दिल्ली-सहारनपुर-यमुनोत्री फोर लेन घोटाले की जांच से सीबीआई का इन्कार
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गृह विभाग ने इस मामले में सीबीआई जांच कराना क्यों जरूरी है, यह बताते हुए दोबारा गृह मंत्रालय को सिफारिश भेजी है। प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि मई में इस घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की गई थी। इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को निर्धारित प्रारूप पर पत्र लिखा गया था।
मालूम हो कि उप्र स्टेट हाईवे अथॉरिटी (उपशा) ने अगस्त 2011 में इस सड़क को दो से चार लेन करने के लिए मेसर्स एसईडब्लू-एलएसवाई हाईवेज लिमिटेड और प्रसाद एंड कंपनी को काम सौंपा था।
इन कंपनियों ने मात्र 13 प्रतिशत काम करके बैंक अधिकारियों व सीए की मदद से 603 करोड़ रुपये का भुगतान करा लिया। जबकि कंपनी की ओर से मात्र 148 करोड़ रुपये का ही काम किया गया था।
उपशा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रहे नवनीत सहगल के निर्देश पर इस परियोजना के महाप्रबंधक शिव कुमार अवधिया ने 14 बैंकों केअधिकारियों, कंपनी के डायरेक्टर व प्रमोटर डायरेक्टर के खिलाफ 455 करोड़ रुपये के गबन का आरोप लगाते हुए 20 फरवरी 2017 को एफआईआर दर्ज कराई थी।
अब अगर दोबारा सिफारिश करने पर भी सीबीआई जांच नहीं करती है तो फिर इस मामले को भी राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के हवाले किया जा सकता है।
ये है पूरा मामला
उपशा ने दिल्ली-सहारनपुर से यमुनोत्री मार्ग (एसएच 57) तक सड़क बनाने का काम मेसर्स एसईडब्लू-एलएसवाई हाईवेज लिमिटेड को डिजाइन, बिल्ड, फाइनेन्स ऑपरेट एंड ट्रांसफर के आधार पर दिया था।
इसके लिए निर्माण कंपनी व उपशा के बीच अगस्त 2011 में अनुबंध हुआ था। इस सड़क को दो से चार लेन करने के लिए 30 मार्च 2012 से 900 दिनों की समय सीमा तय की गई थी।
लागत 1735 करोड़ रुपये बताई गई थी। निर्माण कंपनी के दोनों प्रमोटर डायरेक्टर सुकरवा अनिल कुमार और अलोरी साईं बाबा ने मिलकर 14 बैंकों से 1700 करोड़ का लोन लेने का अनुबंध किया।
दोनों ने बैंक से सामान्य लोन के लिए अनुबंध किया। लोन जारी करने की शर्तें धारा 244 में निहित थीं। धारा 2.4.3 (बी) चार में बताया गया था कि यह लोन सिर्फ चार लेन सड़क निर्माण के लिए ही जारी किया जाएगा।
साथ ही बैंक के स्वतंत्र अभियंता द्वारा निर्माण कार्य की जांच कर रिपोर्ट दी जाएगी। इस रिपोर्ट की जांच बैंक के चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा की जानी थी।
इन लोगों के खिलाफ दर्ज है एफआईआर
इसमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कॉर्पोरेशन बैंक, देना बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड, इंडियन ओवरसीज बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, पंजाब नेशनल बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया व विजया बैंक के नाम हैं।