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सीएम नहीं, इनके हाथ में होगा मुसीबत का 'मांझा'!

Sat, 14 Jun 2014 09:42 AM IST
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 14 Jun 2014 09:42 AM IST
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chief secretary took responsibilities for law and power crisis

कानून और बिजली के तेजतर्रार मांझे से लगातार जख्मी हो रहे सीएम अखिलेश ने अब मुसीबत का मांझा अपने एक खास अधिकारी को सौंप दिया है।

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प्रदेश की खराब कानून व्यवस्था और बिजली संकट पर आलोचना झेल रही सरकार ने बड़ा फैसला किया है। यह निर्णय सीएम के साथ 10 जून की बैठक के बाद लिया गया। कानून-व्यवस्था और बिजली सुधार की कमान मुख्य सचिव आलोक रंजन ने अपने हाथ में ले ली है।
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अब वह खुद हर शनिवार गृह विभाग और ऊर्जा विभाग के आला अफसरों के साथ बैठक करके समीक्षा करेंगे। इसकी शुरुआत इसी शनिवार से हो जाएगी।

सीएम ने माना काम नहीं कर रहे अधिकारी

chief secretary took responsibilities for law and power crisis

मुख्यमंत्री ने 10 जून को बुलाई गई समीक्षा बैठक में दिन भर अलग-अलग स्तर पर हुए मंथन में मुख्य रूप से यह बात निकलकर सामने आई कि वरिष्ठ अफसरों की लापरवाही के चलते नीचे के अधिकारी-कर्मचारी सही ढंग से काम नहीं कर रहे हैं।

खास तौर पर कानून-व्यवस्था की निगरानी करने वाले तंत्र पर शासन के आला अधिकारियों की पकड़ कमजोर पड़ती जा रही है, जिससे घटनाएं बढ़ रही हैं और सरकार की किरकिरी हो रही है।

समीक्षा में यह भी सामने आया कि अपराधों की संख्या कम दिखाने के चक्कर में थानों पर एफआईआर तक नहीं दर्ज की जा रही है।

मजबूरन पीड़ित लोगों को कोर्ट व मीडिया के पास जाना पड़ रहा है। डीएम और कप्तानों तक को वक्त पर घटनाओं की जानकारी नहीं मिल पा रही है।

मुख्य सचिव ने किया था वादा

chief secretary took responsibilities for law and power crisis

मुख्य सचिव का पदभार संभालने के बाद आलोक रंजन ने कहा था कि कानून-व्यवस्था और बिजली उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

अब उन्होंने इन दोनों मोर्चों को खुद संभालने का फैसला किया है।

मुख्य सचिव ने गृह और ऊर्जा विभाग को निर्देश जारी किए हैं कि अब हर शनिवार को वह खुद कानून-व्यवस्था व बिजली की समीक्षा करेंगे। इसकी शुरुआत इसी शनिवार से होने जा रही है।

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ऐसे होगा काम

chief secretary took responsibilities for law and power crisis
सूत्रों के अनुसार समीक्षा में आला अफसरों के पेंच कसने के साथ-साथ राजधानी में बैठे गृह, पुलिस और बिजली के आला अधिकारियों को फील्ड में निकलने को कहा जाएगा ताकि नीचे के अफसरों पर काम करने का दबाव बन सके।

पुलिसिंग नेटवर्क को और मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है ताकि आपराधिक घटनाओं पर नियंत्रण किया जा सके।

इसी तरह बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए भी बिजली निगमों के आला अधिकारियों को फील्ड में जाने को कहा जा सकता है।
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