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किरकिरी के बाद उठाया कदम : फर्जी अंकपत्र मामले में एलयू की सीबीआई जांच की गुहार
Tue, 11 Jun 2019 01:10 AM IST
सौरभ दिक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: सौरभ दिक्षित
Updated Tue, 11 Jun 2019 01:10 AM IST
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फर्जी अंकपत्रों के मामले में हो रही किरकिरी को देखते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने सीबीआई जांच कराए जाने के लिए राज्य सरकार से सिफारिश की है। कुलसचिव शैलेश शुक्ला ने सोमवार को इसके लिए राज्य सरकार को पत्र भेजा है।
साथ ही किसी भी प्रकार की जांच में सहयोग करने का भी आश्वासन दिया गया है। फर्जी अंकपत्रों का मामला तब सामने आया जब 17 अप्रैल को बगैर पढ़ाई के ही विधि स्नातक बनाने वाला गिरोह पुलिस के हत्थे चढ़ा।
गिरोह के सरगना एलयू के परीक्षा विभाग से बर्खास्त बाबू खिरोधन प्रसाद उर्फ गंगेश, गोसाईंगंज के अमेठी का दीवान सिंह, मड़ियांव फैजुल्लागंज का दीपक तिवारी उर्फ दीपू, ठाकुरगंज के निवाजगंज का नायाब हुसैन, सीतापुर महमूदाबाद का रविंद्र प्रताप सिंह और हसनगंज खदरा का मधुरेंद्र पांडेय को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
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गिरोह डेढ़ लाख रुपये प्रति सेमेस्टर के हिसाब से वसूलता था। पूछताछ में गिरोह ने 300 युवकों को फर्जी डिग्री बांटने की बात कुबूली थी।
गिरोह के पास कैसे पहुंचे एलयू के टैबुलेशन चार्ट
गिरोह के पास से लखनऊ विश्वविद्यालय के 14 अंकपत्र और छह टैबुलेशन चार्ट बरामद हुए थे। जांच में अंकपत्र तो फर्जी पाए गए, लेकिन टैबुलेशन चार्ट विश्वविद्यालय के ही थे। साफ है कि इन्हीं टैबुलेशन चार्ट की मदद से फर्जी अंकपत्र तैयार किए जा रहे थे। टैबुलेशन चार्ट गिरोह तक कैसे पहुंचा, ये हैरान करने वाला सवाल है। बगैर विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत के ऐसा होना संभव नहीं। आशंका है कि गिरोह के तार विश्वविद्यालय से जुड़े हुए थे। लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने भी इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी। इसके साथ हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका में भी सीबीआई जांच की मांग की जा चुकी है। इन सबको देखते हुए लविवि ने सीबीआई जांच के लिए राज्य सरकार को पत्र लिख दिया है।
साख पर बट्टा : फर्जी अंकपत्रों का मामला कोई नया नहीं
विश्वविद्यालय के फर्जी अंकपत्र मिलने का यह कोई नया मामला नहीं था। इससे पहले भी मामले सामने आए। इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने कभी इस तरफ विशेष ध्यान नहीं दिया। नतीजा, मामले लगातार बढ़ते गए। वर्ष 2015 में लखीमपुर में एलयू के करीब 150 फर्जी अंकपत्र पकड़े गए थे। इसी तरह वर्ष 2015 में एलटी ग्रेड भर्ती में चार सौ से ज्यादा फर्जी अंकपत्र सत्यापन के दौरान पकड़ में आए थे। इस मामले में एफआईआर तक हुई। वर्ष 2012 में मुजफ्फरनगर में 18 अभ्यर्थियों को वहां के डायट में फर्जी अंकपत्र के सहारे दाखिला लेते पकड़ा गया था।
आगे क्या...
