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यूपी के 25 जिलों में पिलाई जाएगी इनेक्टिव पोलियो वायरस वैक्सीन, बच्चों को मिलेगी दोहरी सुरक्षा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 06 Oct 2018 10:01 AM IST
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प्रदेश के 25 जिलों में पोलियो के खात्मे के लिए इनेक्टिव पोलियो वायरस वैक्सीन (आईपीवी) की खुराक दी जाएगी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने दो साल से नीचे के बच्चों को आईपीवी की दो खुराक देने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला प्रदेश में बॉयोमेड कंपनी की बाईवेलेंट वैक्सीन में पोलियो का टाइप-2 वायरस मिलने के बाद किया गया है। इससे बच्चों को पोलियो वायरस से दोहरी सुरक्षा मिलेगी।
यूपी के 25 जिलों के साथ ही तेलंगाना के 24 जिलों में भी बच्चों को आईपीवी की खुराक दी जाएगी। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बाईवेलेंट पोलियो वैक्सीन में मिला टाइप-2 पोलियो वायरस काफी कमजोर होता है। इससे बच्चे को लकवा नहीं हो सकता।
टाइप-2 पोलियो वायरस भारत में ट्राइवेलेंट पोलियो वैक्सीन में भी था। इसमें पोलियो के टाइप-1, 2 और 3 तीनों वायरस होते हैं। इसे अप्रैल 2016 में पोलियो उन्मूलन अभियान से हटा दिया गया था। टाइप-2 वायरस पोलियो वैक्सीन लेने वाले बच्चों के मल में 4 से 6 सप्ताह तक रहता है और इसके बाद वह खत्म हो जाता है।
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बता दें, प्रदेश के कुछ जिलों में विशेष कंपनी की वैक्सीन का इस्तेमाल किया गया था। इन सभी जिलों में स्वास्थ्य मंत्रालय विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से निगरानी रख रहा है। अपर सचिव मनोज झलानी ने यूपी के मिशन निदेशक को लिखे पत्र में 25 जिलों में टाइप-2 वायरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए विशेष मॉपअप राउंड के तहत इनेक्टिव पोलियो वायरस वैक्सीन (आईपीवी) देने का अभियान चलाने के लिए कहा है।
इससे उन सभी बच्चों का टीकाकरण हो जाएगा, जिन्होंने पहले आईपीवी नहीं ली है। दरअसल, आईपीवी में टाइप-1, 2 और 3 तीनों तरह के पोलियो वायरस होते हैं। मंत्रालय का दावा किया है कि बाईवेलेंट पोलियो वैक्सीन के कारण बीमारी होने की संभावना पूरी तरह शून्य है।
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यूपी के 25 जिलों के साथ ही तेलंगाना के 24 जिलों में भी बच्चों को आईपीवी की खुराक दी जाएगी। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बाईवेलेंट पोलियो वैक्सीन में मिला टाइप-2 पोलियो वायरस काफी कमजोर होता है। इससे बच्चे को लकवा नहीं हो सकता।
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टाइप-2 पोलियो वायरस भारत में ट्राइवेलेंट पोलियो वैक्सीन में भी था। इसमें पोलियो के टाइप-1, 2 और 3 तीनों वायरस होते हैं। इसे अप्रैल 2016 में पोलियो उन्मूलन अभियान से हटा दिया गया था। टाइप-2 वायरस पोलियो वैक्सीन लेने वाले बच्चों के मल में 4 से 6 सप्ताह तक रहता है और इसके बाद वह खत्म हो जाता है।
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बता दें, प्रदेश के कुछ जिलों में विशेष कंपनी की वैक्सीन का इस्तेमाल किया गया था। इन सभी जिलों में स्वास्थ्य मंत्रालय विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से निगरानी रख रहा है। अपर सचिव मनोज झलानी ने यूपी के मिशन निदेशक को लिखे पत्र में 25 जिलों में टाइप-2 वायरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए विशेष मॉपअप राउंड के तहत इनेक्टिव पोलियो वायरस वैक्सीन (आईपीवी) देने का अभियान चलाने के लिए कहा है।
इससे उन सभी बच्चों का टीकाकरण हो जाएगा, जिन्होंने पहले आईपीवी नहीं ली है। दरअसल, आईपीवी में टाइप-1, 2 और 3 तीनों तरह के पोलियो वायरस होते हैं। मंत्रालय का दावा किया है कि बाईवेलेंट पोलियो वैक्सीन के कारण बीमारी होने की संभावना पूरी तरह शून्य है।
देश में 2011 में आखिरी बार मिला था पोलियो वायरस
भारत में आखिरी पोलियो वायरस 13 जनवरी 2011 को मिला था। इसके बाद लगातार तीन साल तक पोलियो का एक भी केस नहीं मिलने पर मार्च 2014 में देश को पोलियो वायरस से मुक्त घोषित किया गया था। इसी तरह भारत में पोलियो वायरस टाइप-2 वर्ष 1999 में आखिरी बार मिला था।
इन जिलों के बच्चों को दी जाएगी आईपीवी
अमरोहा, बदायूं, बागपत, बरेली, बस्ती, बिजनौर, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, गाजीपुर, गोरखपुर, हापुड़, कुशीनगर, मऊ, मेरठ, मिर्जापुर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, रामपुर, सहारनपुर, संभल, संतकबीरनगर, शामली, सिद्धार्थ नगर।
एनएचएम के निदेशक पंकज कुमार ने कहा कि आईपीवी पूरी तरह से सुरक्षित है। बाईवेलेंट वैक्सीन को वापस ले लिया गया है और इसे बनाने वाली बॉयोमेड कंपनी के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
इन जिलों के बच्चों को दी जाएगी आईपीवी
अमरोहा, बदायूं, बागपत, बरेली, बस्ती, बिजनौर, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, गाजीपुर, गोरखपुर, हापुड़, कुशीनगर, मऊ, मेरठ, मिर्जापुर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, रामपुर, सहारनपुर, संभल, संतकबीरनगर, शामली, सिद्धार्थ नगर।
एनएचएम के निदेशक पंकज कुमार ने कहा कि आईपीवी पूरी तरह से सुरक्षित है। बाईवेलेंट वैक्सीन को वापस ले लिया गया है और इसे बनाने वाली बॉयोमेड कंपनी के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।