अंबी बिष्ट ने जेवरात कार्यालय में रखे होने का भी कोई साक्ष्य नहीं दिया। ऐसे में कोई संज्ञेय अपराध एलडीए के अधिकारियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया नहीं बनता है। इस रिपोर्ट के आधार पर सीजेएम कोर्ट ने अपील खारिज कर दी है।