फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   CAG report on Yamuna Express way

CAG रिपोर्ट: एक और घोटाला आया सामने

Thu, 03 Jul 2014 01:43 PM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 03 Jul 2014 01:43 PM IST
विज्ञापन
CAG report on Yamuna Express way

किसी खजाने को अगर उसे बचाने वाले ही लुटाने पर उतर आएं तो हाल क्या होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। बसपा शासनकाल में यमुना एक्सप्रेस के नाम पर कायदे-कानून को ताक पर रखकर यह खेल खूब खेला गया। इसका सीधा फायदा जेपी इंफ्राटेक को मिला।

विज्ञापन


बसपा राज में तेज रफ्तार यातायात तथा औद्योगिक व शहरी विकास का हवाला देकर यमुना एक्सप्रेस-वे का सपना दिखाया गया था।

लेकिन भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट से साफ है कि सरकार, शासन और विकासकर्ता की मिलीभगत ने विकास के नाम पर न सिर्फ प्रदेश की बेशकीमती संपत्ति को निजी हाथों में जाने दिया बल्कि सरकारी खजाने को चोट पहुंचाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी।
विज्ञापन

प्राइवेट कंपनियों को दी खुली छूट

CAG report on Yamuna Express way

जनता की धन-संपत्ति को किस कदर लुटाया गया इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि जो पूरा एक्सप्रेस-वे नोएडा के मात्र एक भूखंड की लागत में बनकर तैयार होता और बनाने वाली कंपनी शर्त से अधिक मुनाफा भी कमाती, उसके लिए उसे बेहद महंगे चार-चार अतिरिक्त भूखंड दे दिए गए।

यही नहीं, जनता का हित नजरंदाज कर कंपनी को मनमानी तरीके से टोल टैक्स वसूलने की इजाजत भी दे दी गई।

सबसे दिलचस्प तो यह कि विकासकर्ता के चयन के लिए टेंडर आमंत्रित करने से पहले ही नोएडा टोल ब्रिज व ग्रेटर नोएडा के बीच 25 किमी एक्सप्रेस-वे के प्रथम चरण का काम करा दिया गया और आम जनता के लिए खोल भी दिया।

ताक पर रख दी वित्त विभाग की सलाह

CAG report on Yamuna Express way

प्रमुख सचिव वित्त ने अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग को परियोजना की फिजिबिलिटी तय करने के लिए तकनीक व आर्थिक संभावनाओं से जुड़ी रिपोर्ट तैयार करने के बाद टेंडर आमंत्रित करने को कहा था।

साथ ही टेंडर में यह शर्त शामिल करने की सलाह दी थी कि जैसे ही परियोजना पर भूमि के विकास व टोल संग्रह की आय से 20 प्रतिशत हिस्सेदारी पर लाभ प्राप्त हो जाए वैसे ही रियायती अवधि समाप्त हो जाएगी और संपूर्ण संपत्ति यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधिकार में आ जाएगी।

औद्योगिक विकास विभाग ने इस सलाह को ताक पर रख कर निर्माण एजेंसी के चयन व अन्य प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

विज्ञापन

खैरात में दी हजारों करोड़ की जमीन

CAG report on Yamuna Express way

कंपनी ने एक्सप्रेस-वे की जमीन और इसके निर्माण की लागत व अन्य आकस्मिक खर्च पर 4488 करोड़ खर्च का अनुमान लगाया था। 26 प्रतिशत आकर्षक आंतरिक लाभ का प्रस्ताव अलग से था।

विकासकर्ता कंपनी (रियायती अनुबंधी) द्वारा पेश तकनीकी-आर्थिक संभाव्यता रिपोर्ट में 2006-07 से 2011-12 के दौरान पांच भूखंडों की बिक्री से 5125 करोड़ की आय का अनुमान लगाया गया।

