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Lucknow News: लविवि में बनेगा केस सेंटर, शोध से कक्षाओं तक पहुंचेगा ज्ञान
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माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ाई को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने के लिए केस सेंटर स्थापित करने की योजना तैयार की गई है। इसका लक्ष्य विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान देना है। सेंटर अगले तीन वर्षों में हर साल 10 से 15 नई केस स्टडी तैयार करेगा।
ये केस स्टडी विभिन्न क्षेत्रों की वास्तविक घटनाओं, संस्थाओं की चुनौतियों और सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर आधारित होंगी। सेंटर शिक्षकों के शोध, परामर्श और क्षेत्रीय अनुभव को व्यवस्थित तरीके से शिक्षण सामग्री में बदलेगा। इससे विद्यार्थियों को स्थानीय परिस्थितियों और मौजूदा चुनौतियों पर आधारित अध्ययन सामग्री मिलेगी। विभिन्न विषयों के शिक्षक एक साझा संग्रह से केस स्टडी का उपयोग कर सकेंगे। विश्वविद्यालय के बाहर के शिक्षक और शोधार्थी भी अकादमिक उपयोग के लिए अपनी केस स्टडी जमा कर सकेंगे।
समीक्षा के बाद ही मिलेगी मंजूरी
प्रस्ताव के अनुसार, केस स्टडी तैयार करने के लिए आठ चरणों की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पहले चरण में लेखक को एक पृष्ठ का प्रस्ताव देना होगा। इसमें अध्ययन का विषय, शिक्षण में उसकी उपयोगिता, संबंधित पाठ्यक्रम और आंकड़े जुटाने की योजना बतानी होगी। इसके बाद केस सेंटर के निदेशक और संचालन समिति प्रस्ताव की उपयुक्तता की जांच करेंगे। स्वीकृति मिलने पर लेखक क्षेत्रीय अध्ययन, साक्षात्कार और आंकड़ों के आधार पर केस स्टडी तैयार करेगा। संबंधित संस्था की सहमति लेने के बाद इसे दो समीक्षकों के पास भेजा जाएगा। वे इसकी उपयोगिता का आकलन करेंगे। इसके बाद कम से कम एक बार कक्षा में इसका परीक्षण किया जाएगा। प्राप्त सुझावों के आधार पर संशोधन और अंतिम मंजूरी के बाद केस स्टडी को विवि के आंतरिक संग्रह में शामिल किया जाएगा।
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लेखकों को मिल सकता है राजस्व का 20 प्रतिशत
प्रस्ताव में केस सेंटर के लिए प्रशासनिक सहायता, संपादन, ऑनलाइन संग्रह के लिए सर्वर या क्लाउड शुल्क, शिक्षकों के प्रशिक्षण, कानूनी समीक्षा और प्रकाशन व वितरण जैसे मदों पर बजट तैयार करने की बात कही गई है। भविष्य में केस स्टडी के लाइसेंस आधारित उपयोग के लिए शुल्क भी निर्धारित किया जा सकता है। प्रस्ताव के अनुसार, इससे होने वाली आय का 20 प्रतिशत हिस्सा लेखक या सहलेखकों को दिया जा सकेगा। इसके लिए संबंधित अधिकारियों की मंजूरी जरूरी होगी।
अकादमिक नवाचार को मिलेगा नया आयाम
केस सेंटर का उद्देश्य पारंपरिक शिक्षण को जमीनी हकीकत और व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ना है। शिक्षकों और शोधार्थियों के शोध व परामर्श कार्यों को प्रामाणिक केस स्टडी में बदलकर कक्षाओं तक पहुंचाया जाएगा। इससे विद्यार्थियों की विश्लेषणात्मक क्षमता बढ़ेगी और वे वास्तविक समस्याओं के समाधान सीख सकेंगे। यह पहल शोध आधारित शिक्षण और अकादमिक नवाचार को एक नया आयाम देगी।- प्रो. मुकुल श्रीवास्तव, प्रवक्ता-लविवि
