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वोट उसी को देंगे जो दरवाजे तक आएगा, वोटर्स को नहीं भा रहा हाईटेक प्रचार

Mon, 13 Feb 2017 03:01 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Mon, 13 Feb 2017 03:01 PM IST
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डेमो

इसे आयोग की सख्ती कहिए या फिर बदलते परिप्रेक्ष्य में तकनीक का सहारा। विधानसभा चुनाव में प्रचार का तौर-तरीका बिल्कुल बदला हुआ सा है। पार्टी दफ्तर को छोड़ कर राजधानी में न तो कहीं बैनर-पोस्टर नजर आ रहे हैं, न ही नुक्कड़ सभाओं में किसी पार्टी-प्रत्याशी की रुचि नजर आ रही है।

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दरअसल इस बार राजनीतिक पार्टियां प्रचार के लिए सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव हैं। फेसबुक-वॉट्सएप पर चुनावी चकल्लस जारी है। इसके अलावा लाउस्पीकर, ई-रिक्शे का इस्तेमाल भी पार्टियां कर रही हैं।
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कैंट में काफी तलाश के बाद तीन अलग-अलग पार्टियों के गिने-चुने झंडे और पोस्टर ही दिखे। कैंट से सपा-कांग्रेस गठबंधन से मुलायम की बहू अपर्णा यादव, भाजपा से रीता बहुगुणा जोशी और बसपा से योगेश दीक्षित मैदान में हैं।
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चाय की दुकानों पर होने वाली चुनावी चकल्लस इस बार सोशल मीडिया पर नजर आ रही है। रोज नए-नए वॉट्स ग्रुप बना कर लोगों को जोड़ा जा रहा है। हर कोई अपने-अपने स्तर से प्रत्याशियों को जिताने की अपील कर रहा है।

इसी तरह एफबी पोस्ट पर भी नए-नए अंदाज में चुनावी पोस्ट की भरमार है। सभी प्रमुख पार्टियां वीडियो, फोटो और मैसेज को अलग तरीके से सोशल मीडिया के जरिए वोटरों में सर्कुलेट कर रही हैं।

फोन से भी मांग रहे वोट

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डेमो

प्रत्याशी फोन पर भी लोगों से वोटर मांग रहे हैं। रिकॉर्डेड कॉल हर एक वोटर तक जा रही है। यह अलग बात है कि उत्तरी क्षेत्र के उम्मीदवार का फोन मध्य के वोटर के पास जा रहा है। जबकि मध्य के प्रत्याशी का फोन कैंट के मतदाता तक पहुंच रहा है।

जैसे-जैसे लखनऊ में चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे डोर टू डोर कैंपेन तेज हो रहे हैं। कैंट में कई इलाके ऐसे हैं, जहां भाजपा और बसपा के उम्मीदवार वोटरों के बीच एक से अधिक बार पहुंच चुके हैं।

 

 

जबकि सपा उम्मीदवार को कैंट की गलियां रास नहीं आ रही हैं।वजह जो भी हो वोटरों का मानना है कि जो वोट मांगने में भी गलियों से परहेज कर रहा हो वह चुनाव जीतने के बाद कितना दिखेगा? वोट मांगने का नया तौर तरीका पुरानी पीढ़ी को पसंद नहीं आ रहा है।
 

गीतापल्ली में कपड़ों की सिलाई करने वाले फारूक का कहना है कि वह तो उसी को वोट देंगे जो उनके दरवाजे पर आएगा। फोन, फेसबुक व वाट्स एप पर वोट मांगने वालों को वोट मैं नहीं दूंगा।
 

मिठाई की दुकान चलाने वाले सुभाष शर्मा का कहना है कि जब तक चुनाव का शोर ना सुनाई दे तब तक लगता नहीं की क्षेत्र में चुनाव भी हो रहा है। इस बार शोर काफी कम है।
 

यहां सपा छोड़कर दूसरे कई प्रत्याशी अपने प्रचार के लिए आ चुके हैं। बसपा ने हर क्षेत्र में अपना ऑफिस खोला हुआ है। भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में रीता बहुगुणा हाई टेेक प्रचार के साथ साथ डोर टू डोर कैंपेन में पीछे नहीं हैं।

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