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लैकफेड घोटाले में बाबूसिंह व बादशाह पर चार्जशीट

Tue, 22 Oct 2013 12:48 AM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
टीम डिजिटल/लखनऊ Updated Tue, 22 Oct 2013 12:48 AM IST
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chargesheet against babu singh and badshah

करोड़ों के लैकफेड घोटाले में पुलिस कोआपरेटिव सेल ने सोमवार चार्जशीट दाखिल की।

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चार्जशीट में कहा गया है कि बसपा सरकार के पूर्व मंत्रियों बादशाह सिंह ने पांच करोड़ और बाबूसिंह ने कुशवाहा ने 40 लाख घूस ली।

भ्रष्टाचार निवारण की विशेष कोर्ट के न्यायाधीश वीके श्रीवास्तव ने चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए गाजियाबाद की डासना जेल में बंद पूर्वमंत्री बाबूसिंह कुशवाहा को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है।

मामले की अगली सुनवाई 31 अक्तूबर को होगी। इसी मामले में फरार चल रहे लैकफेड के पूर्व चेयरमैन सुशील कटियार के खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल किया गया है।

पुलिस कोआपरेटिव सेल ने पूरक चार्जशीट दाखिल करते हुए बताया कि इस घोटाले की विवेचना अभी चल रही है यदि अन्य कोई सबूत सामने आते हैं तो आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।
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पुलिस कोऑपरेटिव सेल चार्जशीट में कहा है कि सुशील कटियार ने 6 अप्रैल 2010 को लैकफेड के सभापति का पदभार संभाला था तथा जानबूझकर जालसाजी व धोखाधड़ी करने के लिए लापरवाही बरती तथा लैकफेड के धन का मनमाने व नियम विरुद्ध तरीके से निकाले जाने पर कोई आपत्ति नहीं की।
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कहा गया कि आरोपी सुशील कटियार ने अपने पीआरओ प्रवीण सिंह का सहआरोपियों से परिचय कराया तथा नियमों का उल्लंघन किया।

अपने लाभ के लिए लैकफेड के करोड़ों के धन के गबन होने दिया और कोई कार्रवाई नहीं की। कटियार ने तत्कालीन सहकारिता मंत्री कुशवाहा को 40 लाख और श्रममंत्री बादशाह सिंह को 5 करोड़ रुपये उनके निवास पर जाकर रिश्वत के रूप में दिया।

गौरतलब है कि पुलिस कोऑपरेटिव सेल की विशेष जांच शाखा ने इस मामले में बसपा सरकार के चार पूर्व मंत्रियों बादशाह सिंह, चन्द्रदेव राम, रंगनाथ मिश्रा तथा बाबूसिंह कुशवाहा सहित कई अधिकारियों को आरोपी बनाया है।

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इस मामले में पुलिस कोआपरेटिव सेल द्वारा आरोपी बनाये गये सभी आरोपियों की जमानत नहीं हुई है। उल्लेखनीय है कि बाबूसिंह ने ही लैकफैड को कार्यदायी संस्था बनवाया था और विभिन्न विभागों में काम दिलाने के लिए तिकड़म की थी।

पुलिस कोआपरेटिव सेल की विशेष जांच शाखा की चार्जशीट में आरोपी बनाये गये पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा, एनआरएचएम घोटाले में गाजियाबाद की डासना जेल में बंद हैं।

राजधानी की भ्रष्टाचार निवारण की अदालत में विवेचक ने कुशवाहा को कई बार डासना जेल से लाकर पेश करने का आदेश दिया था परन्तु उनकी बीमारी का बहाना बनाकर उसे पेश नहीं किया गया।

बताते चलें लैकफेड के महाप्रबंधक (प्रशासन एवं वित्त) पीएन सिंह ने फरवरी 2012 को हुसैनगंज थाने में पंकज त्रिपाठी, गोविन्द शरण श्रीवास्तव तथा अनिल अग्रवाल के खिलाफ 12 करोड़ 36 लाख रुपये हड़पने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

पहले इस मामले की विवेचना हुसैनगंज की पुलिस कर रही थी बाद में शासन के आदेश से मामले की विवेचना पुलिस कोआपरेटिव सेल की विशेष शाखा को सौंप दी गई।

अदालत की सख्ती पर दाखिल हुई चार्जशीट
जो सरकार पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा को हाथो-हाथ ले रही है, उसके ही नुमायंदों ने पूर्व मंत्री के खिलाफ अदालत में ऐसे ही आरोप पत्र दाखिल (चार्जशीट) नहीं कर दिया।

बार-बार पेशी होने के बाद भी जांच अधिकारियों द्वारा किसी न किसी बहाने से अगली तारीख हासिल करने के रवैये से देखते हुए अदालत ने सख्त रवैया अपनाया था।

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यह अदालत की नाराजगी का ही डर था जो पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा व बादशाह सिंह के साथ लैकफेड के पूर्व अध्यक्ष सुशील कटियार के खिलाफ चार्ज शीट दाखिल कर दी गई।

हालांकि, यह चार्जशीट पहले सिर्फ पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के मामले में दाखिल होने की बात सामने आई थी, लेकिन अब जबकि इसे दाखिल करने की मजबूरी सामने आई तो सरकार ने पूर्व मंत्री बादशाह सिंह और पूर्व अध्यक्ष सुशील कटियार के आरोप भी साथ ही तय करा दिए।

जहां कुशवाहा पर चार करोड़ 28 लाख की लागत से सड़क निर्माण के कार्य में दस फीसदी यानि 40 लाख का कमीशन लेने का आरोप है वहीं बादशाह सिंह पर करोड़ों की रकम डकारने का।

ऐसे ही सुशील कटियार पर साजिश का आरोप तय किया गया है। वह भी तब जबकि जांच अधिकारी खुद ही यह मानते रहे हैं कि सारे घोटाले की जड़ पूर्व मंत्री कुशवाहा और उनका खास आदमी कटियार है।


इसी वजह से जांच एजेंसी ने पृर्व में कटियार की संपत्ति कुर्क करने के लिए अदालत का आदेश लिया था और जब कानपुर में उनकी संपत्ति कुर्क की गई तो दरवाजे और खिड़कियां तक उखाड़ लिए गए थे। इसके साथ ही कुशवाहा की गिरफ्तारी पर इनाम रखने के लिए सरकार से सिफारिश कर दी गई थी।

लेकिन सियासी समीकरण आड़े आ गए और सारी कवायद पर धूल डालने की मशक्कत शुरू हो गई। कटियार की गिरफ्तारी पर 50 हजार की रकम घोषित करने के लिए सरकार के पास प्रस्ताव भेजा गया।

इस प्रस्ताव पर आज तक कोई फैसला नहीं किया जा सका है। और तो और गृह विभाग के अधिकारी इस बाबत नपा-तुला जवाब दे रहे हैं कि अभी प्रकरण विचाराधीन है।

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