12 स्मार्ट सिटी के लिए यूपी को मिली पहली किस्त
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केंद्र सरकार ने स्मार्ट सिटी का खाका खींचने के लिए उत्तर प्रदेश को 12 शहरों के लिए 24 करोड़ रुपये दिए हैं। प्रत्येक शहर को दो-दो करोड़ रुपये दिए जाएंगे। कंसल्टेंट शहरवार स्मार्ट सिटी का पहले लेआउट तैयार करते हुए नगर विकास विभाग के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजेंगे।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की मंजूरी के बाद इसके आधार पर कराए जाने वाले कामों के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी।
केंद्र सरकार पहले चरण में देश के 100 शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करना चाहती है। यूपी के 13 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाया जाएगा।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने 12 शहरों मुरादाबाद, अलीगढ़, सहारनपुर, बरेली, झांसी, कानपुर, इलाहाबाद, लखनऊ, वाराणसी, गाजियाबाद, आगरा व रामपुर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की मंजूरी दे दी है। तेरहवें शहर पर पेंच फंसा हुआ है।
राज्य सरकार ने रायबरेली को ए व मेरठ को बी करते हुए प्रस्ताव भेजा था, पर केंद्र ने राज्य सरकार से कह दिया है कि वह दोनों में से किसी एक को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए स्पष्ट प्रस्ताव भेजे।
दिया गया 15 सितंबर तक का वक्त
केंद्र ने जिन शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की मंजूरी दी है उसके लिए दो-दो करोड़ रुपये दे दिए हैं। राज्य सरकार इस राशि को कंसल्टेंट से स्मार्ट सिटी का प्रारूप तैयार कराने के साथ डीपीआर बनाने पर खर्च किया जाएगा। राज्य सरकार ने कंसल्टेंट चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
केंद्र सरकार ने कंसल्टेंट के लिए नामों का पैनल भेजा है। इसके आधार पर स्मार्ट सिटी के लिए चुने गए शहरों से कंसल्टेंट का नाम चयनित करते हुए 15 सितंबर तक देने को कहा गया है।
कार्यशाला में शामिल हुए मेयर व अफसर
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को दिल्ली में स्मार्ट सिटी पर कार्यशाला आयोजित की। इसमें यूपी समेत कुल दस राज्यों के स्मार्ट सिटी के लिए चुने गए शहरों के मेयर, चेयरमैन, नगर आयुक्त, अधिशासी अधिकारी के साथ शासन और निदेशालय के अधिकारी शामिल हुए। कार्यशाला में मेयरों और अधिकारियों को स्मार्ट सिटी की खासियत बताई गई। इसके साथ ही उनसे सुझाव भी लिए गए।
मेरठ को पीछे करने की असली वजह अदावत तो नहीं
स्मार्ट सिटी के लिए शहरों का चयन मानक के आधार पर किया गया। इसके लिए कुल 14 कार्यों के आधार पर अंकों का निर्धारण करने की शर्तें रखी गईं। राज्य सरकार ने इसके आधार पर ही शहरों का चयन किया। स्मार्ट सिटी की दौड़ में कुल 28 शहरों के नाम आए।
मेरठ व रायबरेली को मिले समान अंक
इनमें से वरीयता के आधार पर 12 शहर सबसे आगे रहे, लेकिन मेरठ व रायबरेली को एक समान 75-75 अंक मिले। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को रायबरेली को ए और मेरठ को बी करते हुए प्रस्ताव भेजा। अंदर खाने की मानें तो ऐसा जानबूझ कर किया गया।
वरीयता क्रम में अगर लिया जाता तो महानगर होने के नाते मेरठ आगे निकल जाता, लेकिन विभाग के मुखिया नगर विकास मंत्री मो. आजम खां का मेरठ के बसपा नेता हाजी याकूब कुरैशी से छत्तीस का आंकड़ा है। इसके अलावा भी इस शहर में आजम के कुछ राजनीतिक विरोधी हैं। इसलिए मेरठ को किनारे कर दिया गया। राज्य सरकार एक तीर से दो निशाना साधना चाहती थी।
केंद्र यदि अपने स्तर पर रायबरेली या मेरठ में किसी एक को चुन लेता, तो कहने का मौका मिल जाता। केंद्र सरकार रायबरेली को चुनती तो यह कहा जाता कि उसने सोनिया गांधी को तरजीह दी और मेरठ को चुनती तो प्रचार किया जाता कि सोनिया गांधी के क्षेत्र को राजनीतिक वजहों से छोड़ दिया गया। केंद्र ने अब राज्य सरकार के पाले में गेंद डाल दी है।
जानकारों की मानें तो नगर विकास विभाग रायबरेली को ही स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करना चाहता है। हालांकि, अंतिम निर्णय मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में किया जाएगा। यह बैठक 6 सितंबर के बाद होगी।