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Lucknow News: कायाकल्प के दावों में दरार, कहीं दरकी छत, कहीं टूटी दीवार... ऐसे शुरू होगा नया सत्र

Tue, 23 Jun 2026 02:25 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2026 02:25 AM IST
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ceilings caving in, walls crumbling
कई सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई से पहले उनकी सुरक्षा बड़ा सवाल बनी हुई है।
लखनऊ। 25 जून से राजधानी के परिषदीय विद्यालयों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने जा रहा है, लेकिन कई सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई से पहले उनकी सुरक्षा बड़ा सवाल बनी हुई है। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कहीं भवन जर्जर हैं, कहीं बाउंड्रीवाल टूटी है तो कहीं बच्चे दूसरे विद्यालयों में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। अमर उजाला की पड़ताल में शिक्षा व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई, जो विद्यालयों की वास्तविक स्थिति और सरकारी दावों के बीच का अंतर उजागर करती है।
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केस-1 : प्राथमिक विद्यालय सिरौना गोसाईंगंज स्थित प्राथमिक विद्यालय सिरौना का मूल भवन अत्यंत जर्जर अवस्था में है। इसी भवन में बच्चे बैठकर पढ़ाई करते हैं। वर्ष 1986 में स्वीकृत और 1988 में निर्मित विद्यालय भवन में दो कमरे, एक बरामदा और प्रधानाध्यापक कक्ष बनाया गया था। 38 वर्ष बाद भवन की ईंटों की छत में दरारें पड़ चुकी हैं। विद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि विद्यालय प्रबंध समिति की ओर से भवन की स्थिति संबंधी प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा जा चुका है।
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केस-2 : प्राथमिक विद्यालय अरोरा, मोहनलालगंज वर्ष 1993-94 में स्थापित यह विद्यालय भी जर्जर स्थिति में है। यहां भी कक्षाएं संचालित हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालय भवन की हालत खराब है, लेकिन आसपास कोई दूसरा विद्यालय न होने के कारण अभिभावक मजबूरी में बच्चों को यहीं पढ़ने भेज रहे हैं।
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केस-3 : पूर्व माध्यमिक विद्यालय बंथरा सरोजनीनगर क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय बंथरा में बाउंड्रीवाॅल टूटी होने से सुरक्षा की समस्या बनी हुई है। प्रधानाध्यापक संतोष कुमार के अनुसार विद्यालय में 216 छात्र हैं, लेकिन पर्याप्त फर्नीचर उपलब्ध नहीं है। कई बार अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। विद्यालय परिसर में आवारा पशुओं का जमावड़ा रहता है और शौचालयों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है।

केस-4 : बरिगंवा का प्राथमिक विद्यालय

कृष्णा नगर के बरिगंवा स्थित प्राथमिक विद्यालय का भवन करीब तीन वर्ष पहले ध्वस्त हो चुका है। विद्यालय के 75 बच्चे वर्तमान में पिकेडली रोड स्थित प्राथमिक विद्यालय बल्दीखेड़ा के अतिरिक्त हाल में पढ़ाई कर रहे हैं। विद्यालय की इंचार्ज वंदना तिवारी ने बताया कि बच्चों को पढ़ाने के लिए उनके साथ केवल एक सहायक अध्यापक हैं।

केस-5 : सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई

प्राथमिक विद्यालय बल्दीखेड़ा की इंचार्ज पूजा अरोड़ा ने बताया कि विद्यालय में 65 बच्चे अध्ययनरत हैं। यहां बिजली, पानी, सफाई और भवन संबंधी समस्याएं बनी हुई हैं। सहायक अध्यापिका प्रीति श्रीवास्तव के साथ मिलकर एक से पांचवीं तक की कक्षाओं का संचालन किया जाता है।

कोट
किसी भी जर्जर विद्यालय में कक्षाओं के संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि विद्यालयों का निरीक्षण कर लिया जाए। लापरवाही हुई तो खंड शिक्षा अधिकारी जिम्मेदार होंगे।


- विपिन कुमार, बीएसए

कई सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई से पहले उनकी सुरक्षा बड़ा सवाल बनी हुई है।

कई सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई से पहले उनकी सुरक्षा बड़ा सवाल बनी हुई है।

कई सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई से पहले उनकी सुरक्षा बड़ा सवाल बनी हुई है।

कई सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई से पहले उनकी सुरक्षा बड़ा सवाल बनी हुई है।

कई सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई से पहले उनकी सुरक्षा बड़ा सवाल बनी हुई है।

कई सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई से पहले उनकी सुरक्षा बड़ा सवाल बनी हुई है।

कई सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई से पहले उनकी सुरक्षा बड़ा सवाल बनी हुई है।

कई सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई से पहले उनकी सुरक्षा बड़ा सवाल बनी हुई है।

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