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Lucknow News: सीमेंट–सरिया के दाम घटे, मजदूरों की कमी से कारोबार भी घटा
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सीमेंट–सरिया के दाम घटे, मजदूरों की कमी से कारोबार भी घटा
लखनऊ। घर बनाने का सपना देखने वालों के लिए राहत भरी खबर है। जीएसटी दरों में कमी के बाद सीमेंट और सरिया के दामों में गिरावट आने से निर्माण लागत अब पहले से कम हो गई है। इससे मध्य वर्ग को खासी राहत मिली है। 1000 वर्ग फीट मकान के निर्माण में सीमेंट पर 40 हजार रुपये व सरिया पर 30 हजार रुपये की लागत कम हो गई है।
निर्माण सामग्री सस्ती होने के बावजूद निर्माण कार्यों की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ी हुई है। इसकी वजह श्रमिकों की कमी है। बताया जाता है कि ज्यादातर स्थानीय मजदूर इन दिनों धान की कटाई में व्यस्त हैं। बाहर से आए श्रमिक त्योहार के बाद अभी तक नहीं लौटे हैं। जानकारों का कहना है कि जैसे ही कृषि कार्य और त्योहारी सीजन का दौर खत्म होगा, श्रमिकों की उपलब्धता बढ़ेगी और निर्माण कार्यों में फिर तेजी देखने को मिलेगी। हालांकि, तब तक ठेकेदारों और मकान बनाने वालों को थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।
1000 वर्ग फीट में 600 बोरी सीमेंट, 30 क्विंटल लगती है सरिया
अभियंता लघु सिंचाई मो. नियाज के मुताबिक 1000 वर्ग फीट भवन के निर्माण में करीब 600 बोरी सीमेंट और करीब 30 क्विंटल सरिया लगती है। पहले सीमेंट 395 से 440 रुपये तक बिकती थी जो अब 370 रुपये से लेकर 400 रुपये तक बिक रही है। सरिया 6000 रुपये प्रति क्विंटल के स्थान पर अब 5100 रुपये प्रति क्विंटल मिल रही है। इस तरह सरिया पर करीब 30 हजार और सीमेंट पर करीब 40 हजार रुपये की लागत कम हो गई है।
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मिस्त्री और मजदूर कम मिल रहे
बिल्डिंग मैटेरियल के कारोबारी अमित अवस्थी के अनुसार सीमेंट-सरिया के दाम में गिरावट के बाद भी इसकी बिक्री पिछले एक महीने में 50 फीसदी से भी कम हो गई है। पहले करीब 100 बोरी फुटकर और 400 बोरी थोक सीमेंट बिक जाती थी लेकिन अब बिक्री आधी से भी कम हो गई है। भवन निर्माण कराने वालों का कहना है कि मिस्त्री और मजदूर कम मिल रहे हैं।
काम शुरू करने में दिक्कत हो रही
बसेड़ा मोड़ कल्याणपुर निवासी शमशेर एडवोकेट के अनुसार भवन के पुराने भाग की कुछ मरम्मत करानी थी। इसके अलावा एक कमरा और बनवाना है। सीमेंट-सरिया के दाम कम होने से बनवाने की हिम्मत जुटाई लेकिन अधिकांश मिस्त्री और मजदूर पिछले दिनों त्योहार पर अपने घर जाने के बाद वापस नहीं आए हैं। धान की कटाई, तिलहन फसलों की बोआई शुरू होने से काफी मजदूर उसमें लग गए हैं। इस वजह से काम शुरू करने में दिक्कत हो रही है।
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निर्माण सामग्री सस्ती होने के बावजूद निर्माण कार्यों की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ी हुई है। इसकी वजह श्रमिकों की कमी है। बताया जाता है कि ज्यादातर स्थानीय मजदूर इन दिनों धान की कटाई में व्यस्त हैं। बाहर से आए श्रमिक त्योहार के बाद अभी तक नहीं लौटे हैं। जानकारों का कहना है कि जैसे ही कृषि कार्य और त्योहारी सीजन का दौर खत्म होगा, श्रमिकों की उपलब्धता बढ़ेगी और निर्माण कार्यों में फिर तेजी देखने को मिलेगी। हालांकि, तब तक ठेकेदारों और मकान बनाने वालों को थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।
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1000 वर्ग फीट में 600 बोरी सीमेंट, 30 क्विंटल लगती है सरिया
अभियंता लघु सिंचाई मो. नियाज के मुताबिक 1000 वर्ग फीट भवन के निर्माण में करीब 600 बोरी सीमेंट और करीब 30 क्विंटल सरिया लगती है। पहले सीमेंट 395 से 440 रुपये तक बिकती थी जो अब 370 रुपये से लेकर 400 रुपये तक बिक रही है। सरिया 6000 रुपये प्रति क्विंटल के स्थान पर अब 5100 रुपये प्रति क्विंटल मिल रही है। इस तरह सरिया पर करीब 30 हजार और सीमेंट पर करीब 40 हजार रुपये की लागत कम हो गई है।
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मिस्त्री और मजदूर कम मिल रहे
बिल्डिंग मैटेरियल के कारोबारी अमित अवस्थी के अनुसार सीमेंट-सरिया के दाम में गिरावट के बाद भी इसकी बिक्री पिछले एक महीने में 50 फीसदी से भी कम हो गई है। पहले करीब 100 बोरी फुटकर और 400 बोरी थोक सीमेंट बिक जाती थी लेकिन अब बिक्री आधी से भी कम हो गई है। भवन निर्माण कराने वालों का कहना है कि मिस्त्री और मजदूर कम मिल रहे हैं।
काम शुरू करने में दिक्कत हो रही
बसेड़ा मोड़ कल्याणपुर निवासी शमशेर एडवोकेट के अनुसार भवन के पुराने भाग की कुछ मरम्मत करानी थी। इसके अलावा एक कमरा और बनवाना है। सीमेंट-सरिया के दाम कम होने से बनवाने की हिम्मत जुटाई लेकिन अधिकांश मिस्त्री और मजदूर पिछले दिनों त्योहार पर अपने घर जाने के बाद वापस नहीं आए हैं। धान की कटाई, तिलहन फसलों की बोआई शुरू होने से काफी मजदूर उसमें लग गए हैं। इस वजह से काम शुरू करने में दिक्कत हो रही है।