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यूपी के सबसे बड़े अस्पताल में डॉक्टरों का कारनामा, रोगी को पेसमेकर तो लगाया पर तार जोड़ना ही भूल गए
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 26 Mar 2018 02:53 PM IST
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- फोटो : डेंमो
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दिल की सर्जरी करने के बाद डॉक्टर ने पेसमेकर लगाया, लेकिन उसके वायर जोड़ना भूल गए। ऑपरेशन के अगले दिन जब मरीज की जांच हुई तो सच सामने आया। आननफानन डॉक्टरों ने दोबारा ऑपरेशन किया और पेसमेकर का तार जोड़ा।
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चौंकाने वाला यह मामला कोई छोटे-मोटे या निजी अस्पताल का नहीं, बल्कि प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान केजीएमयू के लॉरी कार्डियोलॉजी का है। सच सामने आने पर गलती मानने के बजाय डॉक्टरों ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताया।
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दरअसल पद्मश्री अनवर जलालपुरी के बेटे शाहयार जलालपुरी को हृदय संबंधी परेशानी होने पर बीते शुक्रवार को लॉरी कार्डियोलॉजी में भर्ती कराया गया था।
जांच में पता चला कि उनके दिल में ब्लॉकेज है, इस वजह से धड़कन सामान्य नहीं थी। डॉक्टर शरद चंद्रा की टीम ने मरीज को करीब 1.81 लाख रुपये का पेसमेकर मंगवाकर लगवाया।
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दोबारा ऑपरेशन कर लगाया पेसमेकर
डेमो
सर्जरी के बाद भी मरीज की धड़कन सामान्य नहीं हुई, मरीज को आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। शनिवार की सुबह सीनियर डॉक्टरों ने जब मरीज का चेकअप किया तो पाया कि दिल सामान्य गति से काम नहीं कर रहा था।
दोबारा जांच कराई गई तो पाया गया कि इलेक्ट्रोड का वायर हार्ट से नहीं जुड़ा था। दोबारा ऑपरेशन कर पेसमेकर लगाया गया। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन जब शाहयार जलालपुरी का हाल लेने पहुंचे तो परिवारीजनों ने आपबीती सुनाई। उन्होंने डॉ. शरद चंद्रा से मिलकर बेहतर इलाज मुहैया कराने को कहा।
'मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है, इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई है। कई दफा पेसमेकर वायर हार्ट में सही तरह से नहीं लग पाते हैं। ऐसे में दोबारा लगाना पड़ता है। यह सामान्य प्रक्रिया है।' - डॉ. शरद चंद्रा, लॉरी कार्डियोलॉजी
दोबारा जांच कराई गई तो पाया गया कि इलेक्ट्रोड का वायर हार्ट से नहीं जुड़ा था। दोबारा ऑपरेशन कर पेसमेकर लगाया गया। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन जब शाहयार जलालपुरी का हाल लेने पहुंचे तो परिवारीजनों ने आपबीती सुनाई। उन्होंने डॉ. शरद चंद्रा से मिलकर बेहतर इलाज मुहैया कराने को कहा।
'मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है, इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई है। कई दफा पेसमेकर वायर हार्ट में सही तरह से नहीं लग पाते हैं। ऐसे में दोबारा लगाना पड़ता है। यह सामान्य प्रक्रिया है।' - डॉ. शरद चंद्रा, लॉरी कार्डियोलॉजी