{"_id":"658865ea69ca6c9ffe0a98b6","slug":"case-filed-against-six-former-officials-of-electricity-service-commission-for-irregularities-in-promotion-2023-12-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow : प्रोन्नति में अनियमितता के मामले में विद्युत सेवा आयोग के पांच पूर्व अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow : प्रोन्नति में अनियमितता के मामले में विद्युत सेवा आयोग के पांच पूर्व अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर
Mon, 25 Dec 2023 12:39 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 25 Dec 2023 12:39 AM IST
सार
उप्र विद्युत सेवा आयोग में करीब 20 साल पहले हुए प्रोन्नति घोटाले में उप्र सतर्कता अधिष्ठान ने आयोग के पांच पूर्व अधिकारियों समेत परीक्षा लेने वाली कंपनी की संचालिका के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया है।
विज्ञापन
Lucknow News : मुकदमा दर्ज।
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उप्र विद्युत सेवा आयोग में करीब 20 साल पहले हुए प्रोन्नति घोटाले में उप्र सतर्कता अधिष्ठान ने आयोग के पांच पूर्व अधिकारियों समेत परीक्षा लेने वाली कंपनी की संचालिका के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया है। विजिलेंस ने इन अधिकारियों के खिलाफ यह कार्रवाई नियमों को ताक पर रखकर परिचालकीय संवर्ग के कर्मचारियों (टीजी-2) को अवर अभियंता के पद पर पदोन्नति दिए जाने के मामले में की है।
विज्ञापन
जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, उनमें विद्युत सेवा आयोग के तत्कालीन उप सचिव राजेश कुमार (आरके राम), उप महाप्रबंधक व सदस्य लालचंद्र व वीसी जोशी, अधिशासी अभियंता बीके श्रीवास्तव व आलोक वर्मा तथा परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी मेसर्स डाटा प्वाइंट की संचालिका सरिता मिश्रा शामिल हैं। वहीं इस अनियमितता में शामिल रहे विद्युत सेवा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष सुधीर कुमार शर्मा, सचिव गोपाल राम का निधन हो चुका है।
विज्ञापन
विजिलेंस के लखनऊ सेक्टर थाने में दर्ज कराए गए मुकदमे के मुताबिक उप्र पावर कॉरपोरेशन के विद्युत सेवा आयोग के माध्यम से 2004 में परिचालकीय कर्मचारियों को अवर अभियंता के 863 रिक्त पदों पर पदोन्नति दी गई थी। इसके लिए प्रदेश में छह केंद्रों पर लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी।
विज्ञापन
परीक्षा में कई स्तरों पर गड़बड़ी की शिकायतें हुई थी। इसी आधार पर इस मामले की जांच विजिलेंस को सौंपी गई थी। मुकदमे में बताया गया है कि परीक्षा की ओएमआर सीट की डिजाइन में नियमों की अनदेखी की गई थी और इसका सत्यापन करने वाले कई अधिकारियों ने मिलकर परीक्षा की शुचिता को भंग किया है। प्राथमिकी में यह भी बताया गया है कि कई योग्य अभ्यर्थियों के स्थान पर अयोग्य लोगों को उत्तीर्ण घोषित कर उनका चयन किया गया है।