{"_id":"240a1d572e92ea8832f67a8e88fc432d","slug":"challege-to-pcs-2014-validity-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"PCS-प्री 2014 की वैधता को चुनौती, मांगा जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
PCS-प्री 2014 की वैधता को चुनौती, मांगा जवाब
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 15 Oct 2014 08:51 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट ने पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा 2014 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर प्रदेश सरकार और उप्र लोकसेवा आयोग से जानकारी मांगी है।
याचिका पर 16 अक्तूबर को सुनवाई होगी। प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों ने 26 सितंबर को घोषित परिणाम रद्द करने की मांग की है।
याचिका पर न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और डॉ. सतीश चंद्रा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
सुभाष कुमार पाल और 23 अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर पक्ष रखते हुए अधिवक्ता संतोष श्रीवास्तव का कहना था कि प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य अध्ययन के प्रथम प्रश्नपत्र में पूछे गए 20 सवाल गलत हैं या उनके उत्तर गलत दिए गए हैं।
इसी प्रकार से सम अंकों वाले प्रश्नों में अभ्यर्थियों को विषम संख्या में अंक दिए गए हैं और विषम अंकों वाले प्रश्नों में सम संख्या में अंक दिए गए हैं।
आयोग द्वारा अपनाई गई स्केलिंग की पद्धति को भी याचिका में दोषपूर्ण बताया गया है। आयोग द्वारा जारी की गई उत्तर कुंजी से मिलान करने पर कई अभ्यर्थियों का दावा है कि उनके प्राप्ताकों में 25 अंक तक का उतार या चढ़ाव है।
याचिका पर सुनवाई के बाद खंडपीठ ने आयोग और प्रदेश सरकार को इस मामले पर जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुए सुनवाई के लिए 16 अक्तूबर की तिथि नियत की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
याचिका पर 16 अक्तूबर को सुनवाई होगी। प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों ने 26 सितंबर को घोषित परिणाम रद्द करने की मांग की है।
याचिका पर न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और डॉ. सतीश चंद्रा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
सुभाष कुमार पाल और 23 अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर पक्ष रखते हुए अधिवक्ता संतोष श्रीवास्तव का कहना था कि प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य अध्ययन के प्रथम प्रश्नपत्र में पूछे गए 20 सवाल गलत हैं या उनके उत्तर गलत दिए गए हैं।
इसी प्रकार से सम अंकों वाले प्रश्नों में अभ्यर्थियों को विषम संख्या में अंक दिए गए हैं और विषम अंकों वाले प्रश्नों में सम संख्या में अंक दिए गए हैं।
आयोग द्वारा अपनाई गई स्केलिंग की पद्धति को भी याचिका में दोषपूर्ण बताया गया है। आयोग द्वारा जारी की गई उत्तर कुंजी से मिलान करने पर कई अभ्यर्थियों का दावा है कि उनके प्राप्ताकों में 25 अंक तक का उतार या चढ़ाव है।
विज्ञापन
याचिका पर सुनवाई के बाद खंडपीठ ने आयोग और प्रदेश सरकार को इस मामले पर जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुए सुनवाई के लिए 16 अक्तूबर की तिथि नियत की है।
विज्ञापन