{"_id":"929df1609ce637a6b27856b8fdf5ef3b","slug":"chef-harpal-singh-sokhi","type":"story","status":"publish","title_hn":"नमक-शमक फेम हरपाल सिंह ऐसे बने शेफ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नमक-शमक फेम हरपाल सिंह ऐसे बने शेफ
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Sat, 09 Nov 2013 04:03 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक कार्यक्रम के सिलसिले में शेफ हरपाल सिंह सोखी शनिवार लखनऊ आए। वह न सिर्फ अमर उजाला के मेहमान बनें बल्कि उन्हें शेफ बनने का चस्का कैसे लगा, यह राज भी बताया।
विज्ञापन
शेफ कैसे बनना हुआ?
मुझे लगता है कुकिंग मेरे भीतर है। बचपन में हर संडे पापा खाना बनाते थे। सीजन में अचार बनाना भी उनका ही जिम्मा था। मैं पंजाब से हूं इसलिए लंगर का खाना बनाने के लिए बड़े भइया जाया करते थे। बेबे [मां] भी बहुत इंटरेस्ट लेकर खाना बनाया करती थी। बस यही कुछ वजहें नजर आती हैं जिससे मैं शेफ बन गया।
विज्ञापन
कुजिन के साथ फ्यूजन करने का आइडिया कैसे मिला?
अब से 10-12 साल पहले तक लोग विदेश घूमने तो जाया करते थे लेकिन वहां जाकर भी उन्हें इंडियन फूड की तलाश होती थी। मैंने एक कोशिश की कि विदेशी फुड में भी थोड़ा इंडियन इंग्रीएंट मिलाकर एक्सपेरीमेंट किया जा सकता है।
विज्ञापन
फूड, आप और फ्रेंड्स, इस तिकड़ी से जुड़ा कोई किस्सा?
हंसते हुए...ऐसी हरकतें मैं बहुत करता था जी, तब मेरी शादी नहीं हुई थी। हम सब फ्रेंड्स रात में घूमते थे। मन आ गया तो किसी स्ट्रीट नाइट ठेले पर मैं दुकानदार को हटाकर खुद ही डिश बनाने लगता था। हां इसके लिए हम दुकानदार को पैसे भी देते थे। अभी बतौर गेस्ट जॉर्जिया गया था, लेकिन तीन दिनों तक एक ही खाना खाकर बोर हो गया, इसलिए रेस्त्रां में तीन दिन तक मैंने ही खाना बनाया और सबको खिलाया।
कुकिंग को आप कैसे लेते हैं?
एक ही बात कहूंगा, मुझे खाना खाना और खिलाना दोनों बहुत पसंद है। एक प्रोफेशनल कुक होने के अलावा मैं हमेशा यह सोचता हूं कि डिश सेलेबल हो। न सिर्फ स्वाद में बल्कि लोग उस डिश से जुड़ें भी। मेरे लिए कुकिंग स्ट्रेसबस्टर की तरह है।