अयोध्या तीर्थ विकास परिषद के अध्यक्ष होंगे सीएम योगी, 10 करोड़ दान देकर आप भी बन सकते हैं सदस्य
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राममंदिर बनाने की तैयारी के साथ धर्मनगरी के ढांचागत विकास व प्रबंधन के लिए एक नई शासकीय संस्था आकार लेने जा रही है। इसका नाम अयोध्या तीर्थ विकास परिषद होगा, जिसके मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ होंगे। इसे स्वतंत्र होकर ढांचागत विकास व लाभ के लिए आर्थिक नीतियां बनाने से लेकर पर्यटन और प्रबंधन का अधिकार होगा।
इस बाबत जिला प्रशासन ने शासन में अयोध्या विकास प्राधिकरण से भूमि के विकास संबंधी अनापत्ति प्रमाण पत्र समेत संस्था का अंग बनने वाले विभागों से आवश्यक रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
उत्तर-प्रदेश अयोध्या तीर्थ विकास परिषद का स्वरूप ब्रज तीर्थ परिषद जैसा होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके दायरे में रामनगरी के 100 वर्ग किमी के भू-भाग समेत पांच जिलों से होकर गुजर रहे 84 कोसी परिक्रमा मार्ग का क्षेत्र होगा। सूत्रों के अनुसार उ.प्र. बृज तीर्थ विकास परिषद की तरह अयोध्या तीर्थ विकास परिषद के अध्यक्ष भी मुख्यमंत्री होंगे।
वहीं, लोक निर्माण, पर्यटन, वित्त, संस्कृति, नगर विकास, परिवहन, वन, पर्यावरण विभागों के प्रमुख सचिव/सचिव इसके सदस्य होंगे। इस संबंध में जल्द शासनादेश जारी करने की तैयारी है।
'उपाध्यक्ष पद पर सेवानिवृत्त शीर्ष अधिकारी को मिल सकता है दायित्व'
परिषद के उपाध्यक्ष पद पर किसी सेवानिवृत्त शीर्ष अधिकारी को दायित्व मिल सकता है। अयोध्या के मंडलायुक्त, जिला मजिस्ट्रेट, मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक, उपाध्यक्ष-अयोध्या विकास प्राधिकरण, अयोध्या क्षेत्र की जानकारी रखने वाले पांच व्यक्ति भी सदस्य के रूप में नामित होंगे।
वहीं, ऐसे दानदाता जो 10 करोड़ से ज्यादा का दान देते हों, वे नाम निर्दिष्ट सदस्य के रूप में रखे जाएंगे। राज्य सरकार इस परिषद के लिए विधि सलाहकार का चयन भी करेगी जो परिषद को कानूनी सलाह देगा। कामकाज देखने को सीईओ भी नियुक्त किया जाएगा।
भेज दी गई एनओसी
अयोध्या के जिलाधिकारी अनुज कुमार झा का कहना है कि अयोध्या के पौराणिक-सांस्कृतिक व ढांचागत विकास के लिए अयोध्या तीर्थ विकास परिषद नाम से एक संस्था की जरूरत थी, इसकी चर्चा शासन में कई बार हो चुकी है।
राममंदिर पर फैसला आने के बाद जैसे ही मंदिर निर्माण शुरू होगा, यहां पर्यटकों-भक्तों के आने का सिलसिला तेज हो जाएगा। इसलिए अब जल्द शासकीय संस्था का स्वरूप सामने आ सकता है। शासन के निर्देश पर अयोध्या विकास प्राधिकरण से एनओसी भेज दी गई है। शासन को अन्य जो भी रिपोर्ट चाहिए होती है, उसे तत्काल भेजा जा रहा है।
इन जिलों से होकर गुजरा है 84 कोसी परिक्रमा मार्ग
अयोध्या के साथ बाराबंकी, गोंडा, बस्ती व अंबेडकरनगर जिले से होकर 84 कोसी परिक्रमा मार्ग गुजरा है, जिसकी कुल लंबाई करीब 252 किमी है, जिसके किनारे तमाम रामायणकालीन स्थलों के साथ सिद्ध ऋषि-मुनियों की तपस्थली और मठ-मंदिर भी हैं।
इस परिक्रमा की शुरूआत ही बस्ती के मखौड़ा नामक स्थल से होती है, जहां महाराजा दशरथ ने पुत्रेष्ठी यज्ञ किया था, जिसके बाद स्वयं भगवान विष्णु स्वरूप राम समेत चारों भाई भरत, लक्ष्मण व शत्रुघ्न का जन्म हुआ था। इन्हीं के प्रताप से रावण का वध हुआ और बाद में राजसूय यज्ञ कर अयोध्या विश्व विजयी कहलाई।