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Chaudhary Charan Singh: भैंस चोरी का केस न लिखने पर पूरे थाने को किया था निलंबित; राजनीति को गांव की देहरी...
Sat, 10 Feb 2024 09:06 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 10 Feb 2024 09:06 AM IST
सार
पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह ने भैंस चोरी की रिपोर्ट न लिखने पर मेरठ के पूरे थाने को निलंबित कर दिया था। उन्होंने मंत्रियों को वेतन-बिल की सुविधा पास कराई थी। देश और प्रदेश की 70 फीसदी से ज्यादा कृषि आधारित व्यवस्था में यह सम्मान सभी किसानों-गरीबों का सम्मान है।
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पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने पर रालोद के राष्ट्रीय सचिव अनुपम मिश्रा कहते हैं कि जिस तरह अटल जी की स्वीकार्यता हर दल के नेताओं में थी, उसी तरह चौधरी चरण सिंह की स्वीकार्यता भी हर दल के नेताओं में थी।
अनुपम मिश्रा कहते हैं चौधरी जी के बारे में एक बात काफी चर्चित है कि जब वह प्रधानमंत्री थे, एक बार मेरठ में एक सामान्य किसान के रूप में एक थाने पहुंचे। वहां उन्होंने बताया कि वह किसान हैं और उनकी भैंस गायब हो गई है। उसकी गुमशुदगी रिपोर्ट नहीं लिखी जा रही थी।
बाद में थाने वालों ने ले-देकर भैस खोजने की बात कही। उन्होंने कहा कि वह पढ़े-लिखे नहीं हैं। इस पर पुलिस वाले ने उनसे लिखकर लिया और उनका अंगूठा लगवा लिया। पैसा देने पर भैंस खोजने की बात कही। इसी कागज पर बतौर पीएम उन्होंने मुहर लगाते हुए पूरे थाने को निलंबित किया था।
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उन्होंने मंत्रियों को वेतन-बिल की सुविधा पास कराई थी। देश और प्रदेश की 70 फीसदी से ज्यादा कृषि आधारित व्यवस्था में यह सम्मान सभी किसानों-गरीबों का सम्मान है। यह खेतों और फसलों का सम्मान है। पीएम को धन्यवाद की उन्होंने बहुप्रतीक्षित मांग पर यह घोषणा की। यह करोडों किसानों, श्रमिकों, कामगारों का सम्मान है।
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अनुपम मिश्रा कहते हैं चौधरी जी के बारे में एक बात काफी चर्चित है कि जब वह प्रधानमंत्री थे, एक बार मेरठ में एक सामान्य किसान के रूप में एक थाने पहुंचे। वहां उन्होंने बताया कि वह किसान हैं और उनकी भैंस गायब हो गई है। उसकी गुमशुदगी रिपोर्ट नहीं लिखी जा रही थी।
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बाद में थाने वालों ने ले-देकर भैस खोजने की बात कही। उन्होंने कहा कि वह पढ़े-लिखे नहीं हैं। इस पर पुलिस वाले ने उनसे लिखकर लिया और उनका अंगूठा लगवा लिया। पैसा देने पर भैंस खोजने की बात कही। इसी कागज पर बतौर पीएम उन्होंने मुहर लगाते हुए पूरे थाने को निलंबित किया था।
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उन्होंने मंत्रियों को वेतन-बिल की सुविधा पास कराई थी। देश और प्रदेश की 70 फीसदी से ज्यादा कृषि आधारित व्यवस्था में यह सम्मान सभी किसानों-गरीबों का सम्मान है। यह खेतों और फसलों का सम्मान है। पीएम को धन्यवाद की उन्होंने बहुप्रतीक्षित मांग पर यह घोषणा की। यह करोडों किसानों, श्रमिकों, कामगारों का सम्मान है।
गलती का एहसास कराकर देते थे सजा
पद्मश्री भारत भूषण त्यागी ने कहा कि चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देकर सरकार ने किसानों की चिंता की है। लोग इसे राजनीतिक नजरिए से देख सकते हैं लेकिन मेरे हिसाब से यह एक नई उम्मीद है। किसानों का इससे सम्मान जगेगा। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह किसान और अधिकारियों की सुनते थे। सुनने के बाद संबंधित को उसकी गलती का एहसास कराकर सजा देते थे। इससे वह आदमी दोबारा गलती नहीं करता था। यह बहुत अच्छा निर्णय है।
