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अगर बात करते-करते आपका फोन भी डिसकनेक्ट हो जाता है तो पढ़ें ये खबर
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Wed, 14 Dec 2016 02:52 PM IST
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- फोटो : getty
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अक्सर पीक ऑवर्स यानी सुबह नौ से साढ़े दस बजे और शाम चार से छह बजे के बीच कॉल ड्रॉप या कॉल जंपिंग की समस्या कोई इत्तेफाक नहीं, इसके पीछे तकनीकी खराबी के साथ मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों की मनमानी भी बड़ी वजह मानी जा रही है।
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सेवा प्रदाता ऑपरेटर मोबाइल स्विचिंग सेंटर के जरिये मोबाइल नंबरों को आपस में जोड़ने वाले नेटवर्क सिग्नल को पीक ऑवर में जानबूझ कर कमजोर कर कॉल ड्राप, कॉल जंपिंग व कॉल रिजेक्ट जैसी परेशानियां पैदा कर इसका फायदा अपनी कस्टमर संख्या बढ़ाने में उठाते हैं।
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इस खेल में नुकसान रोजाना लाखों आम उपभोक्ताओं का होता है। बिना कॉल हुए बैलेंस कट जाता है। ट्राई के कड़े निर्देश बाद भी कमजोर नेटवर्क सिग्नल की आड़ में कॉल ड्रॉप से कस्टमरों को छुटकारा नहीं मिल पा रहा।
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मोबाइल ऑपरेटरों के सिग्नल रिसीव करने वाले बेस ट्रांस रिसीवर स्टेशन (बीटीएस) टावर का जोन बंटा होता है। एक से दूसरे जोन में जाने पर सिग्नल कमजोर हो सकते हैं, इसी दौरान कनेक्टिविटी की दिक्कत भी आती है।
मुसीबत बनती दूसरे नेटवर्क पर कॉल
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निजी ऑपरेटरों का अपने बीटीएस टॉवर पर पूरा नियंत्रण रहता है। मोबाइल क्षेत्र से जुड़े एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मानें तो इन्हीं टावर से सिग्नल की फ्रीक्वेंसी घटा-बढ़ा कर कॉल ड्रॉप का खेल होता है।
जिले में वर्तमान में करीब 35 लाख मोबाइल यूजर्स हैं, इनमें 12 लाख अकेले बीएसएनएल कस्टमर हैं जबकि 23 लाख कस्टमर निजी क्षेत्र के आठ से अधिक मोबाइल सेवा प्रदाता ऑपरेटरों के नेटवर्क से जुड़े हैं।
कॉल ड्रॉप की समस्या ज्यादातर एक मोबाइल ऑपरेटर के नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क पर कॉल करने पर आती है। इस दौरान एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क का मोबाइल नंबर मिलाने पर फोन मिलता तो हैं लेकिन कॉल रिसीव करते ही कट जाता है।
इस तरह दो से तीन बार मिलने के बाद ही कस्टमर की पूरी बात हो पाती है। बीएसएनएल सहित एयरटेल, वोडाफोन व रिलायंस मोबाइल सेवा के संचालन से जुड़े जिम्मेदार भी मानते हैं कि एक मोबाइल सेवा प्रदाता के नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क पर कॉल ड्रॉप की परेशानी सबसे ज्यादा होती है।
जिले में वर्तमान में करीब 35 लाख मोबाइल यूजर्स हैं, इनमें 12 लाख अकेले बीएसएनएल कस्टमर हैं जबकि 23 लाख कस्टमर निजी क्षेत्र के आठ से अधिक मोबाइल सेवा प्रदाता ऑपरेटरों के नेटवर्क से जुड़े हैं।
कॉल ड्रॉप की समस्या ज्यादातर एक मोबाइल ऑपरेटर के नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क पर कॉल करने पर आती है। इस दौरान एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क का मोबाइल नंबर मिलाने पर फोन मिलता तो हैं लेकिन कॉल रिसीव करते ही कट जाता है।
इस तरह दो से तीन बार मिलने के बाद ही कस्टमर की पूरी बात हो पाती है। बीएसएनएल सहित एयरटेल, वोडाफोन व रिलायंस मोबाइल सेवा के संचालन से जुड़े जिम्मेदार भी मानते हैं कि एक मोबाइल सेवा प्रदाता के नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क पर कॉल ड्रॉप की परेशानी सबसे ज्यादा होती है।