राज्यसभा चुनाव: जानें, कौन होंगे सपा के प्रत्याशी?
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राज्यसभा की दस सीटों के चुनाव के लिए सपा जल्द ही प्रत्याशियों की घोषणा करेगी। पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव का राज्यसभा में जाना तय है। इसके अलावा पूर्व मंत्री अशोक वाजपेयी और पूर्व सांसद नीरज शेखर भी राज्यसभा में भेजे जा सकते हैं। जातीय समीकरण साधते हुए पूर्व मंत्री चंद्रपाल यादव, पूर्व मंत्री रविप्रकाश वर्मा और जावेद अली खान को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। सपा अपने बूते राज्यसभा की छह सीटें जीतने की स्थिति में है।
इन सीटों के लिए प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया चल रही है। सपा मुखिया मुलायम सिंह ने मंगलवार को इस संबंध में रामगोपाल यादव और अखिलेश यादव से चर्चा भी की। यूं तो राज्यसभा के टिकट के लिए तमाम नाम चर्चा में है लेकिन पार्टी सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखकर प्रत्याशी चुनने पर जोर दे रही है।
कोशिश है कि सवर्ण, पिछड़े, मुस्लिम सभी को प्रतिनिधित्व मिल जाए। रामगोपाल फिर से राज्यसभा में जाएंगे, इसे लेकर कोई संशय नहीं है। पूर्व मंत्री अशोक वाजपेयी और नीरज शेखर को भी सपा वहां भेज सकती है।
वाजपेयी पिछले लोकसभा चुनाव में लखनऊ से सपा प्रत्याशी बनाए गए थे लेकिन आखिरी वक्त पर उनका टिकट काट दिया गया। वह पार्टी के महासचिव हैं, अनुभवी नेता और समाजवादी ब्राह्मण चेहरा भी हैं। नीरज शेखर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र हैं। वह बलिया से लोकसभा चुनाव हार गए थे। चंद्रशेखर और मुलायम के रिश्ते हमेशा मधुर रहे हैं। उन्हीं रिश्तों को आगे बढ़ाते हुए सपा उन्हें राज्यसभा में भेजकर राजपूत समाज को भी संदेश दे सकती है।
योग्यता को देखकर इन पर होगा निर्णय
पिछड़े वर्ग से पूर्व सांसद चंद्रपाल यादव को प्रत्याशी बनाया जा सकता है। वह सपा सुप्रीमो के काफी नजदीकी हैं और झांसी से पिछला चुनाव हार गए थे। पिछड़े वर्ग से दूसरे प्रत्याशी रवि प्रकाश वर्मा हो सकते हैं। वह लखीमपुर खीरी के पूर्व सांसद हैं और इस साल लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। उन्हें कुर्मी बिरादरी में अच्छी साख वाला नेता माना जाता है।
मुस्लिम चेहरे के रूप में जावेद अली खान को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। जावेद संभल लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाए गए थे। आखिरी वक्त में उनका टिकट काटकर शफीकुर्रहमान बर्क को उतार दिया गया था।
1984 में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे जावेद को अच्छा संगठनकर्ता माना जाता है। ठाकुरद्वारा सीट से वह एक बार विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं।
पिछले दिनों राजधानी के इंदिरा प्रतिष्ठान में जामिया बिरादरी का सम्मेलन कराने में उनकी अहम भूमिका रही। इस आयोजन में मुख्यमंत्री लगभग दो घंटे तक मौजूद रहे थे।