यह एक्सप्रेस-वे की निर्माण लागत को पूरा करने व अपने निवेश पर 26 प्रतिशत आकर्षक लाभ के लिए पर्याप्त था। सीएजी ने खुलासा किया है कि कंपनी की तकनीकी-आर्थिक संभाव्यता रिपोर्ट की तैयारी के समय अकेले नोएडा के भूखंड का मूल्य 5718.30 करोड़ रुपये था।

यह उसकी लागत व 26 प्रतिशत लाभ की रकम से अधिक थी। ऐसे में चार अन्य भूखंड कंपनी को खैरात की तरह दे दिए गए।

स्टांप शुल्क में भी 10 करोड़ की छूट

CAG report on Yamuna Express way

कंपनी को आवंटित जमीन की रजिस्ट्री पर 9.98 करोड़ की नियम विरुद्ध छूट दिलाई। सीएजी के अनुसार स्टांप शुल्क की छूट आवश्यक होने पर ही दी जानी थी। साथ ही टेंडर प्रपत्र में इसका प्रावधान होना आवश्यक था। चूंकि टेंडर प्रपत्र में स्टांप शुल्क छूट की कोई शर्त शामिल नहीं थी। इसके बावजूद भारतीय स्टांप अधिनियम की अधिसूचना जारी किए बिना पहले ही शुल्क में छूट दे दी।

टोल वसूल कर जनता को लूटने की दी छूट
यमुना एक्सप्रेस-वे पर विकासकर्ता कंपनी टोल के रूप में आम यात्रियों से जो वसूली करती है, शासन द्वारा इसकी अनुमति देने का कोई औचित्य नहीं था। सीएजी ने कहा है कि टोल संग्रह का निर्धारण इस तरह होना चाहिए कि कंपनी संचालन व रखरखाव लागत को पूरा करने में सक्षम हो।

साथ ही टोल संग्रह कंपनी के लिए पहले से स्वीकृत लाभ सीमा 26 प्रतिशत के ऊपर अतिरिक्त लाभ का जरिया न बन जाए। लेकिन सरकार ने कंपनी को पहले से उच्चस्तरीय लाभ प्राप्त होने की जानकारी के बावजूद ऐसी टोल दरें तय की जो संचालन व रखरखाव खर्च घटाने के बाद भी कंपनी को 26 प्रतिशत से अधिक आय देगी।

कंपनी ने एक्सप्रेस- वे वास्तविक संचालन व रखरखाव पर अगस्त 2012 से जनवरी 2014 तक 49.03 करोड़ रुपये खर्च किए। इसी अवधि में उसने 167.49 करोड़ का टोल वसूला। सीधे तौर पर कंपनी को 118.46 करोड़ की आय हुई। यह 26 प्रतिशत प्रस्तावित लाभ योजना के इतर रही।

मनमाना मुनाफा कमाने का किया बंदोबस्त

CAG report on Yamuna Express way

एक्सप्रेस वे बनाने के बदले कंपनी को कमाई के खूब अवसर उपलब्ध कराए गए। इसके लिए निवेशक कंपनी के साथ लाभ की आंतरिक दर तय करने में नियमों को ताक पर रखा गया।

पहले इसे 21 प्रतिशत तय किया गया जिसे बाद में बढ़ाकर 26 प्रतिशत कर दिया गया। यह वित्त विभाग द्वारा तय लाभ की दर 20 प्रतिशत से अधिक था।

यह राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण के वित्तपोषण कोर ग्रुप की रिपोर्ट में स्वीकृत 15 प्रतिशत व प्रदेश सरकार की दीर्घकालिक व बड़ी पूंजी वाली निजी क्षेत्र की बिजली परियोजनाओं में स्वीकृत 15 प्रतिशत से अधिक थी।

सीएजी ने कहा है कि शासन ने लाभ की उच्च आंतरिक दर तय करने में इन तथ्यों की अनदेखी की जिसका सीधा फायदा कंपनी को मिल रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed