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कैग की रिपोर्ट में खुलासा : राजकीय पॉलीटेक्निक उतरौला के लिए जमीन चयन में लापरवाही
Fri, 20 Aug 2021 11:23 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 20 Aug 2021 11:23 AM IST
सार
बृहस्पतिवार को विधानसभा पेश की कैग की रिपोर्ट के अनुसार अनुपयुक्त भूमि का चयन करने के चलते पॉलीटेक्निक संस्थान के निर्माण में दिक्कतें आईं।
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cag
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कैग ने राजकीय पॉलीटेक्निक उतरौला बलरामपुर के निर्माण के लिए राप्ती नदी के बाढ़-जलभराव क्षेत्र में आने वाली जमीन के चयन पर सवालिया निशान लगाया है। बृहस्पतिवार को विधानसभा पेश की कैग की रिपोर्ट के अनुसार अनुपयुक्त भूमि का चयन करने के चलते पॉलीटेक्निक संस्थान के निर्माण में दिक्कतें आईं। वर्ष 2009 से 2019 तक 10 वर्ष का समय बीतने के बावजूद उसके निर्माण पर खर्च किए गए 16.44 करोड़ रुपये का कोई फायदा नहीं हुआ।
पीपीपी योजना आईटीआई चयन में हुआ धांधली का खुलासा
नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में व्यावसायिक शिक्षा में अनियमिताताओं का खुलासा किया गया है। बृहस्पतिवार को विधानसभा में रखी गई रिपोर्ट के अनुसार पीपीपी राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) योजना, उद्योग भागीदार और मॉडल आईटीई योजना को लागू करने करने में एनसीवीटी और भारत के मानकों का पालन नहीं किया गया। इससे प्रशिक्षुओं को नुकसान उठाना पड़ा।
कैग की रिपोर्ट के अनुसार लेखा परीक्षा में पाया गया कि राज्य में पीपीपी योजना के अंतर्गत चयनित 115 राजकीय आईटीआई में से 26 संस्थान चयन मापदंड को पूरा नहीं करते थे। मई 2010 तक चयनित 75 राजकीय आईटीआई में से 11 एनसीवीटी से संबद्ध नहीं थे। मई 2010 में दिशा-निर्देश के पुनरीक्षण के बाद चयनित 40 राजकीय आईटीआई का चयन किया गया था। यह आईटीआई एनसीवीटी से संबद्ध थे। लेकिन इनमें 15 चयन के लिए पात्र नहीं थे। क्योंकि सात आईटीआई 2007 के बाद स्थापित किए गए थे। जबकि आठ संस्थानों के पास स्वयं के भवन नहीं थे।
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नमूना जांच के लिए 19 राजकीय आईटीआई की जांच की गई तो पता चला कि बड़हलगंज गोरखपुर उस समय तक स्वयं के भवन के बिना संचालित किया जा रहा था। जबकि सात अन्य आईटीआई आंशिक रूप से एनसीवीटी से संबद्ध थे। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार शासन की गलती से एनसीवीटी से संबद्धता न होने के कारण ऐसे संस्थानों से उत्तीर्ण प्रशिक्षुओं को एनसीवीटी प्रमाण पत्र नहीं मिल पाया। जो कि बेहतर रोजगार के अवसर पाने के लिए महत्वपूर्ण था।
मॉडल आईटीआई के चयन में अनियमितता
जांच में पाया गया कि साकेत मेरठ और करौंदी वाराणसी के राजकीय आईटीआई के इलेक्ट्रीशियन व्यवसाय को केंद्रीय योजनाओं के तहत उन्नयन के लिए 2005-06 और 2007-08 में लिया गया था। इसके बावजूद दोनों आईटीआई के इलेक्ट्रीशियन व्यवसाय को मॉडल राजकीय आईटीआई योजना के अंतर्गत चुना गया। जो कि योजना के दिशा-निर्देश के अनुरूप नहीं था।
उद्योग भागीदारों के चयन में मिली गड़बड़ी
कैग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में पीपीपी योजना के अंतर्गत 80 राजकीय आईटीआई 2007-11 के बीच और 35 आईटीआई 2011-12 के बीच चयनित किए गए थे। इसमें भारत सरकार ने उद्योग भागीदार के चयन की अपेक्षा राज्य सरकार से की थी। लेकिन निदेशालय ने उद्योग भागीदार चयन में भारत सरकार के किसी भी मापदंड का पालन नहीं किया। रिपोर्ट के अनुसार उद्योग भागीदार चयन के लिए एक उद्योग संघ के साथ योजना की जानकारी को निदेशालय ने साझा किया था।
इसी संघ ने शासन को जानकारी दी थी कि जिन 11 उद्योग भागीदारों का चयन निदेशालय ने किया है, उनके चयन में संघ की सलाह नहीं ली गई। जांच में पाया गया कि 2011-12 में चयनित 35 राजकीय आईटीआई में 21 में उद्योग भागीदार के चयन में भारत सरकार के मापदंडों का पालन नहीं किया गया था।
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पीपीपी योजना आईटीआई चयन में हुआ धांधली का खुलासा
नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में व्यावसायिक शिक्षा में अनियमिताताओं का खुलासा किया गया है। बृहस्पतिवार को विधानसभा में रखी गई रिपोर्ट के अनुसार पीपीपी राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) योजना, उद्योग भागीदार और मॉडल आईटीई योजना को लागू करने करने में एनसीवीटी और भारत के मानकों का पालन नहीं किया गया। इससे प्रशिक्षुओं को नुकसान उठाना पड़ा।
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कैग की रिपोर्ट के अनुसार लेखा परीक्षा में पाया गया कि राज्य में पीपीपी योजना के अंतर्गत चयनित 115 राजकीय आईटीआई में से 26 संस्थान चयन मापदंड को पूरा नहीं करते थे। मई 2010 तक चयनित 75 राजकीय आईटीआई में से 11 एनसीवीटी से संबद्ध नहीं थे। मई 2010 में दिशा-निर्देश के पुनरीक्षण के बाद चयनित 40 राजकीय आईटीआई का चयन किया गया था। यह आईटीआई एनसीवीटी से संबद्ध थे। लेकिन इनमें 15 चयन के लिए पात्र नहीं थे। क्योंकि सात आईटीआई 2007 के बाद स्थापित किए गए थे। जबकि आठ संस्थानों के पास स्वयं के भवन नहीं थे।
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नमूना जांच के लिए 19 राजकीय आईटीआई की जांच की गई तो पता चला कि बड़हलगंज गोरखपुर उस समय तक स्वयं के भवन के बिना संचालित किया जा रहा था। जबकि सात अन्य आईटीआई आंशिक रूप से एनसीवीटी से संबद्ध थे। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार शासन की गलती से एनसीवीटी से संबद्धता न होने के कारण ऐसे संस्थानों से उत्तीर्ण प्रशिक्षुओं को एनसीवीटी प्रमाण पत्र नहीं मिल पाया। जो कि बेहतर रोजगार के अवसर पाने के लिए महत्वपूर्ण था।
मॉडल आईटीआई के चयन में अनियमितता
जांच में पाया गया कि साकेत मेरठ और करौंदी वाराणसी के राजकीय आईटीआई के इलेक्ट्रीशियन व्यवसाय को केंद्रीय योजनाओं के तहत उन्नयन के लिए 2005-06 और 2007-08 में लिया गया था। इसके बावजूद दोनों आईटीआई के इलेक्ट्रीशियन व्यवसाय को मॉडल राजकीय आईटीआई योजना के अंतर्गत चुना गया। जो कि योजना के दिशा-निर्देश के अनुरूप नहीं था।
उद्योग भागीदारों के चयन में मिली गड़बड़ी
कैग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में पीपीपी योजना के अंतर्गत 80 राजकीय आईटीआई 2007-11 के बीच और 35 आईटीआई 2011-12 के बीच चयनित किए गए थे। इसमें भारत सरकार ने उद्योग भागीदार के चयन की अपेक्षा राज्य सरकार से की थी। लेकिन निदेशालय ने उद्योग भागीदार चयन में भारत सरकार के किसी भी मापदंड का पालन नहीं किया। रिपोर्ट के अनुसार उद्योग भागीदार चयन के लिए एक उद्योग संघ के साथ योजना की जानकारी को निदेशालय ने साझा किया था।
इसी संघ ने शासन को जानकारी दी थी कि जिन 11 उद्योग भागीदारों का चयन निदेशालय ने किया है, उनके चयन में संघ की सलाह नहीं ली गई। जांच में पाया गया कि 2011-12 में चयनित 35 राजकीय आईटीआई में 21 में उद्योग भागीदार के चयन में भारत सरकार के मापदंडों का पालन नहीं किया गया था।