पद्मश्री भारत भूषण त्यागी ने कहा कि चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देकर सरकार ने किसानों की चिंता की है। लोग इसे राजनीतिक नजरिए से देख सकते हैं लेकिन मेरे हिसाब से यह एक नई उम्मीद है। किसानों का इससे सम्मान जगेगा। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह किसान और अधिकारियों की सुनते थे। सुनने के बाद संबंधित को उसकी गलती का एहसास कराकर सजा देते थे। इससे वह आदमी दोबारा गलती नहीं करता था। यह बहुत अच्छा निर्णय है।
राजनीति को गांव की देहरी तक लाए
राज्य योजना आयोग के पूर्व सदस्य व लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. सुधीर पवार ने कहा कि देर से ही सही लेकिन चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने का निर्णय अच्छा है। चौधरी जी का खेती-किसानों को लेकर व्यवहारिक दृष्टिकोण था। वह जमीन और किसान के रिश्ते को समझते थे। उन्होंने जमीनी उन्मूलन कानून लागू कराकर न सिर्फ किसानों को उनका हक दिलाया बल्कि किसान और गरीब को भी राजनीति के केंद्र में लाया।
राज्य योजना आयोग के पूर्व सदस्य व लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. सुधीर पवार ने कहा कि देर से ही सही लेकिन चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने का निर्णय अच्छा है। चौधरी जी का खेती-किसानों को लेकर व्यवहारिक दृष्टिकोण था। वह जमीन और किसान के रिश्ते को समझते थे। उन्होंने जमीनी उन्मूलन कानून लागू कराकर न सिर्फ किसानों को उनका हक दिलाया बल्कि किसान और गरीब को भी राजनीति के केंद्र में लाया।
इससे पहले राजनीति पढ़े-लिखे, डॉक्टर, वकील और जमींदारों की मानी जाती थी। किंतु इसके बाद राजनीति किसान और गांव की देहरी तक आई। राजनीतिक दलों ने किसानों की भी सुननी और समझनी शुरू की। चौधरी साहब की किसानों और आम लोगों के बीच पैठ किस तरह थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह छपरौली से 40 साल लगातार विधायक रहे हैं।
इसी तरह चौधरी चरण सिंह ने जातिवाद पर कड़ा प्रहार किया था। उस समय जाति के नाम पर काफी स्कूल-कॉलेज खुले थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर स्कूल-कॉलेजों के नाम से जाति का नाम नहीं हटेगा तो उसे सरकारी अनुदान नहीं दिया जाएगा।
...तब विधान सभा प्रांगण में लगी थी चौधरी जी की मूर्ति
पूर्व मंत्री शतरुद्र प्रकाश ने बताया कि 1990 में मुलायम सिंह यादव पहली बार मुख्यमंत्री बने और मैं उनके साथ मंत्री। मैंने उनसे कहा कि सब जगह सिर्फ कांग्रेसी नेताओं की ही मूर्ति लगी है। किसी अन्य नेता की नहीं है, जबकि उनका योगदान काफी प्रशंसनीय है। मैंने उन्हें सुझाव दिया कि विधान सभा के सामने गोविंद वल्लभ पंत जी की मूर्ति है। क्यों न विधान सभा प्रांगण में चौधरी चरण सिंह की मूर्ति लगवाई जाए। वह मान गए और उन्होंने इस पर सहमति दी।
पूर्व मंत्री शतरुद्र प्रकाश ने बताया कि 1990 में मुलायम सिंह यादव पहली बार मुख्यमंत्री बने और मैं उनके साथ मंत्री। मैंने उनसे कहा कि सब जगह सिर्फ कांग्रेसी नेताओं की ही मूर्ति लगी है। किसी अन्य नेता की नहीं है, जबकि उनका योगदान काफी प्रशंसनीय है। मैंने उन्हें सुझाव दिया कि विधान सभा के सामने गोविंद वल्लभ पंत जी की मूर्ति है। क्यों न विधान सभा प्रांगण में चौधरी चरण सिंह की मूर्ति लगवाई जाए। वह मान गए और उन्होंने इस पर सहमति दी।
मैंने लखनऊ में एक मूर्तिकार से संपर्क किया तो उसने काफी कम समय में मूर्ति बनाने में असमर्थता जताई। इसके बाद प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्ति बनवाई। 29 मई 1990 को भव्य कार्यक्रम में उनकी मूर्ति का अनावरण किया गया। इसके मुख्य अतिथि चौधरी चरण सिंह के पुत्र और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अजित सिंह थे। बाद में इसी स्थान पर चौधरी जी की कांस्य की मूर्ति लगवाई गई।