'बढ़ेंगे जजों के पद, ताकि वक्त पर मिले न्याय'
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सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पी. सथाशिवम का कहना कि इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी की वजह से लोगों को न्याय मिलने में देरी हो रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जजों के सृजित पदों के लिए आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराए।
उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि इन्फ्रास्ट्रक्चर के अभाव में उच्च न्यायालय जनता को त्वरित न्याय देने की अपनी जिम्मेदारी का पूरी क्षमता से निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश शनिवार को यहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों के 12वें अखिल भारतीय दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद विधिवेत्ताओं, न्यायिक अधिकारियों व समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे।
बढ़ेंगे 25 प्रतिशत पद
मुख्य न्यायाधीश ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जजों के 160 पदों में से 69 के खाली होने का हवाला देते हुए कहा कि सुविधाओं के अभाव में केवल 91 न्यायमूर्ति ही कार्यरत हैं।
यदि कोर्ट रूम, आवास व अन्य सुविधाएं राज्य सरकार तेजी से उपलब्ध कराए तो रिक्त पदों को भरा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट न्याय की गति को बढ़ाने के लिए उच्च न्यायालयों में 25 प्रतिशत पदों को बढ़ाने की कार्यवाही कर रहा है। इसके लिए प्रधानमंत्री और विधि मंत्री से बात हुई है।
इस संबंध में केंद्र सरकार से बात हो रही है। हालांकि सिर्फ पद बढ़ने से ही त्वरित न्याय संभव नहीं है।
हाईकोर्ट को करना होगा और मजबूत
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि हाईकोर्ट अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर पाएं तो न्याय की रफ्तार तेज हो जाएगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से इस संबंध में ध्यान देने की अपील की। सथाशिवम ने कहा कि आम लोगों के आर्थिक व सामाजिक हितों की रक्षा में विधिक साक्षरता अहम भूमिका निभा सकता है।
इसके लिए तय दिशा-निर्देशों का प्रभावी तरीके से पालन होना चाहिए। उन्होंने यूपी के राजनैतिक व न्यायिक महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों ही दृष्टि से यूपी की अहम भूमिका है।
नि:शुल्क विधिक सेवा बदलेगा समाज की तस्वीर
चीफ जस्टिस ने कहा कि विधिक सेवा कोई दान नहीं है, यह लोगों का अधिकार है।
समाज के अंतिम पायदान पर खड़े सबसे कमजोर व्यक्ति को उसके अधिकार बताने और न्याय दिलाने में नि:शुल्क कानूनी सेवा अहम भूमिका निभा सकती है।
इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों, श्रमिक कॉलोनियों व गरीबों के बीच विधिक जागरूकता व विधिक साक्षरता बढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि इसी तरह पारिवारिक अदालतों की ओर से महिलाओं के वैवाहिक मामले में उच्च कोटि की विधिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
विधिक साक्षरता की मुहिम में पुलिस, कारागार व मीडिया की बड़ी भूमिका हो सकती है।
एफआईआर से मना नहीं कर सकती पुलिस
पी. सथाशिवम ने कहा कि किसी मामले का एफआईआर दर्ज करने से पुलिस मना नहीं कर सकती है।
पहले वह एफआईआर दर्ज करेगी, फिर उसकी जांच-पड़ताल और उसके हिसाब से उसे कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि सरकार की व्यवस्था के बावजूद जानकारी के अभाव में लोगों का शोषण हो रहा है।
मनरेगा का हवाला देते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि इस योजना में न्यूनतम मजदूरी तय है, इसके बावजूद किसी मजदूर को इसे मिलने में मुश्किल क्यों आती है?
विधिक साक्षरता के जरिये यदि पब्लिक को उसके अधिकारों की जानकारी दे दी जाए तो वह अपना हक हासिल कर सकेगा।
'अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती'
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि समाज के अंतिम व्यक्ति को जटिल न्यायिक प्रक्रिया से उबारते हुए सुलभ न्याय दिलाना सबसे बड़ीचुनौती है।
उन्होंने आशा जताई कि हम सभी मिलकर इस लक्ष्य को हासिल करेंगे। उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन व नि:शुल्क विधिक साक्षरता कार्यक्रम के लिए हर तरह से सहयोग उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई।
उन्होंने कहा कि आज भी साधनहीन, निरक्षर, गरीब व कमजोर लोगों के लिए न्याय पाना काफी कठिन है। ऐसे में आर्थिक व सामाजिक हैसियत पर विचार किए बिना सभी को न्याय का समान अवसर मिलना चाहिए।
समाज की मुख्य धारा से कटे गरीब और निर्धन वर्ग को सक्षम विधिक सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने समाज के गरीबों, अनपढ़ व अन्य पिछड़े वर्गों को नि:शुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास, विधिक साक्षरता मुहिम व लोक अदालतों के आयोजन में प्रदेश सरकार की ओर से हर स्तर पर सहयोग का भरोसा दिलाया।