लखनऊ सहित यूपी के पांच शहरों में वायु प्रदूषण रोकने के लिए 10-10 करोड़ का पैकेज देगा केंद्र
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केंद्र सरकार यूपी के पांच शहरों में वायु प्रदूषण कम करने के लिए 10-10 करोड़ रुपये का पैकेज देगी। इसके लिए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएआर) के तहत लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज व आगरा का चयन किया गया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने प्रदेश के 15 शहरों में वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के कारण उन्हें ‘नॉन एटेनमेंट सिटीज’ की श्रेणी में रखा है। ये वे शहर हैं जो पांच वर्षों से अधिक समय से नेशनल एंबिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड (एनएएक्यूएस) को प्राप्त करने में असफल रहे हैं।
ये शहर हैं-लखनऊ, कानपुर, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गाजियाबाद, नोएडा, खुर्जा, फिरोजाबाद, अनपरा, गजरौला, झांसी, मुरादाबाद, रायबरेली और बरेली। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने प्रदेश सरकार को इन शहरों की हवा को स्वच्छ करने के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल इन कदमों की निगरानी भी की जा रही है।
वहीं, यूपी के पर्यावरण विभाग ने 6 सदस्यीय एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग कमेटी भी गठित की है। इसके अलावा एक कार्ययोजना भी तैयार की गई है। इन तैयारियों के बीच केंद्र सरकार की ओर से 10-10 करोड़ रुपये दिए जाने के फैसले को बड़ा तोहफा माना जा रहा है।
'अभी तक ऐसी सुविधा किसी भी शहर के लिए उपलब्ध नहीं है'
शासन के अधिकारियों के मुताबिक, एनसीएआर के तहत इन 15 अति प्रदूषित शहरों में से पांच शहरों लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज और आगरा के चयन को संबंधित स्टीयरिंग कमेटी ने हरी झंडी दे दी है। जल्द ही औपचारिक आदेश जारी होंगे।
इस राशि से चयनित प्रत्येक शहर के लिए यांत्रिक सफाई मशीन और पानी के छिड़काव के लिए वाटर स्प्रिंकलिंग मशीन खरीदी जाएगी। भवनों को ढहाने और इनके निर्माण की प्रक्रिया में निकलने वाले वेस्ट के प्रबंधन के लिए जरूरी तकनीक व मशीनें भी मुहैया कराई जाएंगी।
अभी तक इस तरह की सुविधा किसी भी शहर में उपलब्ध नहीं है। वायु प्रदूषण के जिम्मेदार पदार्थों व घटनाओं का तकनीकी अध्ययन किया जाएगा और साथ ही अधिकाधिक पेड़ लगाकर ग्रीन कॉरिडोर भी विकसित किए जाएंगे।