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बच्चे को लिटाकर दाल पिला रही थी मां, अचानक हुआ कुछ ऐसा कि उखड़ गईं मासूम की सांसें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 30 Dec 2017 03:15 PM IST
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लखनऊ के सआदतगंज में रहने वाले एक परिवार पर शुक्रवार को दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा, जिसकी कल्पना भी रुह कंपा देती है। तीन साल के मासूम के फेफड़े में दाल फंसने से उसकी सांसें उखड़ गईं। बेहोश मासूम को लेकर मां पहले निजी अस्पताल गई, लेकिन वहां से ट्रॉमा सेंटर ले जाने को कह दिया। वहां पर डॉक्टरों की कोशिश काम नहीं आई और बच्चे की मौत हो गई।
सआदतगंज निवासी रीना पांडेय तीन साल के बेटे आकाश को शुक्रवार की सुबह दाल पिला रही थीं। इस दौरान बच्चा बेड पर लेट गया। मां ने उसे लेटे-लेटे ही दाल पिलाई। इस बीच बच्चे को हिचकी आई और वह बेहोश हो गया। घबराई रीना आनन-फानन में उसे पास के अस्पताल ले गई। कुछ देर डॉक्टरों ने कोशिश की, फिर हाथ खड़े कर दिए।
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सआदतगंज निवासी रीना पांडेय तीन साल के बेटे आकाश को शुक्रवार की सुबह दाल पिला रही थीं। इस दौरान बच्चा बेड पर लेट गया। मां ने उसे लेटे-लेटे ही दाल पिलाई। इस बीच बच्चे को हिचकी आई और वह बेहोश हो गया। घबराई रीना आनन-फानन में उसे पास के अस्पताल ले गई। कुछ देर डॉक्टरों ने कोशिश की, फिर हाथ खड़े कर दिए।
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डॉक्टर बोले- लाने में कर दी देर
रीना उसे केजीएमयू लेकर पहुंची, वहां भटकने के बाद ट्रॉमा सेंटर की कैजुल्टी में पहुंची। वहां मौजूद रेजीडेंट डॉ. जितेन्द्र व नर्सों की टीम ने 45 मिनट तक बच्चे के सीने पर पंप करके सांस लौटाने की कोशिश की, पर कोई फायदा नहीं हुआ। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे को लाने में देर हो गई, यदि समय से लाया गया होता तो जा बचाई जा सकती थी।
वहीं, जब डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित किया तो रीना वहीं गश खाकर गिर गई। ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ.हैदर अब्बास का कहना है कि बच्चे को बचाने का भरसक प्रयास किया गया, लेकिन घरवालों ने उसे लाने में देरी कर दी, इस कारण उसे बचाया नहीं जा सका।
वहीं, जब डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित किया तो रीना वहीं गश खाकर गिर गई। ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ.हैदर अब्बास का कहना है कि बच्चे को बचाने का भरसक प्रयास किया गया, लेकिन घरवालों ने उसे लाने में देरी कर दी, इस कारण उसे बचाया नहीं जा सका।
बच्चे को जबर्दस्ती खिलाने में बरतें सावधानी
सेवानिवृत्त बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वीके शुक्ला कहते हैं कि आमतौर पर ऐसा सुनने में कम आता है, क्योंकि तीन साल का बच्चा अमूमन लेट कर या सामान्य तौर पर खुद खाने में सक्षम होता है। ऐसा क्यों हुआ, यह तो इलाज करने वाले डॉक्टर बता सकते हैं। फिर भी यह ध्यान रखने की बात है कि यदि बच्चे को हमेशा बैठाकर ही खाना खिलाना चाहिए।
बच्चा आनाकानी करे, जिद में लेट जाए तो इस दौरान जर्बदस्ती उसके मुंह में कुछ डालने की कोशिश न करें। खाते वक्त खांसी आए तो ठहरें, और उसकी पीठ थपथपाएं। फेफड़े या गले में कुछ फंस जाए तो उसे बिना देर किए डॉक्टर के पास ले जाएं।
बच्चा आनाकानी करे, जिद में लेट जाए तो इस दौरान जर्बदस्ती उसके मुंह में कुछ डालने की कोशिश न करें। खाते वक्त खांसी आए तो ठहरें, और उसकी पीठ थपथपाएं। फेफड़े या गले में कुछ फंस जाए तो उसे बिना देर किए डॉक्टर के पास ले जाएं।