यूपी के बड़े प्रोजेक्ट को मोदी सरकार ने ठुकराया
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केंद्र सरकार ने प्रदेश के पांच जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेजों में तब्दील करने की योजना के प्रस्ताव को आधी-अधूरी सूचनाओं के कारण लौटा दिया है। केंद्र ने पांच स्थानों की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) भेजने के लिए कहा है। केंद्र सरकार की इस योजना के तहत 70 फीसदी पैसा केंद्र को देना है जबकि 30 फीसदी प्रदेश सरकार को।
ये मेडिकल कॉलेज शाहजहांपुर, बस्ती, बहराइच, फैजाबाद व फीरोजाबाद जिले में बनने हैं। इनके जिला अस्पतालों को लेकर मेडिकल कॉलेज तैयार होने हैं। प्रत्येक मेडिकल कॉलेज के लिए करीब 200 करोड़ रुपये का खर्च का अनुमान है। ऐसे में प्रत्येक मेडिकल कॉलेज के लिए प्रदेश सरकार को 60 करोड़ रुपये खर्च करने हैं, जबकि 140 करोड़ केंद्र सरकार से मिलेंगे।
करीब एक साल पहले प्रदेश सरकार ने इस योजना के तहत पांचों जिलों के डीएम को पत्र भेजकर जिला अस्पतालों के आस-पास 20 एकड़ जमीन खोजने के निर्देश दिए थे।
डीएम को 10 किलोमीटर की परिधि में जमीन की तलाश करने के लिए कहा गया था। इसी के साथ प्रदेश सरकार ने केंद्र को मेडिकल कॉलेज बनाने का प्रस्ताव भेज दिया, लेकिन इनकी डीपीआर भेजने के बजाय प्रारंभिक आगणन ही भेजा।
एक साल का समय निकलने के बाद सक्रिय हुई सरकार
ऐसे में केंद्र ने यूपी सरकार के प्रस्ताव को लौटा दिया है। केंद्र सरकार ने यह आपत्ति लगाई है कि मेडिकल कॉलेजों की अभी तक डीपीआर क्यों नहीं भेजी गई।
करीब एक साल का समय निकलने के बाद अब प्रदेश सरकार फिर सक्रिय हुई है। अभी तक डीपीआर इसलिए भी तैयार नहीं हो पाई थी क्योंकि कुछ जिलों में सरकार को जमीन ही नहीं मिल सकी है।
जबकि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नए मानकों के अनुसार अब मेडिकल कॉलेज परिसर की जमीन दो हिस्सों में हो सकती है। प्रत्येक मेडिकल कॉलेज के लिए 20 एकड़ जमीन चाहिए होती है। जिला अस्पतालों की जमीनों का आकलन कर बची हुई जमीन ढूंढनी है।
राजकीय निर्माण निगम तैयार करेगा डीपीआर
राज्य सरकार ने पांचों मेडिकल कॉलेजों की डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी राजकीय निर्माण निगम को सौंप दी है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने राजकीय निर्माण निगम को यह काम जल्द करने के लिए कहा है। डीपीआर तैयार होने के बाद प्रदेश सरकार फिर अपना प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजेगी।