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राजधानी में मिले चार लावारिस, दिलाया आश्रय
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राजधानी में मिले चार लावारिस बच्चे, राजकीय बालगृह शिशु व बालक में दिलाया आश्रय
राजधानी में अलग-अलग जगह से चार बच्चे लावारिस मिले हैं। इनमें से दो बच्चे 11 साल के हैं और दो दस साल से कम उम्र के हैं।
एक आठ साल की बच्ची भी है जो चारबाग की छोटी लाइन से मिली है। इनमें दो बच्चे गुजरात के एक मदरसे के छात्र हैं जो वहां शिक्षक द्वारा पिटाई किए जाने के बाद भागकर बिहार जा रहे थे।
उन्हें राजकीय बालगृह शिशु और अन्य दो बच्चों को बालगृह बालक में आश्रय दिलाया गया है। रविवार रात रेलवे चाइल्ड लाइन ने दो बालकों को एक साथ भटकते देखा।
काफी देर वाच करने के बाद चाइल्ड लाइन के दिवाकर ने जीआरपी की मदद से बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया और उन्हें राजकीय बालगृह बालक में आश्रय दिलाया।
समिति की सदस्य सुधा रानी ने बताया कि बिहार निवासी दोनों बच्चे गुजरात के एक मदरसे के छात्र हैं। बच्चों ने बताया कि वे गुजरात के एक मदरसे से भाग कर आए हैं।
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मदरसे के शिक्षक उनकी पिटाई करते थे जिससे वे वहां से भागकर बिहार जा रहे थे। वहीं रेलवे चाइल्ड लाइन को आठ साल की एक बच्ची प्लेटफॉर्म नंबर छह पर रोती मिली।
बच्ची को राजकीय बालगृह शिशु में आश्रय दिलाया गया है। उधर, सिटी चाइल्ड लाइन को एक पांच साल का बच्चा चिनहट थाने से मिला। चिनहट थाना पुलिस के मुताबिक बच्चा लावारिस सड़क पर मिलने से चाइल्ड लाइन को सुपुर्द किया गया है।
विजेंद्र शर्मा ने बताया कि बच्चे को बाल कल्याण समिति की मदद से राजकीय बाल गृह शिशु में आश्रय दिलाया गया है।
बालक की हुई घर वापसी
बाल कल्याण समिति की सदस्य सुधा रानी ने बताया कि तीन दिन पूर्व लावारिस मिले बालक को राजकीय बालगृह बालक में आश्रय दिलाया गया था। उसके परिवारीजनों से संपर्क कर रविवार को उसकी घर वापसी करा दी गई।
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राजधानी में अलग-अलग जगह से चार बच्चे लावारिस मिले हैं। इनमें से दो बच्चे 11 साल के हैं और दो दस साल से कम उम्र के हैं।
एक आठ साल की बच्ची भी है जो चारबाग की छोटी लाइन से मिली है। इनमें दो बच्चे गुजरात के एक मदरसे के छात्र हैं जो वहां शिक्षक द्वारा पिटाई किए जाने के बाद भागकर बिहार जा रहे थे।
उन्हें राजकीय बालगृह शिशु और अन्य दो बच्चों को बालगृह बालक में आश्रय दिलाया गया है। रविवार रात रेलवे चाइल्ड लाइन ने दो बालकों को एक साथ भटकते देखा।
काफी देर वाच करने के बाद चाइल्ड लाइन के दिवाकर ने जीआरपी की मदद से बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया और उन्हें राजकीय बालगृह बालक में आश्रय दिलाया।
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समिति की सदस्य सुधा रानी ने बताया कि बिहार निवासी दोनों बच्चे गुजरात के एक मदरसे के छात्र हैं। बच्चों ने बताया कि वे गुजरात के एक मदरसे से भाग कर आए हैं।
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मदरसे के शिक्षक उनकी पिटाई करते थे जिससे वे वहां से भागकर बिहार जा रहे थे। वहीं रेलवे चाइल्ड लाइन को आठ साल की एक बच्ची प्लेटफॉर्म नंबर छह पर रोती मिली।
बच्ची को राजकीय बालगृह शिशु में आश्रय दिलाया गया है। उधर, सिटी चाइल्ड लाइन को एक पांच साल का बच्चा चिनहट थाने से मिला। चिनहट थाना पुलिस के मुताबिक बच्चा लावारिस सड़क पर मिलने से चाइल्ड लाइन को सुपुर्द किया गया है।
विजेंद्र शर्मा ने बताया कि बच्चे को बाल कल्याण समिति की मदद से राजकीय बाल गृह शिशु में आश्रय दिलाया गया है।
बालक की हुई घर वापसी
बाल कल्याण समिति की सदस्य सुधा रानी ने बताया कि तीन दिन पूर्व लावारिस मिले बालक को राजकीय बालगृह बालक में आश्रय दिलाया गया था। उसके परिवारीजनों से संपर्क कर रविवार को उसकी घर वापसी करा दी गई।