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Lucknow News: आठ इंसानों के शिकार के जुर्म में छेदीलाल को हुई थी 'उम्रकैद'

Wed, 29 Jul 2026 02:21 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jul 2026 02:21 AM IST
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Chedilal was sentenced to life imprisonment for the crime of preying on eight human beings
चिड़ियाघर में रॉयल बंगाल टाइगर छेदीलाल। 
लखनऊ। स्थान: पीलीभीत का जंगल, वर्ष : 2016। प्रदेश के सबसे बड़े मानव-वन्यजीव संघर्ष में छेदीलाल (रॉयल बंगाल टाइगर) ने आठ इंसानों को अपना शिकार बना लिया था। करीब 35 दिनों तक चले इस संघर्ष में वन विभाग के अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए थे। कड़ी मशक्कत के बाद पकड़े गए छेदीलाल को ''''उम्रकैद'''' यानी जीवनभर लखनऊ चिड़ियाघर में रखने का फैसला सुनाया गया।
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नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के निदेशक संजय कुमार बिश्वाल बताते हैं कि पीलीभीत में वन्यजीवों का दिखना सामान्य बात है। इनमें शेर, बाघ, तेंदुए भी शामिल होते हैं। वर्ष 2016 में इंसानों की बस्ती तक पहुंच गया छेदीलाल आठ ग्रामीणों के लिए काल बन चुका था। उसकी दहशत में लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया था। ऐसे में छेदीलाल को मारने तक का आदेश दे दिया गया। हालांकि, कड़ी मशक्कत के बाद वह जिंदा हाथ आ गया।
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निदेशक ने बताया कि वर्ष 2016 में छेदीलाल की उम्र करीब 10 वर्ष थी। लखनऊ चिड़ियाघर लाने के बाद उसे डेढ़ महीने तक क्वारंटाइन (सख्त निगरानी) में रखा गया। बाद में फैसला लिया गया कि उसे जंगल में छोड़ने के बजाय चिड़ियाघर में ही रखा जाए।
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चार शावकों को भी लखनऊ में मिला घर
पीलीभीत के जंगल से करीब पांच वर्ष पहले चार शावकों (साक्षी, सिब्बा, अभि और शेरखान) को लखनऊ चिड़ियाघर लाया गया था। बाघों के आपसी संघर्ष में इनकी मां की मौत हो गई थी। चार में से तीन शावकों को यहीं के बाड़े में रखा गया, जबकि एक को दूसरे चिड़ियाघर भेज दिया गया। मौजूदा समय में चिड़ियाघर में 12 बाघ हैं, जिनमें से नौ रॉयल बंगाल टाइगर और तीन सफेद बाघ हैं।


अनाथ शावकों को चिड़ियाघर में ही मिलता है आश्रय
संजय कुमार बिश्वाल ने बताया कि भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के कुछ नियम हैं। इसके तहत वन्यजीवों, खास तौर पर बाघ के व्यवहार और प्राकृतिक प्रवृत्ति के आधार पर उन्हें आजाद या कैद रखने का फैसला लिया जाता है। इंसानों पर हमला करने वाले बाघ को उम्रकैद (हमेशा बाड़े में रखने) होती है। शारीरिक रूप से असक्षम वन्यजीवों को विशेष देखभाल में रखा जाता है। अनाथ शावकों को भी चिड़ियाघर के बाड़े में ही आश्रय दिया जाता है।
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