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सपने देखकर डरने वाली लड़कियां पढ़ें ये खबर

Sat, 20 Jun 2015 04:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 20 Jun 2015 04:50 PM IST
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cause and symptoms of PSOD

तनाव, अनिद्रा और नींद में सपनों के अचानक टूटने से महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरियन डिजीज (पीसीओडी) तेजी से बढ़ रही है। महिलाओं में इस बीमारी की वजह से गर्भावस्था को लेकर परेशानियां रहती हैं।

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समय पर इलाज न हुआ तो संतान सुख मिलना मुश्किल होता है। इस बीमारी से महिलाओं को दूर रखने के लिए राजधानी में एक निजी संस्थान को शोध की अनुमति मिली है।

महिलाओं पर आने वाले दो साल में शोध रिपोर्ट को सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन होम्योपैथी दिल्ली को भेजा जाएगा जहां इस बीमारी के बेहतर इलाज के लिए कदम उठाए जाएंगे। रिसर्च प्रोग्राम का उद्घाटन शुक्रवार को मुख्य सचिव आलोक रंजन ने किया।
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मुख्य सचिव ने कहा कि होम्योपैथी इलाज का लाभ हर किसी को मिले इसके लिए प्रदेश में होम्योपैथी मेडिकल यूनिवर्सिटी जल्द खोली जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार शोध से ही संभव है। इसके लिए सभी चिकित्सकों को आगे आना होगा।

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हार्मोन्स के असंतुलन से नुकसान

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कार्यक्रम में डॉ. गिरीश गुप्ता ने बताया कि महिलाओं में इस तरह की बीमारी तनाव, अनिद्रा और सपनों के टूटने से हार्मोन्स के असंतुलन के कारण होती है।

उन्होंने बताया कि सोते वक्त सपने देखने के दौरान अचानक डर जाना या घबरा जाना इसका सबसे बड़ा कारण है। इस वजह से न्यूरोट्रांसमीटर्स में हरकत होती है, पिटुटरी ग्लैंड एक्टिवेट होता है और हार्मोन्स सक्रिय हो जाते हैं।

तनाव से भी हार्मोन्स डिस्टर्व होते हैं और महिलाएं इस तरह की समस्या की चपेट में आ जाती हैं। देश में 20 फीसदी महिलाएं इसकी चपेट में हैं और ओपीडी में रोजाना आठ से दस मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।

कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. एससी राय और महापौर डॉ. दिनेश शर्मा, डॉ. आरसी यादव समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।

जानें क्या है पीसीओडी

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शोध टीम में शामिल डॉ. ऋचा सिंह ने बताया कि शोध के लिए पीसीओडी से पीड़ित 50 महिलाओं का चयन किया जाएगा। टीम दो साल तक सभी चयनित महिलाओं के इलाज पर शोध करेगी।

इसके तहत उनकी अल्ट्रॉसाउंड, पैथोलॉजी जांच से लेकर अन्य दवाएं पूरी तरह मुफ्त में दी जाएंगी। सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन होम्योपैथी दिल्ली की ओर से शोध के लिए कुल करीब 18 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं।

इसका पहला किस्त करीब 9 लाख रुपया जारी हो गया है। इस शोध में डायबिटीज और हृदय रोगी के साथ गर्भवती को शामिल नहीं किया जाएगा।


पॉलीसिस्टिक ओवरियन डिजीज से पीड़ित महिला की ओवरी में सिस्ट बन जाती है। इसका प्रमुख कारण गर्भधारण के लिए बनने वाला अंडाशय का आकार नहीं लेना है। सिस्ट ओवरी की सतह पर चिपकता रहता है और माला का आकार ले लेता है।
 
इस तरह की समस्या के बाद महिला का वजन, मोटापा और हार्मोनल इंबैलेंस की वजह से शरीर पर अधिक मात्रा में बाल उगने लगते हैं और शरीर का आकार भी पुरुषों की तरह होने लगता है। इस वजह से नींद न आना, चिड़चिड़ापन जैसी समस्या रहती है।

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