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पुरानी पेंशन बहाली मंच की प्रशासन से वार्ता विफल, नहीं निकला कोई समाधान, जारी रहेगी हड़ताल

Wed, 06 Feb 2019 02:31 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला,लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 06 Feb 2019 02:31 PM IST
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chief secretary calls employees for meeting agitating for old pension scheme.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

पुरानी पेंशन बहाली को लेकर हड़ताली कर्मियों और सरकार के बीच वार्ता विफल हो गई है। पुरानी पेंशन बहाली मंच के नेताओं ने गारंटीड पेंशन पर सरकार की तरफ से ठोस आश्वासन मिले बिना हड़ताल स्थगित करने से इन्कार कर दिया। एक सप्ताह की महाहड़ताल के पहले दिन कई विभागों में कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा तो कुछ में आम दिनों की तरह ही काम होता रहा। मंच ने प्रदेश में 150 करोड़ रुपये के राजस्व की क्षति होने तथा 7500 कार्यालय बंद होने का दावा किया है।

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प्रदेश सरकार ने हड़ताल को गैरकानूनी घोषित करते हुए ‘एस्मा’ लगा दिया था। बावजूद इसके प्रदेश में जगह-जगह कर्मचारी, शिक्षक और अधिकारियों के संगठनों ने कार्यालयों का बहिष्कार कर धरना-प्रदर्शन किया। राजधानी में लोक निर्माण विभाग, परिवहन मुख्यालय और वाणिज्य कर विभाग सहित कई जगह कामकाज पूरी तरह ठप रहा। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों और ड्राइवरों के संगठनों के भी हड़ताल में शामिल होने से कई विभागों में वाहन तक नहीं चले।
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मंच के संयोजक हरिकिशोर तिवारी ने कहा है कि न्यायोचित समाधान मिले बिना हड़ताल स्थगित नहीं होगी। राजधानी में वाणिज्य कर, लोक निर्माण विभाग, परिवहन के अलावा सिंचाई, रजिस्ट्री, समाज कल्याण, उद्यान, अर्थ एवं संख्या, नियोजन, कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार, निबंधन,  कोषागार, आबकारी, श्रम, बाट-माप, मातृ-शिशु कल्याण, शिक्षा, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, जवाहर भवन और इंदिरा भवन में कई कार्यालयों में हड़ताल का असर दिखा।

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एक घंटे की बातचीत के बाद भी नहीं निकला कोई समाधान

हड़ताल से कामकाज प्रभावित होने की सूचना के चलते प्रदेश सरकार ने बुधवार दोपहर मंच के अध्यक्ष डॉ. दिनेशचंद शर्मा और संघर्ष समिति के चेयरमैन शिवबरन सिंह यादव को पत्र भेजकर समझौता वार्ता के लिए बुलाया था। पर, एक घंटा की वार्ता के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल पाया।

जानकारी के मुताबिक, वार्ता में मुख्य सचिव डॉ. अनूपचंद्र पांडेय ने नई पेंशन में सरकार का अंश 10 से बढ़ाकर 14 प्रतिशत तुरंत करने और पेंशन मद का बकाया 10,500 करोड़ रुपये कर्मचारियों, शिक्षकों और अधिकारियों के खाते में जमा कराने का आश्वासन दिया। भले ही कर्मचारियों का अंश काटा गया हो या न काटा गया हो। इस पेंशन को आयकर से मुक्त रखने का भी आश्वासन दिया गया, लेकिन मंच के नेता इससे सहमत नहीं हुए।

उन्होंने मुख्य सचिव के समक्ष गारंटीड पेंशन की मांग रखी, लेकिन इस पर मुख्य सचिव कोई ठोस आश्वासन नहीं दे पाए। बैठक में अपर मुख्य सचिव कार्मिक, अपर मुख्य सचिव वित्त, अपर मुख्य सचिव सूचना, प्रमुख सचिव गृह भी शामिल थे।

बाबा हरदेव सिंह, एमएलसी चेत नारायण सिंह ने भी वार्ता में हिस्सा लिया। मंच के मीडिया प्रभारी मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि वार्ता विफल होने के बाद नेताओं ने महाहड़ताल जारी रखने का निर्णय किया।

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