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900 करोड़ फूंक डाले, कनेक्टिंग चैंबर तक नहीं बनाया

Tue, 27 Oct 2015 05:51 PM IST
Updated Tue, 27 Oct 2015 05:51 PM IST
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carelessness of water department in lucknow

वाह रे हमारा सिस्टम। जिस जोर-शोर से योजना बनाई, 900 करोड़ रुपये खर्च भी कर दिए, अब पता चला है कि योजना के मूल में ही गड़बड़ी थी। जिम्मेदार विभाग और उसके अफसर सोते रहे।

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लापरवाही हर स्तर पर होती रही। मामला सामने तब आया जब लोगों को इसकी सुविधा देने की तैयारी हुई। बात हो रही है जेएनएनयूआरएम की सीवर योजनाओं की। जल निगम ने शहर में सीवर लाइनें तो बिछा दीं, मगर जब घरों में कनेक्शन देने की बात उठी तो पता चला कि इसके लिए ‘कनेक्टिंग चैंबर’ तक नहीं बनाया गया।
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खोजबीन हुई तो यह सामने आया कि योजना के डीपीआर में ‘कनेक्टिंग चैंबर’ का प्रावधान ही नहीं था।
एक कनेक्टिंग चैंबर बनाने पर दो से तीन हजार रुपये का खर्च आता है, पर यह खर्च कोई भवन स्वामी उठाने को तैयार नहीं। जल निगम की गोमती प्रदूषण नियंत्रण इकाई के जीएम जुबैर अहमद का कहना है कि जेएनएनयूआरएम योजना में अब बजट नहीं है।
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अब जो भी काम रह गया है, उसे अटल मिशन योजना में शामिल करने का प्रस्ताव बनाया जाएगा। इसके लिए सभी प्रोजेक्ट इंचार्ज को निर्देश भी दिए गए हैं। इस विवाद के बाद सरकार ने विधायक अभिषेक मिश्रा के क्षेत्र जानकीपुरम और फैजुल्लागंज के लिए 20 करोड़ रुपये कनेक्टिंग चैंबर के लिए मंजूर भी किए हैं।

इससे 14000 कनेक्टिंग चैंबर बनेंगे। इसकी टेंडर प्रक्रिया भी जल निगम ने शुरू कर दी है। जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर डीएन यादव का कहना है कि सीवर लाइनों को चालू करने के लिए करीब 50,000 कनेक्टिंग चैंबर बनाने होगे।

अब विभाग ने खोज लिया ये नया रास्ता

carelessness of water department in lucknow

जलकल विभाग से सीवर कनेक्शन का ब्यौरा भी मांगा गया है। एक कनेक्टिंग चैंबर से दो से तीन घर ही जोड़े जा सकते हैं। चैंबर बनाने के लिए अब अटल मिशन योजना में प्रस्ताव बनाया जा रहा है। योजना से पैसा मिलने के बाद ही काम शुरू हो पाएगा। इसमें करीब छह महीने तो लगेंगे ही।

कनेक्टिंग चैंबर न होने से सीवर का कनेक्शन लोग नहीं ले रहे हैं। उपभोक्ता खुद खर्च वहन नहीं करना चाहते हैं। इसके कारण पुराने लखनऊ में दो साल में महज चार हजार कनेक्शन ही हो पाए हैं। खर्च का मसला उठा तो पता चला कि डीपीआर में कनेक्टिंग चैंबर का प्रावधान ही नहीं किया गया था। जिन लाइनों की जांच पूरी हो गई उनको चालू किया जा रहा है।
राजीव बाजपेई, जीएम जलकल

कनेक्टिंग चैंबर का प्रावधान तो डीपीआर में ही नहीं था
जहां पर न्यायालय का विवाद है, वहीं कुछ काम नहीं हो पाए है। करीब 95 प्रतिशत काम हो गया है। कनेक्टिंग चैंबर बनने के बाद सीवर लाइन शुरू हो जाएगी। अभी जानकीपुरम और फैजुल्लागंज के लिए प्रदेश सरकार ने 20 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। योजना पुरानी है इसलिए यह नहीं बता सकता कि कनेक्टिंग चैंबर का प्रावधान योजना में क्यों नहीं किया गया।

जुबैर अहमद, जीएम गोमती प्रदूषण नियंत्रण जल निगम

जल निगम को तभी मांगना चाहिए था पैसा

यदि जल निगम उसी समय सरकार से कनेक्टिंग चैंबर का बजट मांग लेता तो यह समस्या ही नहीं आती। अभी जल निगम को प्रदेश सरकार से इसके लिए बजट मिला भी है। पहले की योजना है उस समय कनेक्टिंग चैंबर के लिए बजट क्यों नहीं लिया, कुछ कह नहीं सकता।
उदयराज सिंह, नगर आयुक्त

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