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खेल-खेल में कार में लॉक हुआ बच्चा, केजीएमयू के डॉक्टरों ने भगाया, मौत

Thu, 25 May 2017 01:16 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Thu, 25 May 2017 01:16 PM IST
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child died after being locked in car in lucknow
डेमो - फोटो : demo pic

केजीएमयू के डॉक्टरों की लापरवाही और संवेदहीनता ने एक डेढ़ साल के बच्चे की जान ले ली। डॉक्टरों की लापरवाही का आलम ये था कि मां-बाप और अन्य परिवारीजन डॉक्टरों से बच्चे को भर्ती करने की गुहार लगाते रहे लेकिन किसी ने एक बात न सुनी।

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बिना इलाज बच्चा डेढ़ घंटे तक एम्बुलेंस में तड़पता रहा और उसकी मौत हो गई। बच्चे की मौत से नाराज परिवारीजनों ने हंगामा किया तो डॉक्टरों ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की धमकी दे दी।
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इसके बाद परिवारीजनों से सादे कागज पर अंगूठा लगवाने के बाद शव सौंप दिया। सीतापुर के धननाग के घनश्याम के डेढ़ वर्षीय बेटा अभिनव सोमवार को घर पर खेल रहा था।
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इसी दौरान घर के बाहर खड़ी कार का दरवाजा खोलकर अंदर घुस गया। दरवाजा बंद होते ही सेंट्रल लॉक हो गया। काफी देर बाद लोग उसे ढूंढने लगे तो कार के भीतर वो बदहवास स्थिति में मिला।

पिता घनश्याम ने बताया कि आनन-फानन में अभिनव को सीतापुर के खैराबाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। बुधवार को हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने वेंटिलेटर की जरूरत बताकर एम्बुबैग के सहारे केजीएमयू रेफर कर दिया।

दादा महेश ने बताया कि दोपहर करीब सवा दो बजे एम्बुलेंस से अभिनव को ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे। कैजुअल्टी में अभिनव को लेकर गए तो डॉक्टरों ने अनसुना कर दिया। हालत बिगड़ी तो बच्चे को दोबारा एम्बुलेंस में लिटा दिया। 

सादे कागज पर लगवाया अंगूठा और हस्ताक्षर

child died after being locked in car in lucknow
डेमो - फोटो : demo pic
इस बीच डॉक्टरों से मिन्नत करने के बाद भी गंभीर हालत में आए बच्चे को भर्ती नहीं किया। हालत अधिक बिगड़ी तो मां रितु, पिता घनश्याम और दादा महेश दोबारा डॉक्टरों के पास पहुंचे तो इमरजेंसी से भगा दिया।

इसके बाद दादा महेश अभिनव की जान बचाने के लिए एम्बुबैग दबाते रहे। इसी बीच डेढ़ घंटे बाद करीब चार बजे बच्चे की एम्बुलेंस में मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद नाराज परिवारीजनों ने हंगामा किया।

इस पर डॉक्टरों ने अपनी लापरवाही छुपाने के लिए शव को कब्जे में ले लिया और पोस्टमार्टम की धमकी देने लगे। परिवारीजनों ने कहा कि पहले तो इलाज नहीं किया और अब पोस्टमार्टम करवाओगे।

इसपर डॉक्टरों ने सादे कागज पर अंगूठा और हस्ताक्षर करवाकर शव वापस कर दिया। परिवारीजनों का आरोप था कि डॉक्टरों ने एक तो इलाज नहीं किया और उसके बाद जोर जबरदस्ती करने पर अमादा थे। डॉक्टरों ने समय रहते अभिनव को भर्ती कर लिया होता तो उसकी जान बच जाती।

‘इस तरह की कोई जानकारी नहीं है ऐसी कोई घटना हुई है तो ट्रॉमा प्रभारी से पूछताछ की जाएगी।’ - डॉ. एसएन शंखवार, सीएमएस
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