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कानपुर विश्वविद्यालय: प्रो. विनय पाठक के खिलाफ सीबीआई जांच की संस्तुति, केंद्र सरकार को भेजा गया पत्र
Sat, 31 Dec 2022 09:59 AM IST
ishwar ashish
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 31 Dec 2022 09:59 AM IST
सार
कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय पाठक के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी गई है। उनके खिलाफ इंदिरानगर थाने में रंगदारी व अवैध वसूली का केस दर्ज है। अब तक उनके तीन करीबियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
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कुलपति प्रो. विनय पाठक
- फोटो : amar ujala
विस्तार
छत्रपति शाहूजी महाराज विवि, कानपुर के कुलपति प्रो. विनय पाठक पर रंगदारी, कमीशन और अवैध वसूली के मामले की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति कर दी गई है। प्रदेश सरकार ने इस संबंध में केंद्र को पत्र भेजा है। प्रो. पाठक व उनके करीबी एक्सएलआईसीटी कंपनी के एमडी अजय मिश्रा के खिलाफ इंदिरानगर थाने में 29 अक्तूबर को केस दर्ज हुआ था। इसकी जांच एसटीएफ कर रही और अब तक अजय मिश्रा समेत तीन की गिरफ्तारी हो चुकी है।
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डॉ. भीमराव अंबेडकर विवि, आगरा में परीक्षा कराने वाली कंपनी डिजीटेक्स टेक्नालॉजिज इंडिया प्रा. लि. के एमडी डेविड मारियो डेनिस ने अजय मिश्रा के जरिए प्रो. पाठक पर कमीशन लेने समेत अन्य आरोप लगाए हैं। केस दर्ज होते ही एसटीएफ ने अजय मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद अजमेर के कारोबारी अजय जैन और सीतापुर निवासी संतोष की गिरफ्तारी हुई। तीनों पर प्रो. पाठक के काले धन को सफेद करने का आरोप है।
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कई बार कमीशन लेने का आरोप
डेविड का आरोप है कि वर्ष 2019-20 और 2020-21 में यूपीएलसी के माध्यम से उसकी कंपनी ने आगरा यूनिवर्सिटी की प्री व पोस्ट परीक्षा संचालित करायी। इसके बिल का भुगतान लंबित चल रहा था। प्रो. पाठक कानपुर विवि के कुलपति हैं। उन्होंने भुगतान के लिए डेविड को कानपुर स्थित आवास पर बुलाया और इसके एवज में कमीशन की मांग की। फिर अजय मिश्र के जरिए तीन बार में एक करोड़ 41 लाख बतौर कमीशन लिए। फिर डेविड से आगरा विवि में परीक्षा संचालन का काम देने के लिए 10 लाख रुपये की मांग की गई। यह कहने पर की वहां तो अब दूसरी कुलपति हैं। इस पर प्रो. पाठक की ओर से कहा गया कि अब काम नहीं मिल पाएगा और वहां का काम यूपीडेस्को के जरिए अजय मिश्र की कंपनी को दे दिया गया।
कई बार नोटिस के बाद भी नहीं हुए हाजिर
एसटीएफ पूछताछ के लिए प्रो. पाठक को कई बार नोटिस जारी कर चुकी है, लेकिन वह हाजिर नहीं हुए। इस पर जांच एजेंसी कोर्ट में अर्जी लगाकर गैर जमानती वारंट जारी कराने की जुगत में लग गई थी। इस बीच सरकार ने प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश कर दी है।