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लखनऊ: चीनी बिजली मीटर कहीं लेसा तो कहीं उपभोक्ताओं को लगा रहे चूना, चल रहा उगाही का खेल

Mon, 28 Mar 2022 04:15 PM IST
ishwar ashish नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ
नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 28 Mar 2022 04:15 PM IST
सार

चीनी बिजली मीटरों के कारण उपभोक्ता और लेसा दोनों पर ही बोझ पड़ रहा है। इन्हें बदलने का पांच साल पहले शुरू हुआ सिलसिला अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।

 

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chinese electricity meters are creating problems for consumers.
चीनी बिजली मीटर। - फोटो : amar ujala

विस्तार

चीनी बिजली मीटर से न तो उपभोक्ता खुश हैं और न तो लेसा...। लेसा लाइन हानियों का रोना रोता रहता है। उपभोक्ता चीनी मीटरों की चौकड़ी से दिल थामे बैठा रहता है। उफ्फ! करता रहता है। पांच साल हो चले चीनी मीटर को बदलने के अभियान को। उसके हिस्से इन मीटरों की चाल को लेकर बदनामी जो आती है, वो अलग। यह अलग किस्सा है कि कौन किसको चपत लगा रहा है। बदनामी का सवाल तो तब उठता है जब लेसा खुद पारदर्शी व्यवस्था दे। बहरहाल, आज भी ट्रांस व सिस गोमती जोन में 51,500 से अधिक चीनी मीटर लगे हैं।

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पांच साल पहले की बात है। यूपी पावर कॉर्पोरेशन ने बड़े जोर-शोर से चीनी मीटरों को बदलने का अभियान शुरू किया। दावा किया गया कि इलेक्ट्रॉनिक मीटर इन चीनी मीटरों से बेहतर हैं। इससे बिजली चोरी की आशंका भी कम होगी। यह भी बड़ा रोचक रहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीटरों की चौकड़ी को लेकर लखनऊ के हर कोने से सवाल उपभोक्ता उठाते रहे हैं। गाहे-बगाहे हुई जांचों में इन मीटरों की कुछ ज्यादा ही फुर्ती से चलने की शिकायतें पुष्ट भी हुईं। बहरहाल, जहां तक बात चीनी मीटरों के बदलने की है तो पांच साल में भी आंकड़ा शत-प्रतिशत तक नहीं पहुंच सका। इनसे कहीं मीटर तेज चलने पर उपभोक्ता की जेब ढीली हो रही है, तो कहीं मीटर की चाल धीमी करके कुछ उपभोक्ता लेसा को चूना लगा रहे हैं।
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इन मीटरों को बदलने का जिम्मा अधिशासी अभियंता (परीक्षण) व सहायक अभियंता (मीटर) का था। जिन इलाकों में चीनी मीटर लगे हुए हैं, वहां लाइन हानियां कम नहीं हो रही हैं, जबकि कॉर्पोरेशन के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक दैनिक कॉन्फ्रेंस में लाइन हानियों को कम करने का निर्देश देते हैं। ये चीनी मीटर दस साल तक बिजली उपभोग को रिकॉर्ड करते हैं। आखिर मीटर नहीं बदले जाने के सवाल को लेकर हमने गणेशगंज के कई व्यापारियों से सवाल किए। हमने जानना चाहा कि कहीं इसमें सांठगांठ का खेल तो नहीं। व्यापारियों का कहना है कि हमने तो दुकान और मकान में लगे चीनी मीटरों को बदलने के लिए इलाकाई इंजीनियरों को पत्र भी लिखे, पर कोई सुनता नहीं।
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घनी बस्तियों में लगे हैं मीटर
ये चीनी मीटर 90 फीसदी घनी आबादी के मकानों-दुकानों में लगे हैं। इनमें ठाकुरगंज, राधाग्राम, मुफ्तीगंज, नैपियर रोड कॉलोनी, चौपटिया, चौक, नादान महल रोड, राजा बाजार, सुभाष मार्ग, यहियागंज, वजीरगंज, सिटी स्टेशन, बारूदखाना, हुसैनगंज, फूलबाग, मॉडल हाउस, खंदारी बाजार, नाका, चारबाग, गणेशगंज, कैसरबाग, पाटानाला, नक्खास, खदरा, त्रिवेणीनगर, मोहन मीकिन रोड, मड़ियांव और भरतनगर इलाके हैं।

चीनी मीटर से चलता है उगाही का धंधा
चीनी मीटर की रीडिंग में बड़े पैमाने पर हेराफेरी हो रही है। सूत्रों के मुताबिक इस खेल को अमीनाबाद का एक खास सिंडीकेट अंजाम दे रहा। इस सिंडीकेट के सदस्य परीक्षण खंडों में संविदा कर्मचारी के रूप में काबिज हैं। ये संविदा कर्मचारी चीनी मीटरों की रीडिंग को बैक करने एवं उसकी चाल को धीमी करने के खेल में माहिर हैं। वहीं, इस मीटर की सील को खोलना एवं दोबारा लगाना बहुत आसान है। बहरहाल, इससे उनका उगाही का धंधा चल रहा है।

ऐसे लगा रहे चूना
जो उपभोक्ता चीनी मीटर से बिजली का उपभोग कर रहे हैं, उनमें अधिकतर की प्रति माह रीडिंग दर्ज नहीं होती है। ऐसे उपभोक्ता एक माह में यदि 400 यूनिट बिजली जलाते हैं तो बिलिंग सेंटर पर जाकर 150 यूनिट का बिल बनवाकर जमा कर देते हैं। इसी के बाद असल खेल शुरू होता है। जब मीटर में 2000 से 3000 यूनिट रीडिंग स्टोर हो जाती तो सिंडीकेट से जुड़े कर्मचारियों की मुट्ठी गर्म कर रीडिंग को बैक करा लेते हैं।

इन इलाकों में लगे हैं सबसे ज्यादा चीनी मीटर

खंड          चीनी मीटर
रेजीडेंसी     3847
सेस-1       3722
सेस-2       2773
ठाकुरगंज    2639
राजाजीपुरम  2632
हुसैनगंज     1852

किस जोन में कितने मीटर
ट्रांस गोमती        29,000
सिस गोमती       22,500

जल्द शुरू होगा अभियान
दोनो मुख्य अभियंताओं से चीनी मीटर बदलने को लेकर बीते हफ्ते बैठक हो चुकी है। किस जोन में कितने चीनी मीटर का आंकड़ा जुटाया जा चुका है। चीनी मीटरों को बदलने का अभियान जल्द शुरू होगा।  - प्रदीप कक्कड़, निदेशक (वाणिज्य) मध्यांचल विद्युत वितरण निगम
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