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यूपी: फांसी की सजा पाए कैदियों को पैरोल पर छोड़ने के मामले में मुख्य सचिव ने हाईकोर्ट में कहा, भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी
Wed, 22 Dec 2021 12:18 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 22 Dec 2021 12:18 AM IST
सार
फांसी के चार सजायाफ्ता बंदियों को कोरोना काल में तीन बार पैरोल पर छोड़े जाने के मामले में मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने हाईकोर्ट में कहा कि ऐसे मामले में पूरी सावधानी बरतेंगे। भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी।
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फाइल फोटो
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विस्तार
फांसी के चार सजायाफ्ता बंदियों को कोरोना काल में तीन बार पैरोल पर छोड़े जाने के मामले में तलब प्रदेश के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने हाईकोर्ट में कहा कि यह एक गलती थी। वह ऐसे मामले में पूरी सावधानी बरतेंगे। उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त किया कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी। उनके इस आश्वासन पर कोर्ट ने इस मुद्दे की जांच का आदेश नहीं दिया।
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गौरतलब है कि मामले में समुचित हलफनामा न दाखिल करने पर सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त नाराजगी जताकर मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी को तलब किया था। कोर्ट के आदेश पर वह न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ के समक्ष पेश हुए थे और यह आश्वासन दिया था।
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मंगलवार को खंडपीठ ने फांसी के चारों सजायाफ्ता बंदियों की अपीलों व सजा की पुष्टि के लिए सत्र अदालत से भेजे गए संदर्भ पर विस्तार से सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया। अब कोर्ट इन पर अपना निर्णय सुनाएगी।
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कोर्ट के आदेश के तहत चारों सजायाफ्ता 15 दिसंबर को जेल भेजे जा चुके हैं। हाईकोर्ट ने पहले कहा था कि यह गंभीर सरोकार का मामला है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सहारा लेकर हत्या के जुर्म में फांसी के सजा पाए बंदियों को राज्य सरकार ने पैरोल पर रिहा कर दिया। जबकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सिर्फ सात साल तक की सजा पाने वालों को लेकर था।