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चीन की कंपनियां यूपी में नहीं ले सकेंगी ठेका, औद्योगिक विकास विभाग ने जारी किए दिशा-निर्देश
Mon, 14 Sep 2020 11:27 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 14 Sep 2020 11:27 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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चीन व अन्य पड़ोसी देशों की कंपनियां प्रदेश के औद्योगिक विकास विभाग के नियंत्रण में आने वाले प्रोजेक्ट में बिना सरकारी अनुमति के अब ठेका नहीं ले पाएंगी। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग ने सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों व विभाग से संबंधित संस्थाओं को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
विशेष सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास सुजाता शर्मा ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय (व्यय विभाग) के सचिव डॉ. टीवी सोमनाथन के पत्र व राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करने को कहा है।
दरअसल, केंद्र के पत्र में किसी देश के नाम की जगह सीमावर्ती देशों का जिक्र किया गया है। हालांकि माना जा रहा है कि चीन से सीमा विवाद के मद्देनजर ये दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
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सरकार ने जिस तरह की प्रक्रिया तय की है, उसके तहत पड़ोसी देशों के ठेकेदारों को ठेके के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इससे पता चल सकेगा कि कौन ठेकेदार किस देश से है। इससे चीन की कंपनियों को चिह्नित कर प्रतिबंधित किया जा सकेगा। चीनी कंपनियों के तमाम एप पहले ही प्रतिबंधित किए जा चुके हैं।
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विशेष सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास सुजाता शर्मा ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय (व्यय विभाग) के सचिव डॉ. टीवी सोमनाथन के पत्र व राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करने को कहा है।
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दरअसल, केंद्र के पत्र में किसी देश के नाम की जगह सीमावर्ती देशों का जिक्र किया गया है। हालांकि माना जा रहा है कि चीन से सीमा विवाद के मद्देनजर ये दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
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सरकार ने जिस तरह की प्रक्रिया तय की है, उसके तहत पड़ोसी देशों के ठेकेदारों को ठेके के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इससे पता चल सकेगा कि कौन ठेकेदार किस देश से है। इससे चीन की कंपनियों को चिह्नित कर प्रतिबंधित किया जा सकेगा। चीनी कंपनियों के तमाम एप पहले ही प्रतिबंधित किए जा चुके हैं।
पड़ोसी देशों की कंपनियों को गृह व रक्षा मंत्रालय से लेनी होगी अनुमति
निर्देशों के मुताबिक पड़ोसी देशों की कंपनियों को पहले केंद्रीय गृह व रक्षा मंत्रालय से आवश्यक अनुमति लेनी होगी। इसके बाद प्रदेश सरकार के सक्षम प्राधिकरण में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसका गठन प्रदेश सरकार को करना है।
प्राधिकरण हर महीने केंद्र को ब्योरा भेजेगा कि उसके समक्ष कितने आवेदन आए और कितने मंजूर किए गए। इसके दायरे में पीपीपी वाली परियोजनाएं, राज्य द्वारा संचालित परियोजनाएं, सार्वजनिक उपक्रमों व निगमों के साथ स्थानीय निकायों की परियोजनाएं व सरकारी खरीद आएंगी।
प्राधिकरण हर महीने केंद्र को ब्योरा भेजेगा कि उसके समक्ष कितने आवेदन आए और कितने मंजूर किए गए। इसके दायरे में पीपीपी वाली परियोजनाएं, राज्य द्वारा संचालित परियोजनाएं, सार्वजनिक उपक्रमों व निगमों के साथ स्थानीय निकायों की परियोजनाएं व सरकारी खरीद आएंगी।