कोर्ट पहुंचा शिवसेना की ‘जहरीली भाषा’ का मामला
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आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने सोमवार को सीजेएम लखनऊ सुनील कुमार के समक्ष शिव सेना सांसद और सामना के संपादक संजय राउत और एमआईएम नेता अकबरुद्दीन ओवैसी के खिलाफ धारा 200 सीआरपीसी के अंतर्गत परिवाद दायर किया है।
परिवाद में कहा गया है कि संजय राउत ने जिस तरह 12 अप्रैल 2015 के सामना हिंदी दैनिक में ‘रोखटोक- मुंबई में ओवैसी की उछलकूद: सावधान बिल में संपोले हैं’ शीर्षक लेख में मुसलमानों का मताधिकार छिनने की बात कही है, यह धारा 153 (ए), 295 (ए), 298, 504, 505 (1) (बी) व (सी), 505 (2) आईपीसी के तहत अपराध हैं।
साथ ही लेख में ओवैसी ने जो बातें बताई हैं वो भी समान धाराओं के अंतर्गत अपराध है।
वादी के अधिवक्ता त्रिपुरेश त्रिपाठी ने आरोपों को बेहद गंभीर बताते हुए इन दोनों को न्यायालय में तलब कर उन्हें नियमानुसार दण्डित करने का अनुरोध किया।
इस पर सीजेएम ने परिवाद दर्ज करते हुए अमिताभ ठाकुर 25 अप्रैल को धारा 202 सीआरपीसी में अपना बयान दर्ज कराने के आदेश दिए।
क्या था मामला
कुछ महीने पहले हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में ओवैसी की पार्टी ने दो सीटों पर जीत हासिल की थी जिसे लेकर उद्धव ठाकरे ने विवादित बयान दिया।
उद्धव ठाकरे ने रविवार को कहा कि जो ताकतें हिंदुओं के लिए खतरनाक हैं वो हाल विधानसभा चुनावों में अपना सिर उठाया है।
इस पर सामना ने लिखा 'सावधान! बिल में संपोले हैं!!' इसके साथ ही सामना शिवसेना प्रमुख के उस बयान को सही बताया है जिसमें कहा गया था कि मुसलमानों से मतदान का अधिकार छीन लेना चाहिए।
सामना की इस खबर शिवसेना के सांसद संजय रावत ने सही ठहराया था।
इससे पहले कांग्रेस नेता सुशील कुमान शिंदे की बेटी प्रनीति शिंद ने भी बाहरी लोगों को महाराष्ट्र में बैन करने की बात कही थी जिसका शिवसेना ने समर्थन किया है।