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ाई को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने के लिए केस सेंटर स्थापित करने की योजना तैयार की गई है। इसका लक्ष्य विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान देना है। सेंटर अगले तीन वर्षों में हर साल 10 से 15 नई केस स्टडी तैयार करेगा।
ये केस स्टडी विभिन्न क्षेत्रों की वास्तविक घटनाओं, संस्थाओं की चुनौतियों और सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर आधारित होंगी। सेंटर शिक्षकों के शोध, परामर्श और क्षेत्रीय अनुभव को व्यवस्थित तरीके से शिक्षण सामग्री में बदलेगा। इससे विद्यार्थियों को स्थानीय परिस्थितियों और मौजूदा चुनौतियों पर आधारित अध्ययन सामग्री मिलेगी। विभिन्न विषयों के शिक्षक एक साझा संग्रह से केस स्टडी का उपयोग कर सकेंगे। विश्वविद्यालय के बाहर के शिक्षक और शोधार्थी भी अकादमिक उपयोग के लिए अपनी केस स्टडी जमा कर सकेंगे।
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समीक्षा के बाद ही मिलेगी मंजूरी
प्रस्ताव के अनुसार, केस स्टडी तैयार करने के लिए आठ चरणों की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पहले चरण में लेखक को एक पृष्ठ का प्रस्ताव देना होगा। इसमें अध्ययन का विषय, शिक्षण में उसकी उपयोगिता, संबंधित पाठ्यक्रम और आंकड़े जुटाने की योजना बतानी होगी। इसके बाद केस सेंटर के निदेशक और संचालन समिति प्रस्ताव की उपयुक्तता की जांच करेंगे। स्वीकृति मिलने पर लेखक क्षेत्रीय अध्ययन, साक्षात्कार और आंकड़ों के आधार पर केस स्टडी तैयार करेगा। संबंधित संस्था की सहमति लेने के बाद इसे दो समीक्षकों के पास भेजा जाएगा। वे इसकी उपयोगिता का आकलन करेंगे। इसके बाद कम से कम एक बार कक्षा में इसका परीक्षण किया जाएगा। प्राप्त सुझावों के आधार पर संशोधन और अंतिम मंजूरी के बाद केस स्टडी को विवि के आंतरिक संग्रह में शामिल किया जाएगा।
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लेखकों को मिल सकता है राजस्व का 20 प्रतिशत
प्रस्ताव में केस सेंटर के लिए प्रशासनिक सहायता, संपादन, ऑनलाइन संग्रह के लिए सर्वर या क्लाउड शुल्क, शिक्षकों के प्रशिक्षण, कानूनी समीक्षा और प्रकाशन व वितरण जैसे मदों पर बजट तैयार करने की बात कही गई है। भविष्य में केस स्टडी के लाइसेंस आधारित उपयोग के लिए शुल्क भी निर्धारित किया जा सकता है। प्रस्ताव के अनुसार, इससे होने वाली आय का 20 प्रतिशत हिस्सा लेखक या सहलेखकों को दिया जा सकेगा। इसके लिए संबंधित अधिकारियों की मंजूरी जरूरी होगी।
अकादमिक नवाचार को मिलेगा नया आयाम
केस सेंटर का उद्देश्य पारंपरिक शिक्षण को जमीनी हकीकत और व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ना है। शिक्षकों और शोधार्थियों के शोध व परामर्श कार्यों को प्रामाणिक केस स्टडी में बदलकर कक्षाओं तक पहुंचाया जाएगा। इससे विद्यार्थियों की विश्लेषणात्मक क्षमता बढ़ेगी और वे वास्तविक समस्याओं के समाधान सीख सकेंगे। यह पहल शोध आधारित शिक्षण और अकादमिक नवाचार को एक नया आयाम देगी।- प्रो. मुकुल श्रीवास्तव, प्रवक्ता-लविवि