छावनी परिषद चुनाव में भाजपा की करारी हार!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
छावनी परिषद के चुनावों में भाजपा को प्रदेश भर में करारा झटका लगा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र लखनऊ के कैंट बोर्ड में भी भाजपा समर्थित कोई प्रत्याशी नहीं जीत सका।
लखनऊ छावनी परिषद के आठ वार्डों में से सात में भाजपा ने अपने समर्थन से प्रत्याशी उतारे थे लेकिन सभी हार गए। इसी तरह मोदी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी कैंट की भी सभी सात सीटों पर भाजपा को करारी हार मिली।
प्रदेश के अन्य बोर्डों में भी भाजपा की हालत खराब ही रही। केवल कानपुर के चुनाव नतीजों से पार्टी को थोड़ी राहत मिली, जहां उसके प्रत्याशी आठ में से चार वार्डों में जीत सके। आगरा कैंट की आठ सीटों में से एक पर कमल खिल सका। मथुरा की 7 सीटों में से भाजपा को दो।
झांसी में 7 में से भाजपा को 3, बबीना की सात सीटों में से भाजपा को एक। बरेली की 7 सीटों में भाजपा को 3, इलाहाबाद की 7 सीटों में से भाजपा को एक, फैजाबाद की 7 सीटों में से भाजपा को 2 पर जीत मिली। प्रदेश के 13 कैंट बोर्डों में से 12 में चुनाव हुए। मेरठ में चुनाव नहीं हुआ।
भाजपा ने वाराणसी, इलाहाबाद, आगरा, मथुरा, फतेहगढ़, झांसी, बबीना और बरेली में अपने सिंबल पर चुनाव लड़ा जबकि लखनऊ, फैजाबाद, कानपुर और शाहजहांपुर में प्रत्याशियों का समर्थन किया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने हार स्वीकार हुए कहा कि पार्टी समीक्षा करेंगी कि चूक कहां हुई।
56 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले
छावनी परिषद के चुनाव में 56 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले। मतदाताओं में सबसे ज्यादा जोश वार्ड संख्या एक में दिखा जहां 63 फीसदी वोटरों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। तोपखाना बाजार और केंद्रीय विद्यालय दिलकुशा सहित कुछ मतदान केंद्रों पर शाम पांच बजे के बाद तक मतदाताओं की लंबी लाइन लगी रही।
छावनी परिषद के आठ वार्डों के लिए 49 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। इनमें 21 महिलाएं और 28 पुरुष प्रत्याशियों के भाग्य आजमाने चुनावी रणभूमि में उतरे थे।
छावनी के 38,160 मतदाताओं में से 56 प्रतिशत ने इसमें हिस्सा लिया। आठ में से पांच वार्डों में मतदान 50 प्रतिशत से अधिक रहा। हालांकि पिछली बार जब वर्ष 2008 में चुनाव हुए थे तो मई का महीना था। 14 मई को वोट डाले गए थे और तब 58 फीसदी वोट पड़े थे। इस बार ठंड के लिहाज से देखा जाए तो मतदाताओं ने ज्यादा जोश दिखाया।