लविवि से मिले पत्र के बाद राज्य सरकार को सीबीआई जांच के लिए केंद्र को पत्र लिखना होगा। सीबीआई जांच राज्य सरकार की मंजूरी के बाद ही शुरू की जाती है।
हम करेंगे पूरा सहयोग
लविवि के कुलसचिव शैलेश शुक्ला ने बताया कि फर्जी अंकपत्र मामले में लखनऊ विश्वविद्यालय हर तरह की जांच में सहयोग करेगा। अगर राज्य सरकार इस मामले की सीबीआई जांच कराना चाहती है तो लविवि को उसमें कोई आपत्ति नहीं है। इसके लिए सोमवार को राज्य सरकार को पत्र भेजा गया है।
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साथ ही किसी भी प्रकार की जांच में सहयोग करने का भी आश्वासन दिया गया है। फर्जी अंकपत्रों का मामला तब सामने आया जब 17 अप्रैल को बगैर पढ़ाई के ही विधि स्नातक बनाने वाला गिरोह पुलिस के हत्थे चढ़ा।
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गिरोह के सरगना एलयू के परीक्षा विभाग से बर्खास्त बाबू खिरोधन प्रसाद उर्फ गंगेश, गोसाईंगंज के अमेठी का दीवान सिंह, मड़ियांव फैजुल्लागंज का दीपक तिवारी उर्फ दीपू, ठाकुरगंज के निवाजगंज का नायाब हुसैन, सीतापुर महमूदाबाद का रविंद्र प्रताप सिंह और हसनगंज खदरा का मधुरेंद्र पांडेय को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
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गिरोह डेढ़ लाख रुपये प्रति सेमेस्टर के हिसाब से वसूलता था। पूछताछ में गिरोह ने 300 युवकों को फर्जी डिग्री बांटने की बात कुबूली थी।
गिरोह के पास कैसे पहुंचे एलयू के टैबुलेशन चार्ट
गिरोह के पास से लखनऊ विश्वविद्यालय के 14 अंकपत्र और छह टैबुलेशन चार्ट बरामद हुए थे। जांच में अंकपत्र तो फर्जी पाए गए, लेकिन टैबुलेशन चार्ट विश्वविद्यालय के ही थे। साफ है कि इन्हीं टैबुलेशन चार्ट की मदद से फर्जी अंकपत्र तैयार किए जा रहे थे। टैबुलेशन चार्ट गिरोह तक कैसे पहुंचा, ये हैरान करने वाला सवाल है। बगैर विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत के ऐसा होना संभव नहीं। आशंका है कि गिरोह के तार विश्वविद्यालय से जुड़े हुए थे। लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने भी इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी। इसके साथ हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका में भी सीबीआई जांच की मांग की जा चुकी है। इन सबको देखते हुए लविवि ने सीबीआई जांच के लिए राज्य सरकार को पत्र लिख दिया है।
साख पर बट्टा : फर्जी अंकपत्रों का मामला कोई नया नहीं
विश्वविद्यालय के फर्जी अंकपत्र मिलने का यह कोई नया मामला नहीं था। इससे पहले भी मामले सामने आए। इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने कभी इस तरफ विशेष ध्यान नहीं दिया। नतीजा, मामले लगातार बढ़ते गए। वर्ष 2015 में लखीमपुर में एलयू के करीब 150 फर्जी अंकपत्र पकड़े गए थे। इसी तरह वर्ष 2015 में एलटी ग्रेड भर्ती में चार सौ से ज्यादा फर्जी अंकपत्र सत्यापन के दौरान पकड़ में आए थे। इस मामले में एफआईआर तक हुई। वर्ष 2012 में मुजफ्फरनगर में 18 अभ्यर्थियों को वहां के डायट में फर्जी अंकपत्र के सहारे दाखिला लेते पकड़ा गया था।
आगे क्या...
लविवि से मिले पत्र के बाद राज्य सरकार को सीबीआई जांच के लिए केंद्र को पत्र लिखना होगा। सीबीआई जांच राज्य सरकार की मंजूरी के बाद ही शुरू की जाती है।
हम करेंगे पूरा सहयोग
लविवि के कुलसचिव शैलेश शुक्ला ने बताया कि फर्जी अंकपत्र मामले में लखनऊ विश्वविद्यालय हर तरह की जांच में सहयोग करेगा। अगर राज्य सरकार इस मामले की सीबीआई जांच कराना चाहती है तो लविवि को उसमें कोई आपत्ति नहीं है। इसके लिए सोमवार को राज्य सरकार को पत्र भेजा गया है।