मरीज की नस काटी, चले गए प्रेस कॉन्फ्रेंस करने, मौत
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केजीएमयू से संवेदनहीनता की एक से बढ़कर एक कहानियां सामने आ रही हैं। ताजा मामला एक युवती का सामने आया है। इस युवती के फेफडे़ में ट्यूमर था। 29 जुलाई को ऑपरेशन शुरू हुआ। पर फेफड़े की धमनी कट गई।
खून बहता रहा और पर कार्डियो वैस्कुलर थोरेसिक सर्जरी विभाग के ऑपरेशन टीम के डॉक्टर 18 मरीजों की मौत के खुलासे के लिए दस्तावेज जुटाने और प्रेस कॉन्फ्रेंस में मस्त रहे। दो रेजिडेंट बहता खून रोकने की मशक्कत करते रहे, पर कामयाब नहीं हुए।
मरीज की हालत नहीं संभली तो उसे आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया, जहां कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। ये दर्द भरी कहानी है जानकीपुरम सेक्टर-जे के शब्बीर की बेटी शाहीन (16) की। उसे सीने में दर्द और सांस लेने में दिक्कत थी।
केजीएमयू के रिकॉर्ड के मुताबिक 9 जुलाई को शाहीन को भर्ती कराया गया। 29 जुलाई को सुबह 10 बजे शाहीन को सीटीवीएस ओटी में शिफ्ट किया गया। एनेस्थेसिया देने के बाद ट्यूमर निकालने के लिए ऑपरेशन शुरू हुआ।
इसी दौरान फेफड़े के आसपास की धमनी कट गई। पर खुलासे का वक्त हो चला था। ऑपरेशन टीम में शामिल विभाग के सीनियर डॉक्टरों ने दो रेजिडेंट और स्टाफ नर्स को मरीज को मैनेज करने की जानकारी देकर दोपहर करीब 12 बजे ओटी ड्रेस में ही विभागाध्यक्ष डॉ. शेखर टंडन के कमरे में पहुंच गए।
मरीज के शरीर से लगातार बह रहा था खून
शाहीन के ऑपरेशन टीम में शामिल हेड और दोनों डॉक्टर पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एसके सिंह के समय हुई 18 मौतों की परतें खोल रहे थे, तो दूसरी ओर शाहीन के शरीर से खून बहता रहा।
करीब पौने तीन बजे सभी डॉक्टर विभाग के काले कारनामों का खुलासा करने के बाद ओटी में पहुंचे तो शाहीन की हालत देख उनके पसीने छूट गए।
आनन-फानन में ऑपरेशन टीम में शामिल डॉक्टरों ने इंडोट्रैक्यिल ट्यूब डालकर दोपहर तीन बजे सीटीवीएस विभाग के आईसीयू में शिफ्ट कर दिया।
ये घटना अपने आप में इसलिए बेहद शर्मनाक है, क्योंकि ओटी के समय मरीज की जिंदगी से ज्यादा डॉक्टरों ने आपसी लड़ाई में खुलासे में दिलचस्पी दिखाई।
जबकि नियम कहता है कि ओटी के समय डॉक्टरों को हर हाल में ओटी के भीतर होना चाहिए, लेकिन तीन डॉक्टर ओटी के बाहर मौजूद थे और बार-बार आवाजाही कर रहे थे।
शाहीन की मौत होते ही जिम्मेदार डॉक्टर अपनी गर्दन बचाने में जुट गए। परिवारीजन बिफरे तो उन्हें समझा-बुझाकर मामला शांत करा लिया गया। आखिर परिवारीजन शव लेकर घर चले गए।
विभागाध्यक्ष डॉ. शेखर टंडन सफाई देते हैं कि शाहीन को लंग्स में ट्यूमर की वजह से कई गैर जरूरी नसें बन गई थीं। सर्जरी के दौरान इन्हीं में से एक नस को नुकसान पहुंचा। इस वजह से रक्तस्राव अधिक हो गया और मरीज शॉक में चली गई जो उसकी मौत का कारण बना।
ओटी टेबल पर रक्तस्राव होने के बाद बीपी पहुंच गया 50/70
मौत पर विभागाध्यक्ष डॉ. शेखर टंडन से सीधी बात
शाहीन को क्या समस्या थी?
29 जुलाई को सुबह दस बजे शाहीन को लंग्स में ट्यूमर की समस्या से निजात दिलाने के लिए ओटी में शिफ्ट किया गया था। ऑपरेशन शुरू हुआ तभी तेज रक्तस्राव होने लगा।
रक्तस्राव बढ़ा तो क्या किया गया?
एमसीएच कर चुके दो सीनियर रेजिडेंट को मरीज को मैनेज करने के लिए कहा गया। गरम पानी के पैकेट की मदद से रक्तस्राव को बंद करने की कोशिश की गई। दो रेजिडेंट गरम पानी का पैकेट लेकर नस को घंटों दबाए रहे, लेकिन खून बहना बंद नहीं हुआ। थोड़ी देर बाद मरीज हेमोरेजिक शॉक में चली गई।
ऑपरेशन टीम के डॉक्टर ओटी के समय प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्यों थे?
ऑपरेशन टीम में शामिल डॉक्टर प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसलिए थे, क्योंकि मरीज की स्थिति ऑपरेशन लायक नहीं थी। इंडोट्रेक्यिल ट्यूब डालकर शाहीन आईसीयू में शिफ्ट किया गया जहां उसकी मौत हो गई।
क्या ये लापरवाही की इंतहा नहीं?
इसमें कोई लापरवाही नहीं बरती गई। कुछ केसेज में इस तरह की घटनाएं हो जाती हैं।