{"_id":"59a7b5254f1c1b16278b49d1","slug":"case-of-communal-riot-on-yogi-adityanath","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोरखपुर में हुए सांप्रदायिक दंगे पर वकील की दलील, योगी पर चलना चाहिए मुकदमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोरखपुर में हुए सांप्रदायिक दंगे पर वकील की दलील, योगी पर चलना चाहिए मुकदमा
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 31 Aug 2017 01:41 PM IST
विज्ञापन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर में 2007 में हुए सांप्रदायिक दंगे के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इंकार संबंधी आदेश को याची के वकील ने अवैधानिक बताया है।
इस पर संदेह जताते हुए अधिवक्ता ने कहा कि गृह सचिव को अभियोजन स्वीकृति पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। यूपी बिजनेस रूल्स में यह अधिकार मुख्यमंत्री या राज्यपाल को है।
मुख्यमंत्री स्वयं के प्रकरण में निर्णय ले नहीं सकते और राज्यपाल ने आदेश जारी नहीं किया। अधिवक्ता एसएफए नकवी का कहना था कि इस मामले में चार मई को हुई सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार के अधिवक्ता ने अभियोजन स्वीकृति पर जानकारी देने के लिए समय की मांग की थी, बाद की सुनवाई में कोर्ट को बताया कि तीन मई को अभियोजन स्वीकृति देने संबंधी आदेश जारी कर दिया गया था।
विज्ञापन
इससे ऐसा लगता है कि यह आदेश बैक डेट में किया गया है। यदि तीन मई को ही आदेश हुआ होता तो चार मई को इसे कोर्ट को बताया जा सकता था। अधिवक्ता का कहना है कि आज के समय में मौजूद संचार माध्यम से एक सेकेंड में कोई भी बात पूरी दुनिया में पहुंचाई जा सकती है तो फिर लखनऊ में हुए आदेश की जानकारी इलाहाबाद में कैसे नहीं हुई। याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
विज्ञापन
इस पर संदेह जताते हुए अधिवक्ता ने कहा कि गृह सचिव को अभियोजन स्वीकृति पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। यूपी बिजनेस रूल्स में यह अधिकार मुख्यमंत्री या राज्यपाल को है।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री स्वयं के प्रकरण में निर्णय ले नहीं सकते और राज्यपाल ने आदेश जारी नहीं किया। अधिवक्ता एसएफए नकवी का कहना था कि इस मामले में चार मई को हुई सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार के अधिवक्ता ने अभियोजन स्वीकृति पर जानकारी देने के लिए समय की मांग की थी, बाद की सुनवाई में कोर्ट को बताया कि तीन मई को अभियोजन स्वीकृति देने संबंधी आदेश जारी कर दिया गया था।
विज्ञापन
इससे ऐसा लगता है कि यह आदेश बैक डेट में किया गया है। यदि तीन मई को ही आदेश हुआ होता तो चार मई को इसे कोर्ट को बताया जा सकता था। अधिवक्ता का कहना है कि आज के समय में मौजूद संचार माध्यम से एक सेकेंड में कोई भी बात पूरी दुनिया में पहुंचाई जा सकती है तो फिर लखनऊ में हुए आदेश की जानकारी इलाहाबाद में कैसे नहीं हुई। याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।