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मोदी सरकार के एक साल पर चेतन भगत ने किया 'बचाव'

Wed, 03 Jun 2015 11:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 03 Jun 2015 11:10 PM IST
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Chetan Bhagat advised to take risk to be successful.

टू स्टेट्स, फाइव प्वॉइंट्स समवन, हॉफ गर्लफ्रेंड जैसी फिक्शन से युवाओं के चहेते लेखक बने चेतन भगत अब नई भूमिका में नजर आएंगे। बैंकर से लेखक बनने के बाद अब वह टीवी रियलिटी शो नच बलिए-7 में प्रतिभागियों की प्रतिभा को जज करते हुए दिखेंगे।

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बुधवार को राजधानी पहुंचे चेतन भगत ने अपने दिल की बात की। चेतन का कहना है कि अगर युवा रिस्क लें तो वह जरूर सफल होंगे। उनका यह भी कहना था कि देश का युवा गुस्से में है। वह सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास भी निकाल रहा है। चेतन ने मोदी सरकार के एक साल पर भी खुलकर अपनी राय रखी। उनसे बातचीत के कुछ अंश...
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- बैंकर से लेखक और अब रियलिटी शो का जज। कैसा अनुभव रहा?
- यह मेरा लखनऊ आना पहली बार नहीं है। अंतर इतना है कि पहले मैं मोटीवेटर के रूप में अलग-अलग संस्थाओं में गया। वहां लोगों को, छात्रों का सफल होने के लिए रिस्क लेने को प्रेरित करता था। सोचा खुद भी ऐसा किया जाए। अब फिर रिस्क लिया। पहले डर लगा। अब अभ्यस्त होकर खुद नई चीजें सीख रहा हूं। यहां बहुत कुछ तो मेरे लिए भी नया है। मुझे अपने मिशन भारतीय समाज में बदलाव के लिए भी ज्यादा लोगों तक पहुंचने में आसानी मिल रही है।

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प्रतियोगियों की जिंदगी मेरे लिए कहानी का नया प्लॉट

Chetan Bhagat advised to take risk to be successful.

- क्या यह रियलिटी शो आपको अगली कहानी के लिए प्लॉट तो नहीं होगा?
- हां। रियलिटी शो में जब प्रतिभागियों से रूबरू हुआ तो मुझे समझ नहीं आ रहा था कि कोई कैसे अपनी व्यक्तिगत जिंदगी को पर्दे पर बता सकता है। यह कैसे लोग होंगे? इनकी जिंदगी ही मेरे लिए एक कहानी जैसी है। इसके अलावा मैं यहां लोगों को प्रेरित करने का भी काम कर रहा हूं।

लिटरेरी फेस्टिवल, मोटिवेशनल स्पीच। यह सब करके मैं खुद को थका हुआ महसूस कर रहा था। यहां मैं अब परिवार के बीच चलने वाले द्वंद्व को समझने में सफल हो पा रहा हूं। संभव है कि मेरी अगली किताब के लिए कहानी भी यहीं से मिल जाए।

- सोशल मीडिया पर लगातार शोज के जजों को लेकर जोक बन रहे हैं, क्या कहेंगे?
सोशल मीडिया पर लोग हद से ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं। मेरा कहना है कि यहां कोई कुछ भी कर सकता है। मुझे लेखक से अचानक से जज बना दिया गया। इसे दर्शक स्वीकार भी कर रहे हैं। ऐसा केवल भारत में ही हो सकता है। मुझे लेकर भी जोक्स बन रहे हैं। असल में मेरे सामने चुनौती रियलिटी शो को प्रेरणादायक बनाने के साथ उसे मजेदार भी बनाने की है।

देश का युवा गुस्से में है

Chetan Bhagat advised to take risk to be successful.

- युवाओं को लेकर क्या कहेंगे, जो सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा मौजूद है?
- देश का युवा गुस्से में है। उसके अंदर का गुस्सा ही सोशल मीडिया पर निकलता है। सबसे ज्यादा इसका आसान शिकार राजनेता ही बनते हैं। मेरा मानना है कि यह सही नहीं है। इसकी वजह यह है कि यह गुस्सा कोई सकारात्मक परिणाम नहीं देने वाला।

दूसरे, हमारे यहां विज्ञान पढ़ने वाला छात्र समाज की निगाह में सबसे ऊपर होता है और फाइन आर्ट या डांस सीखने वाला सबसे नीचे। इस सोच को बदलना होगा।

- रियलिटी शो के बाद अब क्या फि ल्म निर्देशन या एक्टिंग में हाथ आजमाएंगे?
- फिल्म की स्क्रिप्ट लिखना और निर्देशन करना दोनों अलग हैं। निर्देशन मेरा काम नहीं है। एक्टिंग शायद मैं नहीं कर पाऊं। मेरी अभी ऐसी इमेज बन गई है कि अब इसके बाद किसी फिल्म में मुनीम बनकर हास्यास्पद ही लगेगा। अभी मेरा ध्यान लेखन और रियलिटी शो में ही है। मेरी अगली किताब व्हाट इंडिया वांट्स का दूसरा भाग जल्दी ही पब्लिश होने वाला है।

व्हाट इंडिया वांट्स की एक लाख कापियां बिकीं

Chetan Bhagat advised to take risk to be successful.

- टू स्टेट्स या दूसरे फिक्शन की तरह व्हाट इंडिया वांट्स सफल नहीं रही, क्यों?
- व्हाट इंडिया वांट्स मेरे अलग-अलग अखबारों या मैगजीन में छपे आर्टिकल का संग्रह है। यह बेस्टसेलर बनने को ध्यान में रखकर पब्लिश भी नहीं किया गया था।

अब टू स्टेट जैसी सफलता की उम्मीद इससे करना भी बेमानी था। इसके बाद भी हमारी उम्मीद 20-25 हजार कॉपी से बढ़कर इसकी बिक्री लाखों में पहुंच गई। मेरे ख्याल से यह सफल ही है।

‘नई बहू को जल्दी क्रिटिसाइज नहीं करना चाहिए’
राजनीति पर हमेशा कटाक्ष करने वाले चेतन भगत केंद्र में मोदी सरकार के एक साल पूरा होने पर आक्रामक नहीं दिखे। चेतन भगत का कहना था कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि नई बहू को इतनी जल्दी क्रिटिसाइज नहीं करना चाहिए।

उन्होंने सोशल मीडिया पर होने वाले असमय कटाक्ष को भी गलत बताया। उनका कहना था कि बेवजह की बयानबाजी में सरकार का कीमती समय बर्बाद होता है। इससे देश का विकास ही रुकता है।

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