राजनाथ का ऐलान, 300 स्मार्ट गांव बनाएगी मोदी सरकार
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केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जब तक गांव स्मार्ट नहीं बनेंगे, देश स्मार्ट नहीं बन सकता। केंद्र सरकार शहरों को विकसित करने के साथ ही 300 गांवों को स्मार्ट बनाएगी। इन गांवों में पक्की सड़क, बिजली, पानी, सफाई और स्वास्थ्य सुविधाएं होंगी।
किसानों को बाढ़ और सूखे से निजात दिलाने के लिए नदियों को जोड़ने की योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। यदि किसान अपनी उपज को दूसरे प्रदेशों में बेचना चाहते हैं तो उन्हें ई-प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा।
राजनाथ शनिवार को यहां भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान परिसर में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जागरूकता कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आजादी के समय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि का हिस्सा 52 फीसदी था जो अब घटकर मात्र 13 फीसदी रह गया है।
नई तकनीक से जीडीपी में कृषि की हिस्सेदारी और खेती के प्रति किसानों के विश्वास को बढ़ाया जा सकता है। देश में कभी बाढ़ तो कभी सूखे से फसलें बर्बाद हो जाती हैं। इससे निजात के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने नदियों को जोड़ने की योजना शुरू की थी। केंद्र सरकार इस काम को आगे बढ़ाएगी।
तैयार होंगी 100 जिलों की सिंचाई परियोजनाएं
देश में 60-65 फीसदी कृषि योग्य भूमि सिंचित नहीं है। इसके मद्देनजर केंद्र सरकार ने सिंचाई परियोजनाओं के लिए 5300 करोड़ रुपये का प्रतीकात्मक बजट आवंटन किया है। इस साल के अंत तक 100 जिलों की सिंचाई परियोजनाएं तैयार कर ली जाएंगी।
किसानों में हताशा, निराशा
गृहमंत्री ने कहा कि किसान अन्नदाता ही नहीं हैं, वे सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक आंदोलन के जन्मदाता भी हैं। आजादी की लड़ाई तभी सफल हुई जब गांव-गांव से इसकी आवाज उठी। स्वतंत्रता के बाद किसान और खेती के विकास पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। इसीलिए किसानों में हताशा और निराशा पैदा हुई है।
सरकार की सोच है कि किसानों को सशक्त बनाए बिना स्वावलंबी और स्वाभिमानी भारत नहीं बन सकता। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकल्प लिया है कि 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी कर दी जाएगी।
2017 तक नौ करोड़ किसानों को मृदा हेल्थ कार्ड
राजनाथ ने कहा कि जमीन की उत्पादकता को बनाए रखने मृदा स्वास्थ्य परीक्षण योजना 2015 में शुरू की गई थी। अब तक एक करोड़ किसानों को मृदा हेल्थ कार्ड दिए जा चुके हैं।
2017 तक नौ करोड़ किसानों को हेल्थ कार्ड दे दिए जाएंगे। जैविक खेती पर भी ध्यान दिया जा रहा है। देश में आठ हजार ऑर्गेनिक क्लस्टर काम कर रहे हैं। दूध का उत्पादन 1460 लाख टन से बढ़कर 1600 लाख टन पहुंच गया है।
दुनिया की सर्वश्रेष्ठ फसल बीमा योजना
गृहमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना देश ही नहीं, दुनिया की सर्वश्रेष्ठ फसल बीमा योजना है। इसमें किसानों को न्यूनतम प्रीमियम पर अधिकतम लाभ दिया जाएगा। खेत-खलिहान में फसल की बर्बादी पर बीमा की रकम मिलेगी। फसल की बोआई न होने पर भी एक चौथाई बीमित राशि मिलेगी।
किसान की पीड़ा, न बीमा की रकम मिली, न राहत
राजनाथ ने किसानों से पूछा कि कितने लोग फसल का बीमा कराते हैं तो केवल एक हाथ उठा। उन्होंने बीमा कराने वाले गोसाईंगंज ब्लाक के दुल्हापुर हुसैनाबाद निवासी अंशुमान पटेल को मंच पर बुलाया। अंशुमान ने बताया कि पिछले साल गेहूं की फसल का बीमा कराया था। बारिश से फसल खराब हो गई लेकिन न तो बीमा की रकम मिली और न ही प्रदेश या केंद्र सरकार से कोई राहत।
इन किसानों का किया गया सम्मान
राजनाथ ने समारोह में लखनऊ जिले के चार किसानों को सम्मानित किया। इनमें कासिमपुर निवासी एक एकड़ के रमेश कुमार वर्मा विदेशी सब्जियों की खेती कर रहे हैं जबकि मिरखनगर (मोहनलालगंज) की बिटाना देवी दूध उत्पादन में शानदार काम कर रही हैं। इसके अलावा मिर्जापुर बेंती के रामचंद्र यादव और कमला देवी को कृषि क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिए सम्मानित किया गया।
खेती को विदेशी चंगुल से बचाएं वैज्ञानिक : कौशल
मोहनलालगंज के सांसद कौशल किशोर ने कहा कि 1994 में डंकल प्रस्ताव के जरिये फसलों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथों में देने के प्रयास किए गए। हाईब्रिड बीज, विदेशी खाद व कीटनाशकों का प्रयोग अनिवार्य किया गया। हाईब्रिड सीड के इस्तेमाल से देसी बीज खत्म हो जाएंगे।
विदेशी साजिश है कि खेती हमारी रहे और फसल उनकी हो जाए। वैज्ञानिक देसी हाईब्रिड बीजों पर काम करें ताकि बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर किसानों की निर्भरता खत्म हो सके।