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Lucknow News : मुख्यमंत्री योगी ने कहा, वन ट्रिलियन इकोनॉमी के लिए शहरों का सुनियोजित विकास पहली शर्त

Fri, 23 Sep 2022 07:15 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 23 Sep 2022 07:15 PM IST
सार

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले तो शहरों के विकास की योजना तैयार होने से पहले ही भूमिया सक्रिय हो जाते थे और योजना के लिए प्रस्तावित क्षेत्रों में अवैध कॉलोनिया बसा देते थे। बिना प्लानिंग के बसाई जाने वाली इन कॉलोनियों में सिर्फ प्लाट बेचे जाते थे, लेकिन नागरिकों को सड़क, सीवर, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी कोई सुविधा नहीं दी जाती थी।

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Chief Minister Yogi said, planned development of cities is the first condition for One Trillion Economy
सीएम आदित्यनाथ योगी

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को यहां प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और सुनियोजित विकास करके शहरों को आर्थिक विकास इंजन बनाने के मुद्दे पर चर्चा के लिए आयोजित ‘नेशनल अर्बन प्लानिंग एंड मैनेजमेंट कॉनक्लेव’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि प्रदेश में एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करना है तो इसके लिए पहली शर्त शहरों का सुनियोजित विकास होना चाहिए। इसके बिना हम अपने लक्ष्य को नहीं प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि शहरी सुविधाओं के लिहाज से खराब स्थिति के लिए पूर्ववर्ती सरकारों को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि पिछले 8 साल से शहरों के सुनियोजित विकास पर फोकस किया गया है, इसके सार्थक परिणाम सामने आने लगे हैं।

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राज्य सरकार और केन्द्र की हाई लेवल कमेटी (एचएलसी) के संयुक्त तत्वावधान में इंदिरागांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दो दिवसीय कॉनक्लेव का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले प्रदेश में नगरीय जीवन नारकीय था, लेकिन अब स्थिति में काफी सुधार हुआ है। शहरी विकास के लिए प्रधानमंत्री के प्रयासों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम ने देश की इकोनॉमी को 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का जो लक्ष्य रखा है, उसमें यूपी की बड़ी भूमिका है। इसके तहत ही प्रदेश की इक़ोनॉमी को एक ट्रिलियन डॉलर करने का लक्ष्य हैं और यह पूरा तभी होगा, जब शहरों का सुनियोजित विकास होगा।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था बढ़ाने के लिए यूपी में आपार संभावनाएं हैं। इसके लिए शहरों का विकास जरूरी है। इसी उद्देश्य से 100 से अधिक नगर निकायों का गठन किया गया है। लेकिन इससे काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि देश कई राज्यों की आबादी से अधिक आबादी यूपी के नगर निकाय क्षेत्रों में रहती है। इसलिए शहरों के विकास को लेकर ठोस कार्ययोजना बनाना जरूरी है। आर्थिक उन्नयन के लिए शहरों में बेहतर सुविधा होना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने देश भर से जुटे शहरी विकास से जुड़े विशेषज्ञों का आह्वान किया कि कॉनक्लेव में शहरों के विकास की खाका तैयार करते समेत सुविधाओं के साथ नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों को आत्मनिर्भर बनाने का भी प्रावधन करें।
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इस मौके पर प्रमुख सचिव आवास नितिन रमेश गोकर्ण ने कॉनक्लेव के आयोजन के उद्देश्यों का जानकारी दी। जबकि एचएलसी के चेयरमैन केशव वर्मा ने दो दिवसीय कॉनक्लेव के दौरान आयोजित होने वाले टेक्निकल सत्र और पैनल डिस्कसन से संबंधित सत्र में होने वाले विचार-विमर्श के बिंदुओं के बारे में बताया। उद्घाटन सत्र में कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार सिंह और प्रमुख सचिव नगर विकास अमृत अभिजात के अलावा तमाम अधिकारी मौजूृद थे।

राजनीतिक कारणों ने नहीं किया शहरों का विकास
मुख्यमंत्री ने शहरी विकास की बदहाल स्थिति के लिए पूर्व की सरकारों जिम्मेदार ठहराया। किसी का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि 2014 में केन्द्र की सत्ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री ने शहरों के विकास के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए, लेकिन राजनीतिक इच्छा नहीं होने की वजह से प्रदेश में केन्द्र के कार्यक्रमों को जमीन पर नहीं उतारा गया। इसलिए यूपी शहरी विकास के मामले में कई राज्यों से पिछड़ता रहा, लेकिन 2017 के बाद केन्द्र और प्रदेश सरकार ने मिलकर शहरों के सुनियोजित विकास के संकल्प को पूरा कर रही है।

योजना लागू होने के पहले ही सक्रिय हो जाते थे भूमाफिया
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले तो शहरों के विकास की योजना तैयार होने से पहले ही भूमिया सक्रिय हो जाते थे और योजना के लिए प्रस्तावित क्षेत्रों में अवैध कॉलोनिया बसा देते थे। बिना प्लानिंग के बसाई जाने वाली इन कॉलोनियों में सिर्फ प्लाट बेचे जाते थे, लेकिन नागरिकों को सड़क, सीवर, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी कोई सुविधा नहीं दी जाती थी। कॉलोनाइजर सिर्फ मुनाफा कमाकर गायब हो जाते थे। अब इस वातावरण में काफी सुधार हुआ है।


निकायों के स्तर पर तैयार होनी चाहिए प्लानिंग
मुख्यमंत्री ने आर्थिक मदद के नगर निकायों की शासन पर निर्भरता खत्म करने का सुझाव देते हुए कहा कि हालात यह है कि तमाम नगर निकाय अभी अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पाते हैं। इसके लिए भी उन्हें शासन पर निर्भर रहना पड़ता है। यह स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि नगर निकायों को खुद आत्मनिर्भर बनने के लिए अपने स्तर पर भी प्लानिंग करना चाहिए।

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